बेहतर संबंधों की दिशा में एक बड़ा कदम..
सीमा पार बिजली परियोजनाओं पर दोनों देशों ने बढ़ाया कदम
नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के साथ नेपाल ऊर्जा मंत्री कुलमान घिसिंग के बीच हुई बैठक
रिपोर्ट: प्रीति कंबोज
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। भारत और नेपाल ने ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक ओर कदम बढ़ाया है। दोनों देशों के बीच सीमा पार विद्युत प्रसारण प्रणाली (क्रॉस बॉर्डर ट्रांसमिशन सिस्टम) पर सहमति बनी है
नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल और नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री कुलमान घिसिंग के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में सीमा पार विद्युत प्रसारण प्रणाली और जल विद्युत परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। इसके साथ ही क्षेत्रीय ग्रिड कनेक्टिविटी को मजबूत करने और सीमा पार बिजली व्यापार को लेकर दोनों मंत्रियों ने भारत-नेपाल के बीच ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा के एकीकरण और सतत आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई।
केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल और नेपाल के ऊर्जा मंत्री कुलमान घिसिंग की मौजूदगी में पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के बीच दो संयुक्त उपक्रम एवं शेयरधारक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते भारत और नेपाल में दो संयुक्त उपक्रम कंपनियों के गठन और उच्च क्षमता वाले विद्युत प्रसारण नेटवर्क के विकास को मजबूती देगा। नेपाल के इनरूवा और भारत के न्यू पूर्णिया के बीच 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लिंक के साथ नेपाल के लम्की-डोडोधारा और भारत के बरेली के बीच 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लिंक परियोजना शुरू होगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर भारत और नेपाल के बीच बिजली के आदान-प्रदान की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे क्षेत्रीय ऊर्जा तंत्र मजबूत होगा, ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ेगी और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार होगा।
भारत-नेपाल की दशकों पुरानी मित्रता : मनोहर लाल
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि भारत-नेपाल की दशकों पुरानी मित्रता को ऊर्जा सहयोग के नए युग में परिवर्तित करने का प्रतीक है। साझा विकास, स्वच्छ ऊर्जा और क्षेत्रीय समृद्धि की दिशा में एक मील का पत्थर है। भारत और नेपाल द्वारा जल विद्युत परियोजनाओं में भी विद्युत उत्पादन की कार्य योजना तैयार की जा रही है। दोनों देशों विद्युत परियोजनाओं को गति देने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। ऊर्जा क्षेत्र में मिलकर आगे बढ़ना दोनों देशों के विकास, क्षेत्रीय समृद्धि और स्थायी भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी को और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

