रिपोर्ट : कोमल रमोला
दिल्ली : 17 अगस्त को, भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने महाराष्ट्र के राज्यपाल एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सी. पी. राधाकृष्णन को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें “दिव्य अनुभव, विनम्रता और बुद्धिमत्ता” वाले नेता बताते हुए, विशेष रूप से समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान और जन-सेवा में उनके योगदान की सराहना की ।
राजनीतिक सफर और अहम् भूमिकाएँ
सी. पी. राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तिरुपुर, तमिलनाडु में हुआ था । उन्होंने आरएसएस से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और बाद में भाजपा में शामिल हुए । उनके पास दो बार लोकसभा चुनाव जीतने (1998, 1999, कोयंबटूर से) का अनुभव है, जबकि बाद में अन्य चुनावों में वे हार भी चुके हैं ।
वह 2024 में महाराष्ट्र के राज्यपाल बने, 2023-2024 तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया, और अतिरिक्त प्रभार के रूप में तेलंगाना राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल की जिम्मेदारियाँ भी संभालीं ।
रणनीतिक महत्व और सामाजिक प्रतिबिंब
67-वर्षीय राधाकृष्णन दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु और ओबीसी (Gounder समुदाय) से आते हैं—इससे भाजपा का सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व मजबूत होता है । विश्लेषकों का मानना है कि यह चयन भाजपा की पिछली गलती—जगदीप धनखड़ जैसे उम्मीदवार—को दोहराने से बचने की रणनीति का हिस्सा है और विचारधारा, जातीय, क्षेत्रीय संतुलन को एक साथ साधने का प्रयास है ।
एनडीए तथा विपक्ष की प्रतिक्रिया
एनडीए के अन्य सहयोगी—जैसे तेलुगू देशम पार्टी, लोजपा (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर)—ने राधाकृष्णन के समर्थन में तुरंत प्रतिक्रिया दी और “पूर्ण समर्थन” व्यक्त किया । इससे एनडीए की विजय की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।
राधाकृष्णन का अपना बयान
उम्मीदवारी घोषित होने के प्रत्युत्तर में, राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नड्डा एवं अन्य शीर्ष नेताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह उनके लिए एक अवर्णनीय सम्मान है। उन्होंने वचन दिया कि वे “अपने अंतिम श्वास तक राष्ट्र सेवा में समर्पित रहेंगे” ।
निर्वाचन की प्रक्रिया और आगे का परिदृश्य
वर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पिछले माह स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दिया था, जिसके बाद यह रिक्त पद सार्वजनिक हुआ । एनडीए ने उम्मीद जताई है कि विपक्ष के साथ संवाद करके राधाकृष्णन की नामांकन को “बिनविरोध” से चुनावित कराया जा सकता है . अगर देखा जाए तो एक प्रकार से सी. पी. राधाकृष्णन का नाम चुनना भाजपा-नेता, आरएसएस-पृष्ठभूमि, ओबीसी प्रतिनिधित्व, दक्षिण भारत का अनुभव इन सभी को ध्यान में रखते हुए संतुलित और रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। उनकी राजनीतिक यात्रा, संस्थागत अनुभव और सामाजिक पहचान उन्हें इस संवैधानिक पद के लिए एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है। एनडीए के सहयोगियों से प्राप्त व्यापक समर्थन और विपक्ष के साथ बातचीत की संभावनाएं मिलाकर, उनकी भूमिका उपराष्ट्रपति चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है।

