*नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक और युगांतकारी कदम: स्त्री सामर्थ्य फाउंडेशन*

 

सुकेश कुमार/रमोला न्यूज़
चंडीगढ़, 12 अप्रैल :
स्त्री सामर्थ्य फाउंडेशन द्वारा आज प्रेस क्लब, सेक्टर-27, चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर फाउंडेशन की सदस्य नीलू तिवारी (रिटायर्ड प्रोफेसर, हिंदी विभाग), मनविंदर बाजवा (पूर्व वाइस प्रिंसिपल), रंजू ऐरी (रिटायर्ड सीनियर संपादक) एवं डॉ. रोजी धवन अरोड़ा (MDS) ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया।
प्रेस वार्ता के दौरान वक्ताओं ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक, दूरदर्शी और परिवर्तनकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक मील का पत्थर है, जो महिलाओं को केवल सहभागी ही नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली सशक्त भूमिका प्रदान करता है।
विशेष रूप से उन्होंने उल्लेख किया कि इस अधिनियम के तहत लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की सीटों में भी महिलाओं के लिए आरक्षण शामिल है। यह प्रावधान महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को संस्थागत रूप से मजबूत करेगा और उन्हें नीति निर्माण के केंद्र में स्थापित करेगा।
वक्ताओं ने कहा कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो समाज के हर वर्ग को लाभ होता है। वैश्विक अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से अर्थव्यवस्था को गति मिलती है, सामाजिक संतुलन मजबूत होता है और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं। उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, मुद्रा योजना, जन धन योजना जैसी अनेक पहलों ने महिलाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार किया है। आज बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और शिक्षा व तकनीकी क्षेत्रों में भी उनकी भागीदारी निरंतर बढ़ रही है।
प्रेस वार्ता में यह भी रेखांकित किया गया कि 26 साल पहले जब यह बिल लाया गया था, तब इसका विरोध करने वालों में मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव और मायावती शामिल थे। वक्ताओं ने कहा कि अब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह लंबे समय से लंबित मांग पूरी हो रही है और देश के लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाएगी।
वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने महिला सशक्तिकरण को नीति के केंद्र में रखा है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “सुकन्या समृद्धि योजना” और “प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना” जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाने का कार्य किया है।
अंत में स्त्री समर्थ फाउंडेशन ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक संवैधानिक संशोधन नहीं, बल्कि भारत के उज्ज्वल, समावेशी और सशक्त भविष्य की आधारशिला है। यह अधिनियम महिलाओं को “नीति की लाभार्थी” से “नीति की निर्माता” बनाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है, जो विकसित भारत के निर्माण को नई गति प्रदान करेगा।

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