संदीप सिंह मामला : पीड़िता का एग्जामिनेशन-इन-चीफ पूरा, कोर्ट में कपड़ों और मोबाइल की हुई पहचान, अगली सुनवाई 18 अप्रैल को

चंडीगढ़ : हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ चल रहे यौन उत्पीड़न के मामले में शनिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में अहम कार्यवाही हुई। जूनियर महिला हॉकी कोच (पीड़िता) ने अदालत के समक्ष अपने बयान दर्ज करवाए और मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण साक्ष्यों की पहचान की। अदालती कार्यवाही : बयान पर कायम रही पीड़िता पीड़िता के वकील समीर सेठी के अनुसार, शनिवार को ‘एग्जामिनेशन-इन-चीफ’ (मुख्य परीक्षण) की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो गई है।

साक्ष्यों की पहचान: सुनवाई के दौरान पीड़िता ने केस प्रॉपर्टी के रूप में अपने उन कपड़ों और मोबाइल फोन की शिनाख्त की, जो जांच के दौरान पुलिस को सौंपे गए थे।

दृढ़ता: पीड़िता अपने शुरुआती आरोपों और बयानों पर पूरी तरह कायम रही।

अगला कदम: ‘क्रॉस एग्जामिनेशन’ की तैयारीअदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की है। इस दिन ‘क्रॉस एग्जामिनेशन’ (जिरह) की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें बचाव पक्ष के वकील पीड़िता से सवाल-जवाब करेंगे।

मामले की पृष्ठभूमि : दिसंबर 2022 से जारी है कानूनी लड़ाई
यह विवाद 26 दिसंबर 2022 को तब शुरू हुआ था जब जूनियर महिला कोच ने चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

गंभीर आरोप: कोच का आरोप है कि तत्कालीन खेल मंत्री ने उन्हें सरकारी आवास पर बुलाकर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। आरोपों के अनुसार, बात न मानने पर पीड़िता का तबादला (ट्रांसफर) भी कर दिया गया था।

एफआईआर : सेक्टर-26 थाना पुलिस ने 31 दिसंबर 2022 को संदीप सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 354, 354ए, 354बी और 506 के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें छेड़छाड़ और आपराधिक धमकी जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।

बचाव पक्ष का तर्क: “साजिश का हिस्सा”
दूसरी ओर, संदीप सिंह और उनके वकीलों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका तर्क है कि यह पूरा मामला एक सोची-समझी साजिश है और स्थानांतरण से नाराज होकर उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है।

संदीप सिंह का करियर प्रोफाइल
संदीप सिंह भारतीय हॉकी के इतिहास में एक दिग्गज ‘ड्रैग-फ्लिकर’ के रूप में जाने जाते हैं।

वे भारतीय टीम के कप्तान रह चुके हैं।
वर्ष 2010 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
पहली बार विधायक चुने जाने के बाद उन्हें हरियाणा सरकार में खेल एवं युवा मामले मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी, जिससे इस विवाद के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

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