यूटी चंडीगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य एवं पोषण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

प्रीति कंबोज
चंडीगढ़, 13 अक्टूबर 2025: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, पोषण संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देने तथा डिजिटल स्वास्थ्य पहचान कवरेज को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हाल ही में चंडीगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों — मनीमाजरा, पलसोरा एवं आर.सी. धनास-I — में सामुदायिक जागरूकता एवं स्वास्थ्य आउटरीच गतिविधियों की श्रृंखला आयोजित की गई।

मनीमाजरा में मौसमी फलों एवं सब्ज़ियों के सेवन के महत्व पर एक जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। सत्र में मौसमी उत्पादों के स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डाला गया तथा समुदाय के लोगों को इन्हें अपने दैनिक आहार में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही, आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA ID) सृजन अभियान भी चलाया गया ताकि लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और अपनी विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान प्राप्त करने में सक्षम बनाया जा सके।

पलसोरा में स्तनपान की उचित तकनीकों पर एक विस्तृत व्याख्यान आयोजित किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गर्भवती एवं नवमाताओं को केवल स्तनपान के महत्व, सही तरीके से बच्चे को स्तन से लगाना (लैचिंग), तथा जन्म के तुरंत बाद स्तनपान आरंभ करने से शिशु मृत्यु दर में कमी और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के बारे में जानकारी दी।

आर.सी. धनास-I में एक व्यापक बहु-सेवा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया, जिसमें पीएम मातृ वंदना योजना (PMMVY) पंजीकरण, एबीएचए आईडी, अपार आईडी एवं आधार कार्ड सृजन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। शिविर के दौरान मातृ पोषण एवं बाल स्वास्थ्य पर परामर्श सत्र भी आयोजित किए गए, जिससे आईसीडीएस एवं अन्य संबंधित योजनाओं के अंतर्गत सेवा वितरण को सुदृढ़ किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) में अनेक छोटे किन्तु प्रभावी कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका केंद्र बिंदु मातृ एवं बाल स्वास्थ्य तथा प्रारंभिक शिक्षा रहा। इन गतिविधियों में शीघ्र स्तनपान को प्रोत्साहन, गर्भवती महिलाओं के लिए मोटे अनाज (मिलेट्स) के उपयोग को बढ़ावा, नियमित वृद्धि मॉनिटरिंग एवं 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए प्री-स्कूल शिक्षा शामिल थीं।

विभिन्न स्वास्थ्य एवं पोषण विषयों जैसे संतुलित आहार, मौखिक स्वच्छता, खाद्य सुदृढ़ीकरण एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व, तथा अनुपूरक आहार (complementary feeding) पर भी जागरूकता व्याख्यान आयोजित किए गए। गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) बच्चों की पहचान एवं देखभाल पर विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिनसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं अभिभावकों को प्रारंभिक स्तर पर कुपोषण की पहचान एवं प्रबंधन में सहायता मिली।

पर्यावरणीय स्थिरता एवं घरेलू पोषण को बढ़ावा देने हेतु फलदार पौधों के प्रचार पर भी व्याख्यान आयोजित किए गए। वहीं, घर-घर जाकर प्रारंभिक बाल्य देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) तथा मौखिक स्वच्छता के महत्व पर जागरूकता फैलाई गई।

एक विशेष व्यापक पहल के तहत, सभी 450 आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े घरों का दौरा किया गया। इन दौरों के दौरान संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, बाल मोटापे की पहचान करने एवं संतुलित आहार पर परामर्श देने पर विशेष ध्यान दिया गया। इन गृह भेंटों के माध्यम से अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं ने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक गर्भवती महिला एवं छोटे बच्चों वाले परिवारों तक आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग पहुंच सके।

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