राष्ट्रपति मुर्मु ने शिवकुमार महास्वामीजी के 119वें जयंती समारोह में लिया हिस्सा, सेवा और शिक्षा को बताया आधार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को कर्नाटक के तुमकुरु स्थित श्री सिद्धगंगा मठ में डॉ. श्री श्री शिवकुमार महास्वामीजी के 119वें जन्मदिन समारोह और गुरुवंदन महोत्सव में भाग लिया।

स्वामीजी को बताया राष्ट्र की आत्मा का स्वरूप
राष्ट्रपति ने कहा कि शिवकुमार महास्वामीजी जैसे संत समाज और राष्ट्र की आत्मा के साक्षात स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि 2019 में उनके देहावसान के बावजूद उनकी आध्यात्मिक विरासत आज भी समाज को दिशा दे रही है।

सेवा और आध्यात्मिकता का अनूठा उदाहरण
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि स्वामीजी का जीवन निर्धनों और वंचितों की सेवा के लिए समर्पित रहा। उनके कार्य यह दर्शाते हैं कि आध्यात्मिकता को जनकल्याण के माध्यम से साकार किया जा सकता है।

सिद्धगंगा मठ के कार्यों की सराहना
राष्ट्रपति ने श्री सिद्धगंगा मठ की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। यहां प्राथमिक स्तर से लेकर इंजीनियरिंग और प्रबंधन तक की शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

समावेशी समाज निर्माण में अहम योगदान
उन्होंने कहा कि मठ द्वारा ग्रामीण और वंचित वर्ग के छात्रों को शिक्षा प्रदान करना एक समावेशी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिक्षा को उन्होंने आत्मनिर्भरता और व्यक्तित्व विकास की नींव बताया।

जनसेवा और राष्ट्रसेवा का संबंध
राष्ट्रपति ने कहा कि जनसेवा, राष्ट्रसेवा और आध्यात्मिकता आपस में गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने कर्नाटक को इन मूल्यों का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए राज्य के लोगों की सराहना की।

सच्ची श्रद्धांजलि का संदेश
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि परिश्रम, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलकर ही शिवकुमार महास्वामीजी को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *