श्री सेम नागराज गंगू रमोला समाज सेवा समिति का पहला बड़ा कार्यक्रम होगा 25-26 नवंबर को सेम मुखेम मेले  मे

मेले में प्रसाद वितरण कार्यक्रम को लेकर रमोला परिवार में बड़ा उत्साह

न्यू टिहरी : टिहरी गढ़वाल की पावन धरती सेम मुखेम एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनने जा रही है। आगामी 25 और 26 नवंबर को यहाँ होने वाले पारंपरिक मेले की तैयारियाँ जोरों पर हैं, और इस बार का आयोजन विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह श्री सेम नागराज गंगू रमोला समाज सेवा समिति का पहला बड़ा कार्यक्रम होगा। रविवार को सेम मुखेम मड़भागी सोड में समिति की बैठक में जिस प्रकार का उत्साह देखने को मिला, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले दिनों में सेम मुखेम मेला एक ऐतिहासिक भव्यता के साथ मनाया जाएगा।

बैठक में रमोला वंश के सैकड़ों सदस्य विभिन्न गाँवों और प्रदेशों से पहुँचकर एकता और परंपरा का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे। चारों दिशाओं से आए परिवारों के बीच ऐसा जोश था मानो पीढ़ियों का संगम एक ही छत के नीचे उतर आया हो। हर सदस्य के चेहरे पर अपने कुलदेवता श्री सेम नागराज भगवान के प्रति अटूट आस्था और अपने पूर्वज गढ़पति गंगू रमोला की स्मृति के प्रति गहरा सम्मान झलक रहा था। यह बैठक न केवल तैयारियों का मंच बनी बल्कि एकता और आत्मीयता का जीवंत प्रमाण भी।

समिति के अध्यक्ष प्रकाश चन्द रमोला ने बैठक में उपस्थित सभी भाई-बंधुओं का स्वागत करते हुए कहा कि आज जिस प्रकार भारी संख्या में रमोला परिवार के सदस्य यहाँ पहुंचे हैं, वह इस बात का संकेत है कि हमारे भीतर आज भी अपने धर्म, अपनी परंपरा और अपने समाज के प्रति प्रेम जीवित है। उन्होंने कहा कि यह पहली बैठक केवल शुरुआत है, आने वाले वर्षों में हम इस एकता को और मजबूत करेंगे ताकि सेम मुखेम मेला न केवल धार्मिक आयोजन रहे बल्कि समाजिक उत्थान और सेवा का उदाहरण बने। उन्होंने यह भी कहा कि कई भाई-बंधु जो बैठक में नहीं आ पाए, उन्होंने भी ग्रुप और संदेशों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो इस परिवार की आत्मीयता का परिचायक है।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मेले के दिनों में समिति की ओर से प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जाएगी ताकि हर श्रद्धालु को सेम नागराज भगवान का प्रसाद प्राप्त हो सके। इसके साथ ही एक निःशुल्क मेडिकल कैंप भी लगाया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्य जांच और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा दी जाएगी ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु किसी असुविधा का सामना न करें। समिति ने यह भी तय किया कि मेले में रमोला परिवार के लिए विशेष शिविर बनाए जाएंगे, जहाँ परिवारजन एक साथ रह सकेंगे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी परंपराओं को जीवित रखेंगे।

अध्यक्ष प्रकाश चन्द रमोला ने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल आयोजन नहीं बल्कि समाज में यह संदेश देना है कि जब परिवार और परंपरा एक साथ खड़े होते हैं, तो धर्म और सेवा दोनों जीवंत रहते हैं। यह मेला हमारी जड़ों, हमारी संस्कृति और हमारे पूर्वजों की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी से अपील की कि देश-विदेश में जहाँ कहीं भी रमोला वंश के सदस्य रहते हैं, वे इस दो दिवसीय मेले में अवश्य शामिल हों, ताकि हमारी एकता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सके।

बैठक में उपस्थित वरिष्ठ सदस्यों ने भी अपने विचार प्रकट किए। सभी ने एकमत से कहा कि इस बार का सेम मुखेम मेला पहले से अधिक सुव्यवस्थित, धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भव्य होगा। समिति के सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर परिवारजनों और श्रद्धालुओं को मेले में आने का निमंत्रण देंगे। सोशल मीडिया के माध्यम से भी यह संदेश फैलाया जाएगा ताकि कोई भी रमोला वंशज इस पवित्र अवसर से वंचित न रह जाए।

सेम मुखेम मेला केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह उस गौरवशाली इतिहास का उत्सव है जिसमें गढ़पति गंगू रमोला की वीरता, धर्मनिष्ठा और समाज सेवा की झलक मिलती है। इस भूमि पर नागराज भगवान की कृपा सदा बनी रही है और हर बार इस मेले में हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से आकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पहाड़ों की गोद में बसे सेम मुखेम का प्राकृतिक सौंदर्य और भक्ति की धारा इस स्थान को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

मेले के अवसर पर ढोल-दमाऊ की थाप, देव डोली की शोभायात्रा और पारंपरिक लोकगीतों की गूंज से वातावरण श्रद्धा और उल्लास से भर जाएगा। बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी के चेहरे पर अपने कुलदेवता के दर्शन की ललक होगी। समिति का यह प्रयास रहेगा कि हर श्रद्धालु को सुविधा, सुरक्षा और स्नेह के साथ स्वागत मिले।

बैठक के अंत में समिति के सदस्यों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे आने वाले दिनों में पूरी लगन से इस आयोजन को सफल बनाने के लिए कार्य करेंगे। यह केवल एक आयोजन नहीं बल्कि परिवार, परंपरा और सेवा का एक संयुक्त प्रयास है। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह मेला हमारी पहचान है, हमारी जड़ों का प्रतीक है और हमें इसे गर्व और समर्पण के साथ आगे बढ़ाना है।

अध्यक्ष प्रकाश चन्द रमोला ने अंत में कहा कि जो भी व्यक्ति इस मेले में भाग लेगा, वह केवल एक धार्मिक कर्म नहीं बल्कि अपने पूर्वजों की परंपरा को सम्मान देने का पुण्य अर्जित करेगा। उन्होंने सभी परिवारजनों से आग्रह किया कि अपने बच्चों को भी इस परंपरा से जोड़ें ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी जान सकें कि हमारी संस्कृति, हमारी एकता और हमारा इतिहास कितना समृद्ध है।

सेम मुखेम मेला इस वर्ष फिर एक बार अपने पूरे वैभव के साथ आयोजित होने जा रहा है। सेम नागराज भगवान की कृपा से यह आयोजन केवल आस्था का नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और समाजिक एकता का प्रतीक बनेगा। जब देवडोलियाँ नाचेंगी, जब ढोल-दमाऊ गूंजेंगे, और जब हजारों रमोला वंशज अपने कुलदेवता के समक्ष नतमस्तक होंगे, तब यह केवल एक उत्सव नहीं बल्कि रमोला वंश की आत्मा का पुनर्मिलन होगा।

जय सेम नागराज भगवान की।
जय गढ़पति गंगू रमोला की।

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