रमोला न्यूज/जसपाल सिंह
उत्तरकाशी-जनपद मुख्यालय के हनुमान चौक स्थित सुमन सभागार में 104वें दिन भी गोपीनाथ रावत का पहाड़ जैसा हौसला हनुमान चौक में शासन-प्रशासन के लिए पर्वत बनता जा रहा है, शहर की स्वछता माँ गंगा की अविरलता के लिए जहाँ तीन महीनें से अधिक सुमन सभागार में बैठे गोपीनाथ की सुध शासन-प्रशासन नगरपालिका नहीं ले रहा है, वहीं राजनीति का शिकार हो रही शहर की जनता को स्वच्छता और गंगा की अविरलता के लिए जीवन समर्पित करनें वाले गोपीनाथ का 104वें दिन का ठंड, गर्मी, बरसात में तपा आंदोलन सिर्फ मजाक लग रहा है, यह सिर्फ इसलिए कि राजनीतिक दौड़ में लगे धावक खुद की दौड़ पर संशय करनें लग गए हैं, बता दें कि आसान नहीं होता 100 दिन से ऊपर एक जगह पर आंदोलनरत रहना, इसके लिए दृढ़ संकल्प और खुद पर अटूट विश्वास गोपीनाथ का दिखता है।
जनपद मुख्यालय में रह रहा नगरवासी, शासन, प्रशासन यह भूल रहा है कि गोपीनाथ रावत अपनें घर की स्वच्छता और अपनें क्षेत्र के गाड़ गदेरों की अविरलता के लिए आंदोलनरत नहीं है, बल्कि गोपीनाथ रावत प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत और स्वच्छ गंगा अभियान को भी छूँता आगे बढ़ रहा है, राजनीति की भेंट चढ़ाए जा रहे इस आंदोलन को बेशक कोई कितना भी फीका करनें की कोशिशें करते रहें, लेकिन शहर की स्वच्छता और गंगा की अविरलता के लिए कोई दूसरा गोपीनाथ शायद ही मिलेगा, अपना सब कुछ छोड़-छाड़ शहर की स्वच्छता, कूड़ा, गंगा की अविरलता और श्रद्धालुओं के स्वागत में खड़े कूड़े के अंबार के लिए जो इतनें लंबे समय से लड़ रहा है, अफसोस है कि शहरवासी खामोश बैठे उसे राजनीति समझ रहे हैं, वक्त पर व्यापारी, शहरवासी इसी तरह खामोश रहे तो जन-समस्याओं के लिए फिर कोई गोपीनाथ आगे नहीं आयेगा।
चारधाम यात्रा के लिए जहाँ देश विदेश के कोनों-कोनों से तीर्थ यात्री माँ यमुना गंगा के दर्शन के लिए जनपद मुख्यालय से होकर आगे बढ़ेंगे, वहीं तब तक स्वच्छता, कूड़ा, गंगा की अविरलता के लिए गोपीनाथ रावत के आंदोलन को,122वें दिन से ऊपर हो जायेगा, तब बाहर से आये किसी श्रद्धालुओं के मार्फत ही सही गोपीनाथ रावत की आवाज दिल्ली तक जा पायेगी यह वक्त ही बतायेगा, इतना ही नहीं तब शासन-प्रशासन नगरपालिका और मौन नगरवासियों की खामोशी पर बहुत बड़ा स्वालीय निशान लगेगा, गोपीनाथ रावत नें कहा कि 104वें दिन भी धरना जारी इसलिए है कि सुरंग के अंदर-बाहर कचरे का अंबार जस का तस पड़ा है।
गोपीनाथ सिंह रावत के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आज 104वें दिन भी पर्वत सा अडिग है, तीन महीनें से अधिक समय बीत चुके इस आंदोलन को चौथा महीना हो गया है, लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता और लापरवाही नें हालात को और भयावह बना दिया है स्थिति अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि जहां पहले केवल सुरंग के अंदर कचरा डाला जा रहा था, अब सुरंग के बाहर भी खुलेआम कचरा जमा किया जा रहा है।
यह न सिर्फ अव्यवस्था का उदाहरण है, बल्कि यह साफ संकेत है कि प्रशासन कूड़े की समस्या पर विफ़ल होता दिखाई देता नजर आ रहा है, चुनावी वादों से थक हार नगरपालिका अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान नें भी कूड़े की समस्या के आगे हथियार डाल दिए जहाँ 104 दिन बीत जानें के बाद भी कचरे का पूर्ण निस्तारण नहीं हो पाया वहीं ट्रेंचिंग ग्राउंड का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ, सवाल सीधा है कि आखिर कब तक जनता इस बदइंतजामी का बोझ उठाएगी जबकि गर्मी आनें को है, प्रशासन बीमारियों को अपनी लापरवाहियों से न्यौता देते दिख रहा है। जहाँ राजनीतिक चेहरे गोपीनाथ सिंह रावत के आंदोलन को विफल करते देखे जा रहे हैं, वहीं काशी के इतिहास में 100 दिन से ऊपर के ऐतिहासिक महाआंदोलन को नगरवासियों के लिए महज राजनीति बता रहे हैं।
