पंजाब के राज्यपाल और यूटी प्रशासक ने भूतपूर्व सैनिकों के लिए कल्याणकारी उपायों को मजबूत करने हेतु स्टेट सैनिक बोर्ड की नियमित बैठकों पर जोर दिया

 

चंडीगढ़, 7 मार्च, : पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया की अध्यक्षता में आज पंजाब राजभवन में स्टेट सैनिक बोर्ड, पंजाब की 34वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहीदों, भूतपूर्व सैनिकों, युद्ध विधवाओं और उनके आश्रितों के परिवारों के लिए विभिन्न कल्याणकारी उपायों की समीक्षा और उन्हें मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए माननीय राज्यपाल ने सभी सदस्यों का स्वागत किया और भूतपूर्व सैनिकों के लिए कल्याणकारी पहलों के कार्यान्वयन का आकलन करने और बढ़ाने के लिए नियमित आधार पर बैठकें आयोजित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र के लिए सर्वाेच्च बलिदान देने वाले शहीदों के परिवारों को राज्य की नीतियों में हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पंजाब के रक्षा सेवा कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री जे.एम. बालामुरुगन ने रक्षा सेवा कल्याण विभाग (डीएसडब्ल्यू) पंजाब द्वारा किए जा रहे प्रयासों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करके कार्यवाही की शुरुआत की। इसके बाद डीएसडब्ल्यू पंजाब के निदेशक ब्रिगेडियर भूपिंदर सिंह ढिल्लों (सेवानिवृत्त) ने संबोधित किया, जिन्होंने भूतपूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए विभाग और राज्य सैनिक बोर्ड की प्रमुख पहलों के बारे में विस्तार से बताया।

बैठक के दौरान, माननीय राज्यपाल ने रक्षा सेवा कल्याण विभाग में अधिकारियों की कमी को तत्काल दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी कल्याणकारी योजनाएं और पहल प्रभावी रूप से क्रियान्वित हों। उन्होंने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए आरक्षित 13 प्रतिशत कोटा के तहत उपलब्ध नौकरियों का लाभ उठाने हेतु पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को विशेष प्रशिक्षण एवं अधिकतम रोजगार के अवसर प्रदान करने के ब्रिगेडियर दिग्विजय बसेरा के विचारों का समर्थन किया।

चर्चा का एक महत्वपूर्ण फोकस अग्निवीरों के पुनर्वास पर था। माननीय राज्यपाल ने अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में शामिल करने के लिए विशेष प्रावधानों की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि पंजाब के निजी क्षेत्र में उनके लिए अधिकतम रोजगार के अवसर सृजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों के पास बहुमूल्य कौशल हैं, जिनका विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्रों में बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे राज्य के समग्र कार्यबल में योगदान मिल सके। इसके अनुरूप, उन्होंने निर्देश दिया कि स्थानीय भूतपूर्व सैनिकों को स्थानीय स्तर पर नौकरियां दी जानी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अपने समुदायों की सेवा करना जारी रख सकें।

माननीय राज्यपाल ने आगे निर्देश दिया कि सेवानिवृत्त सशस्त्र बलों के कर्मियों के बारे में डेटा केंद्रीय सैनिक बोर्ड और पुनर्वास महानिदेशालय, नई दिल्ली जैसे केंद्रीय निकायों द्वारा साझा किया जाना चाहिए, ताकि कुशल जनशक्ति का व्यापक मानचित्रण किया जा सके। इस डेटा को एसएसएसबी पंजाब एवं पीपीएससी के पोर्टलों में एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि नौकरी की रिक्तियों को योग्य, कुशल और अनुभवी उम्मीदवारों के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भूतपूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए 13 प्रतिशत नौकरी आरक्षण के बारे में अधिक जागरूकता पैदा की जानी चाहिए, साथ ही इन पदों के लिए उन्हें योग्य बनाने में मदद करने के लिए प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने चाहिए।

बैठक दौरान जारी एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश में पंजाब सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं संबंधी जागरूकता और प्रचार-प्रसार बढ़ाना भी शामिल था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभार्थी इन सेवाओं का पूरा लाभ उठा सकें।

अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री जे.एम. बालामुरुगन ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया और सत्र का औपचारिक समापन किया।

बैठक में पंजाब के माननीय वित्त मंत्री श्री हरपाल सिंह चीमा, रक्षा सेवा कल्याण के प्रभारी मंत्री श्री मोहिंदर भगत, पंजाब के मुख्य सचिव श्री के.ए.पी. सिन्हा, पंजाब के राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री वी पी सिंह, रक्षा सेवा कल्याण के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री जे.एम. बालामुरुगन, रक्षा सेवा कल्याण बोर्ड के निदेशक ब्रिगेडियर भूपिंदर सिंह ढिल्लों (सेवानिवृत्त) के अलावा विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उपस्थित थे।

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