अन्न और अन्नदाता दोनों का अपमान कर रही है सरकार : दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़ : सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा सरकार का तुगलकी फरमान किसानों के लिए सिरदर्द बन चुका है। लगता है बायोमेट्रिक, ट्रैक्टर वेरिफिकेशन, 3 गारंटर जैसे नियम खरीद न करने और किसानों को परेशान करने के लिए ही बने हैं। इनको लेकर प्रदेश भर में अनेक जगहों पर मंडियों में किसानों और आढ़तियों की हड़ताल जारी है। तकनीक का इस्तेमाल सुविधा के लिए होना चाहिए, शोषण के लिए नहीं। उन्होंने मांग करी कि मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल तुरंत खोला जाए। गेहूं खरीद में नमी की सीमा 14% की जाए और बेमौसमी बारिश से हुए नुकसान के कारण काले दाने वाली गेहूं की खरीद में भी विशेष छूट दी जाए। ट्रैक्टर-ट्राली पर नंबर प्लेट की अनिवार्यता खत्म हो और बायोमेट्रिक सिस्टम बंद हो। सरकार को ये याद रखना चाहिए कि जब देश की जनसंख्या 30 करोड़ थी तब आधा देश खाली पेट सोता था और विदेशों से अनाज मँगवाकर खाना पड़ता था। कांग्रेस शासन की किसान हितकारी नीतियों और किसानों के परिश्रम का परिणाम है कि आज जब देश की जनसंख्या 140 करोड़ है तब पेट भी भरा है और अनाज के गोदाम भी भरे हैं। सरकार अन्न और अन्नदाता दोनों का अपमान कर रही है। सरकार किसानों से MSP पर फसल के दाने-दाने की खरीद सुनिश्चित करे।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में किसान और मजदूर विरोधी सरकार है। मंडियों में न बारदाना की व्यवस्था है, न तिरपाल है, न लेबर, न अन्य सुविधाएं मिल रही है। बड़े पैमाने पर किसान अपनी उपज लेकर मंडियों में पहुँच रहे हैं और जो फसल आ रही है वो मंडियों में ही पड़ी है क्योंकि उसका उठान नहीं हो रहा है और जबतक उठान नहीं होगा, तबतक किसानों की पेमेंट नहीं होगी। उन्होंने सरकार का ध्यान मंडियो में फैली अव्यवस्था पर दिलाया और किसानों व आढ़तियों के साथ समन्वय बनाकर ख़रीद को सुचारू रूप से कराने की अपील की। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि जिस गति से ख़रीद हो रही है, उस हिसाब से तो अगले 3-4 महीने में भी पूरा गेहूं ख़रीदा नहीं जा सकेगा। सरकार के मनमाने नियमों जैसे ट्रैक्टर पर बड़ी नंबर प्लेट, बायोमेट्रिक, गेट पास, 3 गारंटर जैसी ऐसी-ऐसी शर्तें लगाई जा रही है कि किसान किसान परेशान होकर मंडी के बाहर ही फसल बेचकर चला जाए। उन्होंने कहा कि हम किसान के साथ मजबूती से खड़े हैं और सरकार के तुगलकी फरमानों का डटकर विरोध करेंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार की तमाम योजनाएं, MSP मिलने के तमाम दावे खोखले और झूठे साबित हो रहे हैं। ऐसी स्थिति पिछले करीब 12 वर्षों से चल रही है। कांग्रेस सरकार के समय किसानों को न सिर्फ फसलों का एमएसपी मिलता था बल्कि धान व गेहूं की MSP में 12% और 13% की प्रति वर्ष औसतन बढ़ोतरी हुई और दालों में, उड़द हो, मूंग हो, 20% और 22% की प्रति वर्ष औसतन बढ़ोतरी हुई। एनडीए के पिछले 11 वर्ष में औसत बढ़ोतरी घटकर 5% और 6% रह गई और इसी तरीके से दालों में 6%, 8% तक घट गई। भाजपा सरकार जो एमएसपी घोषित भी कर रही है वो किसान को नहीं मिल रही। उन्होंने याद दिलाया कि हरियाणा में कांग्रेस सरकार के समय धान 5000-6000 रुपया कुंतल बिका। अबकी फसल भी कम हुई है। किसानों को ओलावृष्टि, बारिश से भारी नुकसान हुआ है। सरकार ने न तो स्पेशल गिरदावरी कराई न मुआवजा दिया न ही कोई बोनस देने की बात की। उन्होंने मांग करी कि सरकार को तुरंत गेहूं पर बोनस देना चाहिए और फसल खराबे का मुआवजा देना चाहिए।

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