अमृतसर, 28 मार्च (हरमिंदर सिंह नागपाल)
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के वार्षिक बजट सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सिखों की मौलिक और विशिष्ट पहचान को मिटाने की कोशिशों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए एकजुट होने की अपील, पंजाब सरकार द्वारा ‘पंजाब पवित्र धार्मिक ग्रंथ (अपराध निवारण) विधेयक 2025’ के संबंध में अपनाए जा रहे दृष्टिकोण और मुख्यमंत्री के बयानों से पैदा हो रहे भ्रम, भाई बलवंत सिंह राजोआणा की सजा माफी और बंदी सिंहों की रिहाई की मांग, एआई (AI) के दुरुपयोग पर चिंता, विभिन्न राज्यों में परीक्षाओं के दौरान सिख छात्रों को ककार (धार्मिक चिह्न) उतारने के लिए मजबूर करने की घटनाएं, पंजाब में बढ़ते पुलिस मुठभेड़ों पर चिंता, पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब का कॉरिडोर फिर से खोलने और विदेशों में सिखों की समस्याओं के समाधान के लिए भारत सरकार से प्रभावी कदम उठाने की अपील जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
प्रमुख प्रस्तावों का विवरण:
सिख पहचान की रक्षा: एक प्रस्ताव के माध्यम से सिखों की विशिष्ट पहचान, महान इतिहास और धार्मिक परंपराओं को निशाना बनाने वाली ‘नीतिगत साजिशों’ पर चिंता जताई गई। कहा गया कि सिख एक स्वतंत्र कौम है जिसका अपना दर्शन और मर्यादा है। दुनिया भर की संगत से अपील की गई कि वे अपनी मौलिकता की रक्षा के लिए जागरूक रहें।
बेअदबी कानून और सरकार की भूमिका: ‘पंजाब पवित्र धार्मिक ग्रंथ विधेयक 2025’ पर पंजाब सरकार के रवैये की आलोचना की गई। एसजीपीसी ने कहा कि सरकार ने सुझाव तो मांगे, लेकिन जरूरी जानकारी साझा नहीं की। साथ ही, मुख्यमंत्री द्वारा ‘जागत जोति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008’ में संशोधन की बात करने पर भी सवाल उठाए गए। मांग की गई कि बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बने और दोषियों को मिसाली सजा मिले।
बंदी सिंहों की रिहाई: पिछले तीन दशकों से जेलों में बंद सिखों की रिहाई न होने पर केंद्र और राज्य सरकारों के ‘अड़ियल’ रवैये की निंदा की गई। भाई बलवंत सिंह राजोआणा की दया याचिका पर 14 साल से फैसला न होने को सिखों के साथ भेदभाव बताया गया। साथ ही भाई दविंदरपाल सिंह भुल्लर, जगतार सिंह हवारा और अन्य की तत्काल रिहाई की मांग की गई।
एआई (AI) का दुरुपयोग: आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के जरिए सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग की गई।
ककारों का अपमान: परीक्षाओं के दौरान सिख छात्रों को ककार उतारने के लिए मजबूर करने वाली घटनाओं पर दुख जताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
पुलिस मुठभेड़: पंजाब में बढ़ रही पुलिस मुठभेड़ों की घटनाओं पर पारदर्शिता और न्यायिक जांच की मांग की गई ताकि समाज में असुरक्षा का माहौल खत्म हो सके।
करतारपुर साहिब कॉरिडोर: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के कारण बंद हुए करतारपुर साहिब कॉरिडोर को तत्काल फिर से खोलने की अपील की गई।
विदेशी सिखों की सुरक्षा: विदेशों में रह रहे सिखों के साथ होने वाली नस्लीय हिंसा और भेदभाव को रोकने के लिए भारत सरकार से कूटनीतिक प्रयास करने को कहा गया।
मीरी पीरी मेडिकल कॉलेज: हरियाणा के शाहबाद मारकंडा स्थित मीरी पीरी मेडिकल कॉलेज पर ‘जबरन कब्जे’ की कोशिश की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
अंत में, हाल ही में अकाल चलाणा (निधन) कर गए बाबा सुच्चा सिंह (कारसेवा), एसजीपीसी सदस्य स. अमीर सिंह रसीदां और अन्य पूर्व सदस्यों के सम्मान में शोक प्रस्ताव पारित कर मूलमंत्र और गुरमंत्र का जाप किया गया।
