रिपोर्ट : कोमल रमोला
देहरादून, 22 फरवरी। देहरादून के नथुवावाला मे आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन आस्था, संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना का विराट संगम बनकर उभरा। हिंदुत्व, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित इस ऐतिहासिक सम्मेलन में हजारों श्रद्धालुओं, मातृशक्ति, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। सम्मेलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्र निर्माण में जनमानस की भूमिका, अखंडता, स्वदेशी और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे भव्य मंगल कलश यात्रा से हुई, जिसमें क्षेत्र की 51 कीर्तन मंडलियों और मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह यात्रा भद्रकाली मंदिर, गुलरघाटी रोड से प्रारंभ होकर राम गार्डन तक पहुँची। यात्रा के दौरान भजन-कीर्तन, जयघोष और धार्मिक नारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया, जिससे वातावरण में उत्सव का रंग घुल गया।
इसके पश्चात अतिथियों के आगमन के साथ मुख्य कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण के साथ राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि की कामना की गई। मंगल गीत की प्रस्तुति श्रीमती बीना नेगी एवं उनके साथियों ने दी, जिसने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की। अतिथि परिचय एवं स्वागत सत्र में आयोजकों ने सभी मंचासीन अतिथियों का पारंपरिक ढंग से अभिनंदन किया।
इसके बाद भारतीय योग संस्थान के नथुवावाला केंद्र द्वारा योग प्रस्तुति दी गई। योगियों ने विभिन्न आसनों और प्राणायाम के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया तथा बताया कि योग से शरीर और मन दोनों सुदृढ़ होते हैं। दर्शकों ने इस प्रस्तुति को खूब सराहा और कई लोगों ने नियमित योग करने का संकल्प लिया।
मुख्य वक्ता डॉ. सुशील कोटनाला ने अपने धर्म संदेश में हिंदुत्व की रक्षा, सनातन संस्कृति के संरक्षण, पर्यावरण बचाने, स्वदेशी अपनाने तथा नागरिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित और जागरूक होगा तो राष्ट्र स्वतः सशक्त बनेगा। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति पर गर्व करने और समाज सेवा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि स्वामी सत्य श्री गिरि जी महाराज ने सनातन धर्म, मठ-मंदिरों की सुरक्षा और नैतिक मूल्यों के प्रसार पर बल दिया। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और एकता की भावना ही सच्चा धर्म है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थवाल ने लोक संस्कृति, लोक कला और पारंपरिक धरोहर के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े बिना समाज का विकास संभव नहीं।
सम्मेलन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला भी आकर्षण का केंद्र रही। पं. दीपनाथ मेमोरियल मॉडर्न स्कूल के विद्यार्थियों ने गुजराती डांडिया नृत्य प्रस्तुत कर भारत की विविधता में एकता का संदेश दिया। श्री राम भजन, सोहिता एवं एकता राणा की नृत्य नाटिका तथा बच्चों की अन्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, नथुवावाला द्वारा नंदा देवी राजजात डोली नृत्य तथा गढ़वाली गीत प्रस्तुति ने स्थानीय संस्कृति की सुंदर झलक पेश की।
इस अवसर पर नथुवावाला क्षेत्र की 51 कीर्तन मंडलियों ने सामाजिक समरसता और मातृशक्ति जागरूकता का संदेश दिया। प्रत्येक मंडली को प्रोत्साहन स्वरूप भारत माता के चित्र भेंट किए गए। ज्वाल्पा कीर्तन मंडली, माँ सुरकंडा कीर्तन मंडली और नागराज कीर्तन मंडली को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। साथ ही समाज सेवा में समर्पित कुछ गुमनाम नायकों को भी सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में डोईवाला के विधायक बृज भूषण गैरोला तथा नथुवावाला की पार्षद श्रीमती स्वाति डोभाल ने भी भाग लेकर लोगों का उत्साहवर्धन किया और अपने विचार साझा किए। उन्होंने ऐसे आयोजनों को समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाला बताया।
समापन सत्र में कार्यक्रम संयोजक श्री परमानंद सकलानी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में दिगम्बर सिंह नेगी, अनूप सेमवाल, संजय रतूड़ी, आशीष भट्ट, अजित रावत, मंजीत रावत, राकेश चंद रमोला, गौरव चंद रमोला, अरविंद नेगी, अनूप डोभाल, महावीर थपलियाल, यशपाल सिंह, राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह नेगी, राम कृष्ण भट्ट सहित अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अंत में “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” के वाचन के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। इसके पश्चात दोपहर को महाभंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, भक्ति और उत्साह का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
यह विराट हिंदू सम्मेलन नथुवावाला क्षेत्र में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रभावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुआ। कार्यक्रम के सहसंयोजक उमेद चंद रमोला ने सभी का कार्यक्रम में उत्साह से भाग लेने पर और सहयोग देने पर सभी का धन्यवाद किया उन्होंने कहा ऐसे कार्यक्रम में भाग लेने से हमें अपनी संस्कृति और अपने विचारों का आदान-प्रदान करने और हिंदुत्व को मजबूत करने का एक मंच मिलता है

