शिक्षा बजट 2026: कौशल, रोजगार और समावेशन की ओर एक सकारात्मक कदम
स्पोर्ट : कोमल रमोला
पंचकूला:केंद्रीय शिक्षा बजट 2026 को लेकर शिक्षा जगत से सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। सतलुज ग्रुप ऑफ स्कूल्स के प्रबंध निदेशक रीकृत सेराय ने इस बजट को शिक्षा प्रणाली को भविष्य के अनुरूप ढालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और संतुलित पहल बताया है।
रीकृत सेराय के अनुसार, इस वर्ष का शिक्षा बजट केवल शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा को कौशल, रोजगार और समावेशन से जोड़ने की स्पष्ट दिशा दिखाता है। उन्होंने कहा कि ₹1.39 लाख करोड़ के कुल शिक्षा बजट में कई ऐसी योजनाएँ शामिल हैं, जो आने वाले वर्षों में देश की शैक्षिक संरचना को मजबूत कर सकती हैं।
उन्होंने विशेष रूप से हर जिले में बालिकाओं के लिए छात्रावास, 15,000 स्कूलों में एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) क्रिएटर लैब्स, तथा उद्योग से जुड़े विश्वविद्यालय टाउनशिप जैसी पहलों की सराहना की। उनके अनुसार, ये योजनाएँ छात्रों को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल और रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करने में सहायक होंगी।
हालाँकि, रीकृत सेराय ने यह भी कहा कि देश में शिक्षा पर कुल सार्वजनिक व्यय अभी भी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 4 प्रतिशत ही है, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में इसे 6 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में अभी और ठोस प्रयासों की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा क्षेत्र में मौजूदा स्कूलों के आधारभूत ढांचे के उन्नयन, शिक्षकों की क्षमता निर्माण, शोध और नवाचार के मजबूत इकोसिस्टम, तथा पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के लिए एक स्पष्ट ढांचे की अपेक्षा की जा रही है, ताकि गुणवत्ता को तेजी से और व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके।
रीकृत सेराय ने विश्वास जताया कि यदि सरकार और निजी शिक्षा संस्थान मिलकर सतत क्रियान्वयन और सहयोगात्मक भागीदारी के साथ इन योजनाओं को आगे बढ़ाते हैं, तो यह बजट देश की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।

