पंचकूला ने खोया अपना हीरा – वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र भाटिया ने दुनिया को कहा अलविदा

 

भाटिया जी का स्वर्गवास आज सुबह पंचकूला सेक्टर-21 स्थित अल्केमिस्ट अस्पताल में हुआ। वे 14 अगस्त से वहीं उपचाराधीन थे। उनका अंतिम संस्कार कल दिनांक 31 अगस्त, रविवार को दोपहर एक बजे हाउसिंग बोर्ड श्मशान घाट, मनीमाजरा में किया जाएगा।

पंचकूला :पत्रकारिता जगत के लिए 30 अगस्त का दिन गहरा शोक लेकर आया, जब पंचकूला के वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब पंचकूला के चेयरमैन सुरेंद्र भाटिया इस संसार से विदा हो गए। पिछले पैंतीस वर्षों से निरंतर पत्रकारिता की साधना करने वाले भाटिया जी ने न केवल समाचार जगत को समृद्ध किया, बल्कि समाज के हर वर्ग की आवाज बनकर कार्य किया। उनका जाना केवल एक परिवार या संगठन की क्षति नहीं है, बल्कि पूरे पंचकूला और आसपास के क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।

भाटिया जी की पत्रकारिता यात्रा लंबी और प्रेरणादायक रही। उन्होंने छोटे स्तर से अपने करियर की शुरुआत की और धीरे-धीरे पंजाब केसरी समेत कई प्रमुख अखबारों से जुड़े। पंचकूला क्षेत्र में उनका नाम पत्रकारिता का पर्याय बन गया। खबरों में निष्पक्षता और निर्भीकता उनकी पहचान थी। उन्होंने कभी सत्य से समझौता नहीं किया और सदैव जनता की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने में अग्रणी रहे। यही कारण था कि वे पत्रकार समाज के साथ-साथ आम नागरिकों की धड़कन भी बने।

उनका स्वभाव अत्यंत मिलनसार था। साथी पत्रकारों का कहना है कि भाटिया जी से कभी किसी ने निराशा का सामना नहीं किया। वे हर किसी की मदद के लिए तत्पर रहते और कभी किसी का काम टालते नहीं थे। समाज में उनके व्यवहार ने उन्हें विशिष्ट स्थान दिलाया। यही कारण है कि पत्रकार बिरादरी उन्हें स्नेहपूर्वक “भाटिया जी” कहकर संबोधित करती थी।

प्रेस क्लब पंचकूला के चेयरमैन के रूप में उन्होंने पत्रकारों की आवाज को न केवल प्रशासन तक पहुंचाया, बल्कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी निरंतर प्रयास किए। उनका मानना था कि पत्रकार स्वतंत्र और सुरक्षित रहेंगे तभी समाज तक सच्चाई पहुंच पाएगी। उनके नेतृत्व में प्रेस क्लब पत्रकारों का सशक्त मंच बना।

सिर्फ पत्रकारिता ही नहीं, भाटिया जी का सामाजिक योगदान भी महत्वपूर्ण था। वे प्रशासन और जनता के बीच सेतु का कार्य करते थे। जब भी आम लोग अपनी समस्याओं को सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने में असमर्थ रहते, तब भाटिया जी उनकी आवाज बनते। शहर की सफाई, यातायात व्यवस्था, पानी-बिजली की समस्या और विकास जैसे मुद्दों पर उन्होंने हमेशा बेबाकी से लिखा और आवाज उठाई।

आज जब पत्रकारिता में व्यावसायिक दबाव और संवेदनहीनता बढ़ रही है, तब सुरेंद्र भाटिया जैसे पत्रकार आदर्श के रूप में सामने आते हैं। उन्होंने साबित किया कि पत्रकारिता केवल खबर लिखने का नाम नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का साधन है। उनकी ईमानदारी, निष्ठा और संघर्षशीलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

भाटिया जी का स्वर्गवास आज सुबह पंचकूला सेक्टर-21 स्थित अल्केमिस्ट अस्पताल में हुआ। वे 14 अगस्त से वहीं उपचाराधीन थे। उनका अंतिम संस्कार कल दिनांक 31 अगस्त, रविवार को दोपहर एक बजे हाउसिंग बोर्ड श्मशान घाट, मनीमाजरा में किया जाएगा। यह अंतिम यात्रा केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं होगी, बल्कि एक ऐसी शख्सियत को अलविदा कहने का अवसर होगी जिसने समाज और पत्रकारिता को अपनी पूरी निष्ठा के साथ जिया।

आज पंचकूला में शोक की गहरी लहर है। साथी पत्रकार उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कह रहे हैं कि भाटिया जी हमारे लिए केवल वरिष्ठ नहीं, बल्कि मार्गदर्शक थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। वास्तव में, उनका व्यक्तित्व ही ऐसा था कि हर कोई उन्हें अपना समझता था।

संपादकीय दृष्टि से देखें तो यह क्षति केवल पत्रकार जगत तक सीमित नहीं है। समाज ने एक ऐसी संवेदनशील और निडर आवाज खो दी है, जो हमेशा सच के साथ खड़ी रही। पंचकूला ने एक अनमोल हीरा खो दिया है और उसकी भरपाई संभव नहीं है। हमें उनकी पत्रकारिता और जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी सच्चाई और निष्पक्षता के साथ इस पेशे को आगे बढ़ा सकें।

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