मेरी यात्रा में कोई लिफ्ट नहीं थी, मैं मेहनत रुपी सीढ़ियां चढ़कर यहां तक पहुंचा: नायब सिंह सैनी

 

पार्वती रमोला /रमोला न्यूज़ ब्यूरो

चंडीगढ़ 21 अगस्त- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में ‘जेन-एच युवा उद्यमी चौपाल’ कार्यक्रम में शिरकत करते हुए युवाओं के साथ बेबाक और आत्मीय बातचीत की। युवा इंटरप्रेन्योर्स ने मुख्यमंत्री से राजनीति में बिना विरासत के आगे बढ़ने, असफलता से उबरने, तकनीक, खेल, रोजगार, नशे की चुनौती, स्टार्टअप, सरकारी कामकाज की गति और परिवार जैसे सीधे-सवाल पूछे।

मुख्यमंत्री ने कहा यह आप जेन-जी को जेन-एच (हरियाणा) कह रहे हैं और मैं इसे जेन-एचबी (हरियाणा-भारत) कहूँगा, यानी के जेन-एचबी भारत की हार्टबीट हैं। इस कार्यक्रम को 4000 से अधिक संस्थानों में लाइव देखा गया। मुख्यमंत्री ने भी बिना औपचारिकता के अपने अनुभव सांझा करते हुए कहा कि उनकी यात्रा में कोई लिफ्ट नहीं थी, केवल सीढ़ियां थीं। उन्होंने युवाओं से कहा कि असफलता को अपनी पहचान न बनने दें, काम को अपनी पहचान बनाएं और तेज सफलता के बजाय निरंतरता, विश्वसनीयता तथा धैर्य को अपनी पूंजी बनाएं।

प्रश्न: आपके पीछे कोई नहीं था, फिर राजनीति में यहां तक कैसे पहुंचे?

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी यात्रा में कोई लिफ्ट नहीं थी, केवल सीढ़ियां थीं और कई बार अगली सीढ़ी दिखाई भी नहीं देती थी। राजनीति में आने के बाद उन्हें पहला चुनाव स्वयं लड़ने की नहीं बल्कि किसी और को लड़वाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उस चुनाव में उन्होंने रात को 2-2 बजे तक मेहनत की। फिर 2009 में जब उन्हें चुनाव लड़ने को कहा गया तो उस समय उनके पास पैसे नहीं थे लेकिन लोगों ने उन्हें चुनाव लड़वाया। 2009 का चुनाव हारने के बाद उन्होंने यह तय किया कि हार को अपना परिचय नहीं बनने देंगे, बल्कि उससे सीखेंगे। अगले ही दिन वे फिर लोगों के बीच पहुंच गए। न कोई पद था और न अगले टिकट का भरोसा, लेकिन काम करने का निर्णय था। इसी भावना के चलते उन्होंने 2014 का चुनाव बड़े मार्जिन से जीता।

उन्होंने कहा कि 1996 में श्री नरेंद्र मोदी हरियाणा में भाजपा प्रभारी थे तब उन्होंने पंचकूला कार्यालय में कंप्यूटर भिजवाया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1996 में पार्टी कार्यालय में कंप्यूटर चलाते समय उन्होंने यह नहीं सोचा था कि एक दिन वे मुख्यमंत्री बनेंगे। नई तकनीक को सीखने का लाभ युवाओं को जरूर मिलता है। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले ऐसा दौर था जब युवाओं का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जाता था लेकिन यदि वह राजनीति में आगे बढ़ने की कोशिश करता था तो उसकी इच्छा को मार दिया जाता था। आज जो युवा है वह उस समय 8-10 साल का बच्चा था, इसलिए उसे उस दौर के हालात की जानकारी नहीं है लेकिन हमने पुराना दौर भी देखा है और आज का दौर भी देख रहे हैं जिसमें जमीन-आसमान का अंतर है।

प्रश्न: 2009 की चुनावी हार से आपने क्या सीखा?

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस दिन चुनाव हारा उसी दिन दोगुने जोश के साथ फिर से उठ खड़ा हुआ था। मेरे लिए पद की अहमियत नहीं रही बल्कि राष्ट्र प्रथम की भावना सर्वोपरि रही है। उस समय हम देखते थे तो इंटरनेट पर सर्च करने पर गूगल भी भ्रष्टाचार के मामले में भारत को टॉप भ्रष्ट देशों की सूची में दिखाता था, यह देखकर हमें बहुत दुख होता था। लेकिन यह मोदीजी के नेतृत्व का कमाल है कि आज दुनिया का हर देश भारतवासियों को सम्मान के नजरिए से देखता है। मेरे मन में लोगों की मदद करने की जो भावना रही उसी के चलते 2014 में लोगों ने मुझे विजयी बनाया और पार्टी ने मुझे मंत्रीपद की जिम्मेदारी दी। उसके बाद मुझे सांसद, प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री बनने का जो अवसर मिला वह लोगों का प्रेम उनके प्रति मेरी जिम्मेदारी की भावना के साथ-साथ पार्टी में मिले अवसर का परिणाम है।

प्रश्नः मुख्यमंत्री के रूप में जो फैसले लेते हैं उनका लोगों को किस प्रकार फायदा मिलता है?

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार बनने से पहले विभिन्न प्रकार की योजनाओं का पैसा लोगों के हाथों में दिया जाता था जिसके वितरण में गड़बड़ियां होती थी। जब भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिला तो इस गड़बड़ी को रोकने के लिए सबसे पहले तकनीक का सहारा लिया गया। मोदीजी द्वारा हर व्यक्ति का बैंक खाता खुलवाया गया और हमने योजनाओं का पैसा लोगों के खातों में भिजवाना शुरू किया। शुरू में बुजुर्गों ने पैसा लेने के लिए बैंक तक जाने को परेशानी समझा लेकिन आज हर व्यक्ति नई व्यवस्था से खुश है, क्योंकि अब बीच में होने वाली गड़बड़ियां पूरी तरह से बंद हो गई हैं और हर लाभार्थी के खाते में नियमति रूप से पैसा जा रहा है।

प्रश्न: आज के 22 साल के युवा के पास ऐसा क्या है जो आपके पास नहीं था ?

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के युवा के पास एक क्लिक पर दुनिया की जानकारी उपलब्ध है। उनके समय में किसी विषय को समझने के लिए सही व्यक्ति, किताब या संस्थान तक पहुंच बनानी पड़ती थी। आज छोटे शहर का युवा भी निवेशक, मेंटर, ग्राहक और वैश्विक बाजार तक पहुंच बना सकता है।

मुख्यमंत्री ने अपने अनुभवों के माध्यम से युवाओं को यह भरोसा दिया कि छोटे शहर, सामान्य परिवार या सीमित शुरुआती संसाधन किसी व्यक्ति की अंतिम सीमा नहीं हैं। विश्वसनीयता, निरंतर मेहनत, सीखने की क्षमता और कठिन समय में वापस खड़े होने का साहस ही लंबे सफर की असली पूंजी है। गुरुग्राम में हुआ यह संवाद इस अर्थ में अलग रहा कि युवाओं ने सवाल सीधे पूछे और मुख्यमंत्री ने भी जवाब औपचारिक भाषण की तरह नहीं, बल्कि अपने जीवन के अनुभवों और शासन की चुनौतियों के संदर्भ में दिए।

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