पंचकूला शतरंज चैंपियनशिप 2026 में उभरी नन्हे खिलाड़ियों की प्रतिभा, विजेताओं को ट्रॉफी व सम्मा
टिंकरबेल, सेक्टर-8 में आयोजित प्रतियोगिता ने बच्चों में धैर्य, रणनीति और नेतृत्व कौशल को दी नई दिशा
रोमी सिंह /रमोला न्यूज़
पंचकूला, 29 मार्च।
पंचकूला शतरंज चैंपियनशिप 2026 का सफल आयोजन रविवार को सेक्टर-8 स्थित टिंकरबेल परिसर में पंचकूला शतरंज संघ के सहयोग से उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्ग के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपनी बौद्धिक क्षमता, धैर्य और रणनीतिक सोच का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि ज्ञान चंद गुप्ता (हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष) और श्री श्री 108 स्वामी संपूर्णानंद जी महाराज ब्रह्मचारी रहे। उनके साथ कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप गोयल (अध्यक्ष, द चेस एसोसिएशन पंचकूला), हरीश कुमार सचिव, , टोनी गुप्ता ( जिला उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, पंचकूला, नरेश शर्मा (सचिव, कैरम एसोसिएशन हरियाणा) तथा गुरदीप खोखर सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता के दौरान मुकाबले अनुभवी निर्णायकों की देखरेख में पूरी अनुशासन, पारदर्शिता और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराए गए। खिलाड़ियों ने प्रत्येक चाल में गजब का संयम, एकाग्रता और प्रतिस्पर्धात्मक भावना दिखाई, जिसने दर्शकों और आयोजकों को प्रभावित किया। आयोजन ने यह साबित किया कि पंचकूला के बच्चों में शतरंज जैसी बौद्धिक खेल विधा के प्रति गहरी रुचि और उत्कृष्ट प्रतिभा मौजूद है।
विजेताओं को उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए ट्रॉफी, पदक और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
अंडर-9 वर्ग में एकाक्ष वर्मा ने प्रथम, ध्रुव वत्स ने द्वितीय और सक्षम वर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
अंडर-13 वर्ग में आरव डिमरी प्रथम, तनमय द्वितीय और पुलक गुप्ता तृतीय स्थान पर रहे।
वहीं ओपन वर्ग में नरेन गुप्ता ने प्रथम, साहिल गर्ग ने द्वितीय और तेजस राय अग्रवाल ने तृतीय स्थान हासिल किया।
बालिकाओं की प्रतिभा ने भी प्रतियोगिता में विशेष आकर्षण पैदा किया। अंडर-9 वर्ग में अर्नया धीर, अंडर-13 वर्ग में द भारत स्कूल की कृतिका तथा ओपन वर्ग में शिरीन मकरू को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विशेष प्रशंसा दी गई।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के निदेशक संजय सेठी ने सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि शतरंज जैसी खेल प्रतियोगिताएं बच्चों में केवल खेल भावना ही नहीं, बल्कि धैर्य, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और टीमवर्क जैसे महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों का भी विकास करती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को भी बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
यह प्रतियोगिता न केवल एक सफल खेल आयोजन रही, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य में शतरंज के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाला एक सशक्त मंच भी साबित हुई।
