कालका निवासी एडवोकेट प्रियांशी युवाओं के लिए एक प्रेरणा
चंडीगढ़, 28 अगस्त – पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के प्रांगण में आज का दिन कई युवा अधिवक्ताओं के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। परिसर में गहमागहमी थी, परिसर के बाहर खिले फूल और भीतर उमंग से भरे चेहरे एक ही संदेश दे रहे थे – कानून के क्षेत्र में नई ऊर्जा का आगमन हो रहा है। इन्हीं चेहरों के बीच एडवोकेट प्रियांशी भी अपने हाथ में प्रमाण-पत्र लिए खड़ी थीं। मुस्कुराहट से भरा उनका चेहरा इस बात का गवाह था कि वर्षों की मेहनत और पढ़ाई का फल आखिरकार मिल गया है।
सुबह से ही बार काउंसिल भवन में युवा वकीलों और उनके परिजनों का जमावड़ा था। रजिस्ट्रेशन समारोह की शुरुआत बार काउंसिल पदाधिकारियों के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें पेशे की गरिमा और जिम्मेदारियों पर जोर दिया गया। इसके बाद क्रमशः नए अधिवक्ताओं को प्रमाण-पत्र सौंपे गए। जैसे ही प्रियांशी को उनका पंजीकरण लाइसेंस मिला, वहां मौजूद सहपाठियों और परिवारजनों के बीच तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी।
प्रियांशी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा –
> “आज का दिन मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। यह केवल मेरे करियर की शुरुआत नहीं बल्कि समाज और न्याय की सेवा का संकल्प है। मैं पूरी कोशिश करूँगी कि न्याय की राह पर निष्पक्षता और ईमानदारी से चलूँ।”
उनकी यह बात वहाँ मौजूद हर शख्स के दिल को छू गई। उनके शब्दों में वह आत्मविश्वास झलक रहा था, जो किसी भी युवा अधिवक्ता के लिए जरूरी होता है।
बार काउंसिल ऑफ़ पंजाब एंड हरियाणा की भूमिका सिर्फ प्रमाण-पत्र देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्था अधिवक्ताओं को मार्गदर्शन, कल्याण और अनुशासन से भी जोड़ती है। नवनियुक्त अधिवक्ताओं को बताया गया कि वकालत केवल पेशा नहीं बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी भी है। समाज की उम्मीदें वकीलों से हमेशा ऊँची रहती हैं और उस पर खरा उतरना ही असली सफलता है।
समारोह का समापन एक सरल लेकिन प्रेरणादायक संदेश के साथ हुआ – “वकालत केवल केस जीतने की कला नहीं, बल्कि न्याय दिलाने का संकल्प है।” इस संदेश ने कार्यक्रम का स्वर और भी ऊँचा कर दिया।
आज का यह दिन न केवल एडवोकेट प्रियांशी के लिए बल्कि उनके परिवार और शुभचिंतकों के लिए भी गर्व का अवसर है। यह पंजीकरण लाइसेंस उनके जीवन में नए अवसरों के द्वार खोलेगा। समाज और न्यायपालिका को अब उनसे बहुत उम्मीदें हैं।
इस प्रकार, चंडीगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम केवल प्रमाण-पत्र वितरण का आयोजन नहीं था, बल्कि न्याय व्यवस्था में नई पीढ़ी की भागीदारी का प्रतीक था। प्रियांशी जैसी युवा अधिवक्ताओं का आगे बढ़ना इस बात का संकेत है कि न्याय की मशाल अब नई पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित है।

