भारी कर्ज में डूबा पंजाब, खर्च और आमदनी में संतुलन लाना सरकार का उत्तरदायित्व : मनीष तिवारी

रिपोर्ट : कोमल रमोला

चंडीगढ़ : पंजाब में ‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना के तहत’ महिलाओं को एक-एक हजार रुपए दिए जाने की घोषणा के बाद कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में अरुणाचल प्रदेश के बाद पंजाब दूसरा सबसे कर्जदार राज्य है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “लोगों को सुविधाएं देने और राहत पहुंचाने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि हर सरकार का काम है। लेकिन पंजाब पर 4.47 लाख करोड़ रुपए का कर्जा है। राज्य सरकार ब्याज पर पैसा ले रही है, वो उसे चुकाने के लिए क्या कर रही है। आज की तारीख में अरुणाचल प्रदेश के बाद पंजाब दूसरा सबसे कर्जदार राज्य है। कर्ज-राज्य जीडीपी अनुपात लगभग 46 प्रतिशत है।” उन्होंने आगे कहा, “जितना पंजाब कर्जा ले रहा है, वह पुराने कर्ज की ब्याज चुकाने के लिए ले रहा है। इस तरह किसी भी प्रदेश का राजस्व नहीं चल सकता है। लोगों को सहूलियत देना या उनकी आर्थिक मदद करना, वह अपनी जगह सही है, लेकिन उसके साथ-साथ राजस्व के स्त्रोत ठीक करना, सरकार के खर्च और आमदनी में संतुलन लाना, ये भी सरकार का उत्तरदायित्व बनता है।”

इसी बीच, मनीष तिवारी ने देश में परिसीमन के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “देश में सबसे बड़ा मुद्दा परिसीमन का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में कहा कि दक्षिण राज्यों की सीटें परिसीमन में कम नहीं होंगी, लेकिन असल में यह गलत है। पीएम मोदी को यह बताना चाहिए कि कौन-कौन से राज्यों की सीटें बढ़ेंगी। सीटें कम होना अलग बात है, लेकिन किस राज्य की सीटें बढ़ेंगी और कितनी मात्रा में बढ़ेंगी, इसका किन राज्यों पर अक्सर पड़ेगा, यह बुनियादी सवाल है।”

वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री आसिफ ख्वाजा के ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ वाले बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, “1971 से पाकिस्तान भारत के खिलाफ ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ का आचरण ही कर रहा है। इन्होंने ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ में पीएचडी की हुई है। चाहे अफगानिस्तान हो, भारत हो या दक्षिण एशिया के अन्य देश, अगर कोई आतंकवाद का एपिक सेंटर है तो वह पाकिस्तान है। जिन लोगों ने ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ में पीएचडी की हुई है, वे दूसरों पर बेबुनियाद आरोप लगाते हैं। वह खुद को ही हास्य का पात्र बना लेते हैं।”

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