चंडीगढ़ : सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और एचआईवी/एड्स के खिलाफ जंग में हरियाणा ने आज एक नया अध्याय लिखा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित हरियाणा राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी (HSACS) की 23वीं बैठक में राज्य को इस गंभीर बीमारी से बचाने के लिए विकासात्मक और तकनीकी रोडमैप तैयार किया गया। सरकार ने न केवल बजट में भारी बढ़ोतरी की है, बल्कि जांच और उपचार के बुनियादी ढांचे को भी आधुनिक बनाने का संकल्प लिया है।
बजट का रणनीतिक आवंटन : 47.16 करोड़ रुपये की संजीवनी वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित 47.16 करोड़ रुपये का बजट राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस बजट को बहुत ही वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीके से बांटा गया है:
लक्ष्य आधारित हस्तक्षेप (Targeted Intervention) : 16.45 करोड़ रुपये (सबसे अधिक हिस्सा, ताकि जोखिम वाले समूहों तक सीधे पहुँचा जा सके)।
जांच सेवाएं (ICTC/BSD) : 10.90 करोड़ रुपये।
उपचार एवं देखभाल (ART) : 4.68 करोड़ रुपये।
यह वित्तीय ढांचा सुनिश्चित करेगा कि एचआईवी रोकथाम से लेकर मरीज के पुनर्वास तक की प्रक्रिया में धन की कमी आड़े न आए।
तकनीकी सुदृढ़ीकरण : पंचकूला में दूसरी वायरल लोड लैब
वर्तमान में पीजीआईएमएस रोहतक पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए पंचकूला में एक महीने के भीतर दूसरी वायरल लोड लैब शुरू की जाएगी।
फायदा : जांच रिपोर्ट मिलने में लगने वाला समय (Turnaround Time) काफी कम हो जाएगा।
विस्तार : कैथल, हिसार, पानीपत और फरीदाबाद में नई CD4 मशीनें स्थापित की गई हैं। यह विकासात्मक पहल मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग को और अधिक सटीक बनाएगी।
जीवनसाथी की जांच : ‘शून्य संक्रमण’ की दिशा में एक साहसिक पहल
बैठक में लिया गया सबसे महत्वपूर्ण और सकारात्मक निर्णय गर्भवती महिलाओं के साथ उनके जीवनसाथियों की एचआईवी और सिफलिस की संयुक्त जांच को अनिवार्य करना है।
“इस पहल का उद्देश्य ‘मातृ-से-शिशु संक्रमण’ (Mother-to-Child Transmission) को लगभग शून्य तक लाना है।”प्रति वर्ष लगभग 12 लाख संयुक्त जांचों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो एक स्वस्थ अगली पीढ़ी के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।
डिजिटल निगरानी : सुरक्षित वेब-प्लेटफॉर्म और एसएमएस अलर्ट
मरीजों के उपचार में निरंतरता (Retainment) बनाए रखने के लिए एक सुरक्षित वेब-आधारित प्लेटफॉर्म को मंजूरी दी गई है। इसके माध्यम से मरीजों को वॉइस मैसेज और फॉलो-अप रिमाइंडर भेजे जाएंगे। यह व्यवहारात्मक सुधार यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी मरीज उपचार के बीच में न छूटे (Loss to Follow-up)।
लक्ष्य 95-95-99 : वैश्विक मानकों की ओर हरियाणा
डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्पष्ट किया कि विभाग 95-95-99 के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है:
95% संक्रमितों की पहचान करना।
95% को समय पर उपचार (ART) से जोड़ना।
99% मरीजों में वायरल लोड को नियंत्रित रखना।
सामाजिक और औद्योगिक समन्वय
सरकार ने अब इस लड़ाई को केवल अस्पतालों तक सीमित न रखकर कार्यस्थलों (Workplaces) और शिक्षण संस्थानों तक पहुँचाने का निर्देश दिया है। बड़े संस्थानों में एचआईवी नीति लागू करना, गिग वर्कर्स तक पहुंच बनाना और कॉलेजों में ‘रेड रिबन क्लब’ को सक्रिय करना इस अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप देगा।
