व्यावहारिक ज्ञान और रचनात्मकता ही बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे: केशनी आनंद अरोड़ा

 

चन्द्र शेखर धरणी

रमोला न्यूज़ ब्यूरो

      चंडीगढ़ 

हरियाणा की पूर्व मुख्य सचिव एवं वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्रीमती केशनी आनंद अरोड़ा ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक रूप से दक्ष, आत्मनिर्भर और नवाचार के लिए प्रेरित करना होना चाहिए। बच्चों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और जीवनोपयोगी कौशल विकसित करना समय की आवश्यकता है। वे शनिवार को डीएवी पब्लिक स्कूल, सेक्टर-8, पंचकूला में आयोजित ‘कौशल दीपोत्सव 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं।

पूर्व मुख्य सचिव ने विद्यालय में आयोजित कौशल बोध प्रदर्शनी एवं दीपावली कार्निवल का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न मॉडल, तकनीकी प्रोजेक्ट, हस्तनिर्मित कलाकृतियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी प्रस्तुतियों में विशेष रुचि दिखाई। विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने उनके विचारों, कल्पनाशीलता और प्रयोगात्मक ज्ञान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ स्वयं कुछ नया करने, समस्याओं का समाधान खोजने और टीम भावना से काम करने का अवसर देते हैं। शिक्षा को वास्तविक जीवन से जोड़ने के लिए विद्यालयों में कौशल आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि केशनी आनंद अरोड़ा हरियाणा कैडर की 1983 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। उन्होंने 30 जून 2019 को प्रदेश की 33वीं मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार संभाला था और 30 सितंबर 2020 तक इस महत्वपूर्ण पद पर सेवाएं दीं। हरियाणा की पहली महिला उपायुक्त बनने का गौरव भी उन्हें प्राप्त है। प्रशासनिक सेवाओं के दौरान उन्होंने राजस्व, आपदा प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन और ई-गवर्नेंस सहित अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया।

कार्यक्रम में विद्यालय की प्रबंधक श्रीमती जसकिरण हरिका तथा क्षेत्रीय सहायक श्रीमती जया भारद्वाज भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। ट्राइसिटी के विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, अभिभावकों, शिक्षकों, पूर्व विद्यार्थियों और सेवानिवृत्त शिक्षकों ने भी आयोजन में भाग लिया।

प्रदर्शनी में कला विभाग ने हस्तनिर्मित दीपक, मोमबत्तियां, रंगोली, तोरण और मिट्टी से बनी सजावटी वस्तुएं प्रस्तुत कीं। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विद्यार्थियों ने स्क्रैच आधारित गेम, एनिमेशन और क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल तकनीक का प्रदर्शन किया। भौतिक विज्ञान विभाग के रोबोटिक आर्म, कैटापल्ट और प्रोपेलर बोट जैसे मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे।

जीव विज्ञान विभाग और विद्यालय के माली कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से ‘ग्रो व्हाट यू ईट’ विषय पर किचन गार्डन तैयार किया, जिसमें जैविक खेती, पोषण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। बिना आग के खाना पकाने की गतिविधि में भी विद्यार्थियों ने अपनी पाक-कला और व्यावहारिक दक्षता दिखाई।

दीपावली कार्निवल में खाद्य पदार्थों, मिठाइयों, चाट, गोलगप्पे, पावभाजी और सजावटी सामान के स्टॉल लगाए गए। झूलों, मनोरंजक खेलों और लकी ड्रॉ ने बच्चों और अभिभावकों का उत्साह बढ़ाया। विद्यार्थियों की गीत-संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

शिक्षा को जीवन से जोड़ना विद्यालय की प्राथमिकता : रितु दिलबागी

विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती रितु दिलबागी ने कहा कि ‘कौशल दीपोत्सव 2026’ विद्यार्थियों की प्रतिभा, नवाचार और आत्मनिर्भरता का उत्सव है। विद्यालय का प्रयास है कि बच्चे पढ़ाई के साथ ऐसे कौशल भी सीखें, जिनका उपयोग वे वास्तविक जीवन में कर सकें। उन्होंने मुख्य अतिथि केशनी आनंद अरोड़ा सहित सभी विशिष्ट अतिथियों, अभिभावकों और शिक्षकों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने आयोजन की सफलता का श्रेय विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और विद्यालय के समस्त स्टाफ के सहयोग को दिया। कार्यक्रम ने कौशल आधारित शिक्षा, रचनात्मकता और भारतीय संस्कृति को एक साझा मंच प्रदान किया।

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