सुमेश कुमार
चंडीगढ़, 23 जनवरी :
आज यूटी सचिवालय, चंडीगढ़ में गृह मंत्रालय (MHA) के जॉइंट सचिव (UT) श्री प्रवीन कुमार राय की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य गृह मंत्रालय की प्रमुख पहलों, विशेष रूप से नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की प्रगति का आकलन करना था।
बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन के गृह सचिव श्री मंदीप सिंह बराड़, IAS; चंडीगढ़ पुलिस के पुलिस महानिदेशक डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, IPS, तथा चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक की शुरुआत में अधिकारियों ने नए आपराधिक कानूनों को लागू करने की दिशा में अब तक हुई प्रगति की जानकारी दी, जिसमें आवश्यक अधिसूचनाओं और दिशा-निर्देशों के जारी किए जाने की स्थिति शामिल थी। बताया गया कि चंडीगढ़ ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने अधिकांश दायित्व पूरे कर लिए हैं, जबकि कुछ नियम माननीय उच्च न्यायालय से परामर्श के पश्चात अंतिम स्वीकृति के चरण में हैं, जो आपराधिक न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रशासन ने यह भी अवगत कराया कि आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े सभी प्रमुख हितधारकों: पुलिस, कारागार, अभियोजन, फॉरेंसिक विशेषज्ञों एवं न्यायपालिका का प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पूरा कर लिया गया है, जिससे नए कानूनी ढांचे के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु संस्थागत तैयारी सुनिश्चित हुई है।
डिजिटल सुधारों पर भी अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की गई, जिनमें ई-साक्ष्य, ई-समन, ई-प्रॉसिक्यूशन, न्याय-सेतु एवं न्याय-श्रुति जैसे प्लेटफॉर्म तथा FIR और आरोप पत्रों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायालयों के साथ साझा करने की व्यवस्था शामिल है। इन पहलों का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रक्रिया को अधिक तेज, सुगम और पारदर्शी बनाना है।
बैठक में फॉरेंसिक इकोसिस्टम में हुए सुधारों की भी समीक्षा की गई, जिनमें विशेष रूप से सुसज्जित फॉरेंसिक मोबाइल वैन की तैनाती, उन्नत फॉरेंसिक तकनीकों का उपयोग तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का राष्ट्रीय आपराधिक न्याय प्रणाली के साथ एकीकरण शामिल है। इसके अतिरिक्त, पारदर्शिता और सेवा वितरण को सुदृढ़ करने हेतु क्यूआर-आधारित फीडबैक प्रणाली, शिकायत निवारण पोर्टल और SMS अलर्ट सेवाओं जैसे नागरिक-केंद्रित उपाय भी शुरू किए गए हैं।
यह भी उल्लेख किया गया कि चंडीगढ़ देश का पहला राज्य/केंद्र शासित प्रदेश बनकर उभरा है, जिसने पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक, कारागार एवं न्यायालयों के बीच सशक्त अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से नए आपराधिक कानूनों को सफलतापूर्वक लागू किया है। नए कानूनों के तहत 89 प्रतिशत की उत्साहजनक दोषसिद्धि दर भी दर्ज की गई है, जो प्रारंभिक सकारात्मक परिणामों को दर्शाती है।
बैठक में कुछ ऐसे क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई जिनमें और अधिक समन्वय की आवश्यकता है, जैसे वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग नियमों को सुदृढ़ करना तथा न्यायालयों और अभियोजन एजेंसियों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार करना, ताकि दक्षता, पहुंच और सुविधा को और बेहतर बनाया जा सके।
बैठक को संबोधित करते हुए श्री प्रवीन कुमार राय ने कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोई भी केंद्र शासित प्रदेश विकास, सुशासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में पीछे न रहे, तथा दक्षता, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन पर निरंतर जोर दिया जाएगा।
बैठक का समापन लंबित मामलों के त्वरित निपटान, अंतर-विभागीय समन्वय को और मजबूत करने तथा गृह मंत्रालय के उद्देश्यों के अनुरूप सुधार पहलों को निरंतर जारी रखने के निर्देशों के साथ हुआ।

