मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड की बैठक

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड की बैठक

श्रद्धा, सेवा और सुविधा का अद्भुत संगम

चंडीगढ़ :हरियाणा की पावन भूमि पर स्थित श्री माता मनसा देवी मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। नवरात्रों के अवसर पर जब लाखों भक्त यहां दर्शन के लिए उमड़ते हैं, तो यह स्थल केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का भी केंद्र बन जाता है। इसी पावन अवसर को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड की बैठक ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सरकार केवल व्यवस्थाएँ नहीं करती, बल्कि आस्था को सम्मान और सेवा को धर्म मानकर आगे बढ़ रही है।

✨ माता मनसा देवी — श्रद्धा का प्रतीक

माता मनसा देवी का मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। यह स्थान शक्ति उपासना का केंद्र है, जहाँ भक्त अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण कराने आते हैं। “मनसा” शब्द ही इस बात का प्रतीक है कि माँ श्रद्धालुओं की मन की इच्छा पूरी करती हैं। नवरात्रों में यहाँ विशेष श्रद्धालु आते हैं, क्योंकि यह पर्व स्वयं शक्ति, साधना और आत्मबल का प्रतीक है।

ऐसे पवित्र पर्व से पहले सरकार द्वारा मंदिर परिसर में सौंदर्यीकरण, स्वच्छता और भंडारा हॉल जैसी सुविधाओं की घोषणा केवल व्यवस्थागत कदम नहीं, बल्कि आस्था को संबल देने का कार्य है।

 

🏛️ सरकार की तैयारियाँ — सेवा और सुविधा का संगम

बैठक में मुख्यमंत्री ने जिन योजनाओं की घोषणा की, वे बताती हैं कि सरकार का उद्देश्य केवल भीड़ प्रबंधन नहीं बल्कि सेवा के भाव को मजबूत करना है।

🔹 तीन विशाल वातानुकूलित भण्डारा हॉल

तीन बड़े भण्डारा हॉल बनाए जाएंगे, जहाँ एक हॉल में एक साथ लगभग 1500 श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे। यह सुविधा भक्तों के लिए एक नई राहत होगी। प्रसाद ग्रहण करना केवल भोजन करना नहीं होता, बल्कि इसे आध्यात्मिक प्रसाद और सामूहिकता की शक्ति माना जाता है। सरकार इस व्यवस्था से भक्ति और सुविधा दोनों को जोड़ रही है।

🔹 अत्याधुनिक रसोईघर

श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ और पौष्टिक प्रसाद सुनिश्चित करने हेतु अत्याधुनिक रसोई बनाई जाएगी। इस परंपरा में “भोजन” सेवा का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में अन्नदान को सर्वोच्च दान कहा गया है, और यह पहल उसी भावना को आगे बढ़ाती है।

🔹 स्वच्छता अभियान

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कहा कि मंदिर परिसर और धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता हो। जब लाखों भक्त आते हैं, तो केवल प्रबंधन ही नहीं बल्कि पवित्रता का अनुभव भी आवश्यक है। इसलिए 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलने वाले सेवा पखवाड़े के दौरान मंदिरों में व्यापक सफाई अभियान चलेगा। इससे श्रद्धालुओं को यह संदेश भी मिलेगा कि स्वच्छता ही सेवा है।

🔹 धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

पंचकूला के धार्मिक स्थलों को जोड़ते हुए विशेष बस सेवा शुरू करने की योजना बन रही है। इसमें माता मनसा देवी मंदिर के साथ काली माता मंदिर, चंडी माता मंदिर, बड़ा त्रिलोकपुर, नाडा साहिब और मोरनी जैसे स्थल जोड़े जाएंगे। यह न केवल तीर्थयात्रियों के लिए सुविधा है, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी एक नई दिशा देगा।

🔹 मंदिर परिसर का संरक्षण और सौंदर्यीकरण

भित्ति चित्रों, हनुमान वाटिका और अनुपयोगी संरचनाओं को हटाकर मंदिर परिसर को एक नया स्वरूप दिया जाएगा। इससे न केवल सौंदर्य बढ़ेगा बल्कि भक्तों को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव भी होगा।

🌼 धार्मिकता और प्रशासन का संगम

भारतीय संस्कृति में धर्म और प्रशासन को अलग नहीं माना गया। जब-जब शासक धर्म के कार्यों में सहयोगी बने, समाज में समृद्धि और शांति बढ़ी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का यह कहना कि “श्रद्धालुओं की सेवा हमारा पवित्र दायित्व है” दर्शाता है कि सरकार इसे केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि धार्मिक कर्तव्य मानकर काम कर रही है।

 

🙏 आस्था से जुड़ी सामाजिक शक्ति

मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता का प्रतीक भी है। यहाँ आने वाले लोग केवल दर्शन नहीं करते, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ते, सेवा करते और संस्कार सीखते हैं।

सरकार द्वारा की गई यह पहल लोगों में यह संदेश देगी कि भक्ति के साथ स्वच्छता, सेवा और संस्कृति का सम्मान भी आवश्यक है।

🌺 निष्कर्ष — भक्ति और विकास का मेल

श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णय केवल नवरात्रों की तैयारी नहीं हैं। यह एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण है, जिसमें धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सुविधाओं का संतुलन है।

भक्ति तब और प्रभावी होती है जब उसका आधार स्वच्छ वातावरण, सुविधाजनक व्यवस्थाएँ और सांस्कृतिक चेतना हो। हरियाणा सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि आने वाले नवरात्रों में श्रद्धालुओं को केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि भक्ति और सुविधा का अद्भुत अनुभव मिले।

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