रिपोर्ट :कोमल रमोला
दिल्ली : राहुल गांधी ने 17 अगस्त से जो बिहार के सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की आज उसका तीसरा दिन है। यह यात्रा 16 दिनों में लगभग 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 20 से 23 जिलों से गुजरेगी, और 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक विशाल रैली के साथ समाप्त होगी । यात्रा का प्रमुख उद्देश्य ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के लोकतांत्रिक सिद्धांत को सशक्त करना और चुनाव आयोग द्वारा किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत वोटर सूची में कथित भेदभाव और मताधिकार संबंधी हेरफेर को उजागर करना है । रणनीतिक राजनीतिक महत्त्व के हिसाब से देखें तो यह यात्रा न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की मुहिम है, बल्कि चुनावी रणनीति की दिशा में एक निर्णायक पहल भी है। इसमें कांग्रेस ने INDIA ब्लॉक के अन्य साझीदार, जैसे RJD, CPI, CPI(M) आदि की भागीदारी दर्ज कराई है—यह विपक्षी एकता का स्पष्ट संदेश है ।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि SIR के माध्यम से लगभग 65 लाख मतदाताओं—विशेषकर दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों के—को मतदाता सूची से बाहर किया गया, जो लोकतंत्र की बैसाखी को कमजोर करने जैसा है ।
उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा सवाल उठाए जाने पर “SIR को वोट चोरी का नया माध्यम” बताया और आयोग को जवाबदेह ठहराने की चुनौती दी ।
NDA के नेताओं ने यात्रा को “राजनीतिक ड्रामा” करार देते हुए इसे भ्रम फैलाने वाला अभियान बताया है। उन्होंने इस यात्रा को व्यक्तिगत लाभ और चुनावी प्रचार से जोड़ा है ।
यात्रा की शुरुआत पर भारी जनसमूह ने यात्रा का जो स्वागत किया है यह दर्शाता है कि वोटर अधिकार की बात साहित्यिक नहीं, बल्कि वास्तविक जनभावना से जुड़ी हुई है । राहुल गांधी ने औरंगाबाद में उन नागरिकों से भी मुलाकात की जिनका नाम ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था—यह सीधे जनता की परेशानी को आवाज़ देने का प्रयास है ।
यह यात्रा विधानसभा चुनाव की सीधी तैयारी है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं में जागरूकता फैला कर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना है। इसके जरिए कांग्रेस और INDIA ब्लॉक यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे चुनाव आयोग के असहयोगी रवैये और कथित “वोट चोरी” के खिलाफ खड़े हैं।
NDA की प्रतिक्रिया में यात्रा को नकारना, इसे चुनावी आवश्यकता बताकर बदनामी की कोशिश और विपक्ष पर जनता को भ्रमित करने का आरोप शामिल है ।
राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ मात्र एक प्रचार अभियान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आंदोलन है जो बिहार के चुनावी परिदृश्य को सत्ता-विरोधी केंद्रबिंदु से जोड़ सकता है। यह “वोटर अधिकार” की रक्षा का प्रदर्शन है, साथ ही चुनाव आयोग और सत्ता दल की नीतियों पर विपक्ष की चुनौती भी। राजनीतिक गति, जनता की भागीदारी, और विपक्षी एकता इसे चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है।
दूसरी और देखें तो राहुल गांधी ने जिस प्रकार अपने आप को एक यात्रा के अभियान के तहत लोगों से मिलने का उनकी समस्या जानने का उनको यह जताने की मैं आपकी दुख दर्द को समझता हूं यह जो यात्रा का अभियान किया है निश्चित रूप से बिहार के चुनाव में यह कांग्रेस के लिए एक मजबूत स्थिति बनाकर उबरेगी हां अब देखना यह की चुनाव आयोग ने जिस प्रकार राहुल को घेरा है और उनसे 7 दिनों के अंदर जवाब मांगा है और एफिडेविट देने को कहा है और यह कहा कि नहीं तो देस से माफी मांगे तो यह चुनाव आयोग और राहुल गांधी के बीच एक सीधा संवाद हो गया है जिससे एक नया रूप देने की कोशिश भाजपा कर रही है कि राहुल गांधी का वोट की राजनीति यात्रा का जो एक महज चुनावी स्टंट है, वही देखना अब यह होगा कि जो 60 लाख कट गए मतदाताओं की लिस्ट जारी करी है उसमें से कितने सही और कितने गलत है देखना अब इस बात पर है कि चुनाव आयोग और राहुल गांधी के इस मैं आरोप प्रत्यारोप समीकरण से बिहार की राजनीति में क्या फर्क पड़ेगा और क्या चुनाव पर असर पड़ेगा यह देखने वाली बात होगी फिलहाल राहुल गांधी ने जो वोट यात्रा शुरू की है निश्चित रूप से उन्हें सहयोग मिल रहा है और हर जगह से लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं यह एक निश्चित रूप से कांग्रेस के लिए मजबूती दर्शाती है

