* डीसी पंचकूला मोनिका गुप्ता ने कहा – हर नागरिक तक पहुँचे सरकार की योजनाओं का लाभ, तभी होगा सही अर्थों में विकास
रिपोर्ट : प्रीति कंबोज
पंचकूला/बरवाला, 26 अगस्त।
बरवाला में 25 अगस्त को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित वित्तीय समावेशन सैचुरेशन कार्यक्रम ग्रामीणों के लिए आशा और विश्वास का नया संदेश लेकर आया। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के निर्देश पर हुए इस विशेष आयोजन में पंचकूला की उपायुक्त (डीसी) मोनिका गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम का उद्देश्य था कि केंद्र सरकार की विभिन्न वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को गाँव के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जा सके, जिससे समाज का हर तबका आर्थिक रूप से सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सके।
ग्रामीणों के लिए योजनाओं का सुनहरा अवसर
डीसी मोनिका गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार ने हर वर्ग और हर नागरिक को ध्यान में रखते हुए योजनाएँ बनाई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से हर गरीब परिवार का बैंक खाता खोला गया है ताकि वह औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ सके। इसी तरह प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना आम लोगों को न्यूनतम प्रीमियम पर बीमा सुरक्षा देती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अटल पेंशन योजना से असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में पेंशन की गारंटी मिलती है। वहीं सुकन्या समृद्धि योजना विशेष रूप से बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए चलाई गई है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे इन योजनाओं से अवश्य जुड़ें ताकि उनका परिवार सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियाँ मजबूत नींव पर खड़ी हों।
“बैंक आपके दरवाजे तक पहुँचा है, अब कदम आपका होना चाहिए”
डीसी ने अपने संबोधन में कहा, “आज बैंक आपके दरवाजे तक पहुँच चुका है। अब यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप भी आगे बढ़कर इन योजनाओं से जुड़ें। सरकार और बैंक का उद्देश्य है कि कोई भी परिवार बिना बीमा, बिना पेंशन और बिना बचत के न रहे। री-केवाईसी कराना सभी के लिए अनिवार्य है ताकि समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके।”
उन्होंने यह भी कहा कि योजनाएँ केवल कागजों पर नहीं हैं बल्कि जमीनी स्तर पर हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचाने का प्रयास हो रहा है।
डीसी का जीवन अनुभव बना प्रेरणा
डीसी मोनिका गुप्ता ने ग्रामीणों के साथ अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता बैंक कर्मचारी रहे और उन्होंने बचपन से ही देखा कि किस प्रकार बचत और बीमा से परिवार सुरक्षित रह सकता है। मेहनत और ईमानदारी से काम करते हुए उन्होंने आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण की और आज प्रशासनिक सेवा में कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा, “मैं भी एक सामान्य परिवार से आई हूँ। सरकार की योजनाएँ और परिवार का सहयोग ही वह ताकत है जिसने मुझे यहाँ तक पहुँचाया। मैं चाहती हूँ कि हर परिवार अपने बच्चों के लिए ऐसे ही अवसर तैयार करे।”
सरपंच ने भी ग्रामीणों से की अपील
कार्यक्रम में बरवाला के सरपंच ओम सिंह राणा भी विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि यूनियन बैंक और अन्य सरकारी योजनाएँ गांव के हर घर तक पहुँच रही हैं। उन्होंने कहा कि यह गाँववासियों की जिम्मेदारी है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और केवाईसी के साथ-साथ बीमा व पेंशन योजनाओं से जुड़ें।
यूनियन बैंक की पहल
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने कार्यक्रम में विस्तार से बताया कि किस प्रकार बैंक ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए विशेष अभियान चला रहा है। उन्होंने मौके पर ही लाभार्थियों का पंजीकरण किया और ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी दी। बैंक अधिकारियों ने कहा कि वित्तीय समावेशन का उद्देश्य केवल खाते खुलवाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति इन योजनाओं से लाभ उठाए।
ग्रामीणों की उत्साही भागीदारी
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बरवाला और आसपास के ग्रामीण शामिल हुए। कई लोगों ने मौके पर ही बीमा और पेंशन योजनाओं के लिए आवेदन किया। महिलाओं ने विशेष रूप से सुकन्या समृद्धि योजना और अटल पेंशन योजना में रुचि दिखाई। बुजुर्गों ने कहा कि सरकार की योजनाओं से अब उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिला है।
सामाजिक और आर्थिक महत्व
यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की पहल था। इससे यह स्पष्ट संदेश गया कि सरकार और बैंक मिलकर ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वित्तीय समावेशन का असली उद्देश्य तभी पूरा होगा जब गाँव का हर व्यक्ति योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बने।
भविष्य की दिशा
कार्यक्रम के अंत में डीसी मोनिका गुप्ता ने कहा कि यह अभियान केवल एक दिन का नहीं बल्कि सतत चलने वाली प्रक्रिया है। प्रशासन और बैंक मिलकर गाँव-गाँव जाकर लोगों को योजनाओं से जोड़ेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में बरवाला जैसे गाँव वित्तीय समावेशन के आदर्श उदाहरण बनकर सामने आएंगे।
बरवाला में हुआ यह कार्यक्रम ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ता कदम साबित हुआ। यूनियन बैंक की पहल और डीसी पंचकूला मोनिका गुप्ता की प्रेरणादायक अपील ने ग्रामीणों को योजनाओं से जुड़ने के लिए उत्साहित किया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन, बैंक और समाज मिलकर कार्य करें, तो विकास की राह आसान हो जाती है और हर व्यक्ति को आर्थिक सुरक्षा की गारंटी मिलती है।

