सुमेश कुमार
चंडीगढ़, 28 मार्च : PGIMER के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग ने आज प्रतिष्ठित दो दिवसीय 3rd Rastogi–Dash Clinical Case Conference का उद्घाटन किया, जिसका थीम है—गैस्ट्रो-एंटेरो-पैंक्रियाटिक न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर्स (GEP-NETs).इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख विशेषज्ञों, विशिष्ट पूर्व छात्र-छात्राओं तथा संकाय सदस्यों ने भाग लिया, जो जटिल क्लिनिकल मामलों और एंडोक्राइनोलॉजी के उभरते आयामों पर चर्चा करेंगे।
सम्मेलन का उद्घाटन PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने प्रेरणादायक संबोधन के साथ किया। उन्होंने पुराने समय के नैदानिक अनुशासन को याद करते हुए कहा कि एक समय हर मरीज को एक संपूर्ण अकादमिक अभ्यास की तरह लिया जाता था, जिससे गहन नैदानिक समझ और आलोचनात्मक सोच विकसित होती थी। आधुनिक युग में उन्नत जांचों के महत्व को स्वीकारते हुए उन्होंने कहा कि “एंडोक्राइनोलॉजी की आत्मा आज भी रोकथाम ही है,” विशेषकर मधुमेह जैसे तेजी से बढ़ते गैर-संचारी रोगों के संदर्भ में।
व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए प्रो. लाल ने जीवनशैली में बदलाव की उपचारात्मक क्षमता पर प्रकाश डाला और चिकित्सकीय अभ्यास में निवारक स्वास्थ्य सेवा तथा शारीरिक फिटनेस को आधारभूत तत्व बताया।उन्होंने युवा एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स से आग्रह किया कि वे उदाहरण प्रस्तुत करें और संस्थान के संस्थापक दिग्गजों द्वारा स्थापित मूल्यों को आगे बढ़ाएँ।
प्रो. आर. जे. दाश और डॉ. गोपाल कृष्ण रस्तोगी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने उन्हें दूरदर्शी अग्रदूत और कर्मयोगी बताया, जिन्होंने PGIMER में एंडोक्राइनोलॉजी की नींव रखी । उन्होंने प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से उनकी रोगी-सेवा और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति अद्वितीय समर्पण को याद किया और कहा कि “उनकी निष्ठा और उत्कृष्टता की खोज का कोई मुकाबला नहीं था।”
प्रो. लाल ने एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की सराहना करते हुए कहा कि अत्यधिक जटिल रोगियों के भारी बोझ के बावजूद विभाग सेवा प्रदान करने में उत्कृष्ट है, और शिकायतों की अनुपस्थिति उनके समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने तेजी से बढ़ते एंडोक्राइन विकारों के मद्देनज़र संकाय और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए संस्थागत समर्थन जारी रखने का आश्वासन भी दिया।
कार्यक्रम के आरंभ में एंडोक्राइनोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. संजय भदाड़ा ने अतिथियों का स्वागत किया और सम्मेलन की अकादमिक रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि Rastogi–Dash Clinical Case Conference अब एक राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित अकादमिक मंच बन चुका है, जो PGIMER की समृद्ध नैदानिक परंपरा को आगे बढ़ाता है, जहां रोगी-केंद्रित सीखना सर्वोपरि है।
उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन पूर्णतः केस-आधारित मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो विश्लेषणात्मक सोच, खुली चर्चा और सहकर्मी-शिक्षण को बढ़ावा देता है, और जहाँ वरिष्ठतम चिकित्सक भी एक सीखने वाले के रूप में भाग लेते हैं।
प्रो. भदाड़ा ने कहा कि इस वर्ष का थीम—GEP-NETs—क्लिनिकल जटिलताओं और आधुनिक डायग्नोस्टिक चुनौतियों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे केंद्रित विमर्श साक्ष्यों, बहु-विषयक देखभाल और वास्तविक दुनिया के क्लिनिकल परिदृश्यों के बीच की दूरी कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने देशभर के प्रमुख संस्थानों की उत्साही भागीदारी तथा प्रतिष्ठित पूर्व छात्र-छात्राओं व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों—जिनमें Mayo Clinic की प्रो. सुमिता दाश और प्रो. पंकज शाह शामिल हैं—के बहुमूल्य योगदान को भी रेखांकित किया।
विभाग की बढ़ती अकादमिक और अनुसंधान क्षमता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष PGIMER को 200 करोड़ रुपये के एक्स्ट्राम्यूरल रिसर्च ग्रांट प्राप्त हुए, जिसमें से 50 करोड़ रुपये अकेले एंडोक्राइनोलॉजी विभाग द्वारा अर्जित किए गए—जो अत्याधुनिक अनुसंधान में उसकी अग्रणी भूमिका को दर्शाता है।
उत्कृष्टता के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ते एंडोक्राइन विकारों से निपटने के लिए सतत् सीखना, सहयोग और नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं—साथ ही संस्थापक दिग्गजों की विरासत को आगे बढ़ाना भी।
इस अवसर पर वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. आर. वी. जयकुमार और डॉ. एस. मूर्ति को एंडोक्राइनोलॉजी में उनके विशिष्ट योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किए गए।डॉ. गोपाल कृष्ण रस्तोगी और प्रो. आर. जे. दाश की जीवन-यात्रा एवं उनकी स्थायी विरासत पर आधारित एक विशेष प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक किया और उनके गहन प्रभाव को रेखांकित किया।
सम्मेलन में देश के प्रमुख संस्थानों—जैसे AIIMS जोधपुर, SGPGI लखनऊ, अमृता इंस्टीट्यूट कोच्चि और PGIMER चंडीगढ़—से प्रस्तुत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामलों पर आधारित व्यापक ई-पोस्टर सत्र भी आयोजित किया गया। प्रस्तुतियों में प्रसवोत्तर अवधि में MEN-1, दुर्लभ फीओक्रोमोसायटोमा म्यूटेशन, और जटिल एंडोक्राइन ट्यूमर्स में नवीन शल्य-प्रविधियों जैसे विविध विषय शामिल थे।
उद्घाटन दिवस में समृद्ध अकादमिक चर्चाएँ हुईं, जिनमें पैंक्रियाटिक न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर्स (NETs)—फंक्शनिंग, नॉन-फंक्शनिंग तथा सिंड्रोमिक NETs—में उपचार संबंधी प्रगति पर केंद्रित सत्र शामिल थे। चर्चाओं में लक्षित उपचारों, PRRT, और दीर्घकालीन सोमेटोस्टैटिन एनालॉग उपयोग की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
जटिल केस-आधारित चर्चाओं—जैसे इंसुलिनोमा पुनरावृत्ति, MEN-1 से संबद्ध ट्यूमर्स, एक्टोपिक ACTH उत्पादन, और मेटास्टेटिक NETs—ने व्यक्तिगत, सुस्पष्ट देखभाल के महत्व को रेखांकित किया। सम्मेलन में GEP-NETs के प्रबंधन में बहु-विषयक दृष्टिकोण की अनिवार्य भूमिका को विशेष महत्व दिया गया, जिसमें एंडोक्राइनोलॉजी, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, रेडियोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन और सर्जिकल विशेषज्ञताओं का सहयोग शामिल है।
सम्मेलन का दूसरा दिन कल जारी रहेगा, जिसमें उच्च-स्तरीय अकादमिक सत्र और केस-आधारित चर्चाएँ आयोजित होंगी।
