सोनिका भाटिया /रमोला न्यूज़
चंडीगढ़: हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा द्वारा अपने गीत में आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर हरियाणा राज्य महिला आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी और दोषी को इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “नाम मासूम है, लेकिन काम बिल्कुल भी मासूम नहीं। ऐसे व्यवहार को किसी भी हालत में माफ नहीं किया जाएगा।”
नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए चंडीगढ़ पहुंचीं भाटिया ने बातचीत के दौरान यह भी साफ किया कि महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए और ऐसे कंटेंट को सार्वजनिक करने से बचना चाहिए।
गायक बादशाह के नए गाने को लेकर पूछे गए सवाल पर भाटिया ने कहा कि उन्होंने अभी तक गाना नहीं सुना है, लेकिन उम्मीद जताई कि वह भविष्य में अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बादशाह पहले ही माफी मांग चुके हैं और महिलाओं के सम्मान को बढ़ावा देने के साथ-साथ 50 जरूरतमंद लड़कियों की शिक्षा में सहयोग करने का वादा कर चुके हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र करते हुए भाटिया ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जिससे उनकी भागीदारी और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल कानून बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी ठोस प्रयास जरूरी हैं। खासतौर पर लड़कियों की शिक्षा, स्कूलों में उनकी निरंतरता और उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना बेहद अहम है।
भाटिया ने जोर देकर कहा कि शिक्षा ही असली सशक्तिकरण की कुंजी है। जब लड़कियां शिक्षित और आत्मनिर्भर बनती हैं, तो वे न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाती हैं, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने में योगदान देती हैं।
सरकार की योजनाओं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनसे महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है, लेकिन अभी भी शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसरों पर लगातार काम करने की जरूरत है।
अंत में उन्होंने कहा कि मजबूत कानून, जिम्मेदार अभिव्यक्ति और लड़कियों की शिक्षा पर निरंतर ध्यान—इन तीनों के समन्वय से ही समाज में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है और एक अधिक सुरक्षित व सम्मानजनक वातावरण बनाया जा सकता है।
