पिछले 25 वर्षों से मोरनी क्षेत्र के जमींदारों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है शिवालिक विकास मंच- विजय बंसल एडवोके
सुरेंद्र सिंह
मोरनी /पंचकूला ।
हरियाणा प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन एवं पंचकूला, चंडीगढ़ ट्राईसिटी के फेफड़े कहलाए जाने वाले मोरनी क्षेत्र के जमींदारों को पिछली कई पीढियां से उनकी जमीनों का मालिकाना हक नहीं दिया जा रहा है पहाड़ी क्षेत्र वासियों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक दिलाने के लिए शिवालिक विकास मंच पिछले लगभग 25 वर्षों से प्रशासनिक, सरकारी एवं न्यायिक स्तर पर लड़ाई लड़ता आ रहा है। यह बयान शिवालिक विकास मंच प्रदेश अध्यक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय बंसल एडवोकेट ने पत्रकारों को जारी करते हुए कहा कि मोरनी क्षेत्र के जमींदारों को उनका हक दिलाने की मांग करते हुए शिवालिक विकास मंच ने वर्ष 2017 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका डाली थी। इस आधार पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मामले को लटकाने को लेकर गत दिनों वन विभाग एवं प्रशासन को लताड़ लगाई है। जिसके बाद सरकार एवं प्रशासन भी सक्रिय हुआ था आज भी शिवालिक विकास मंच अपनी इसी मांग पर अड़ा हुआ है जब तक लोगों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता तब तक वह ना तो खुद ना चैन से बैठेंगे ना ही प्रशासन एवं सरकार को चैन से बैठने देंगे।
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि मोरनी क्षेत्र की पहाड़ियों में नोतोड़ भूमि से जुड़े मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों में लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है। वर्षों से इस भूमि पर खेती-बाड़ी और निवास कर रहे ग्रामीणों को अब तक अपनी जमीनों का मालिकाना हक तक नहीं मिल पाया है। विजय बंसल का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
शिवालिक विकास मंच ने इस मुद्दे को कई बार प्रशासन और सरकार के सामने उठाया है। बंसल ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जनहित याचिका, ज्ञापन, धरना और बैठकों के माध्यम से कई बार प्रशासन एवं सरकार से इस समस्या के समाधान की मांग की लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला हैं।
विजय बंसल ने कहा कि मोरनी क्षेत्रवासी उनके पास कई बार अपनी समस्याए लेकर आए हैं ग्रामीणों का कहना है वे पीढ़ियों से इन जमीनों पर रह रहे हैं और अपनी आजीविका के लिए इन पर निर्भर हैं। मालिकाना हक न मिलने के कारण उन्हें कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है। साथ ही जमीन के अधिकार स्पष्ट न होने से वे हमेशा असुरक्षा की भावना में जी रहे हैं। विजय बंसल ने कहा कि लोगों को उनके अधिकार न मिलने और वन विभाग एवं प्रशासन की भारी अड़चनों के चलते परेशान होकर लगभग 25 से 30% मोरनी के लोग मजबूरन आसपास के शहरों और कस्बों में पलायन कर चुके हैं।
विजय बंसल ने कहा कि इस पूरे मामले में प्रशासन एवं सरकार की ढुलमुल कार्यवाही भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेगी और जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएगी ताकि उन्हें उनकी जमीनो का वैधानिक अधिकार मिल सके और उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। विजय बंसल ने कहा कि मोरनी में कुल 14 भोज कोटाहे है जबकि 172 वास हैं।
विजय बंसल ने उपरोक्त विषय की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि तत्कालीन बंसीलाल सरकार ने कमिश्नर टीडी जोगपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी जिसने किसानों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक देने के हक में एक रिपोर्ट बनाकर वर्ष 1987 में सरकार को दी थी। जिसमें किसानों को जंगल से लकड़ी, पानी, रास्ता, पशु चारान, पूजा स्थल बनाने सहित 6 अधिकार दिए जाने की बात भी शामिल थी। विजय बंसल ने कहा कि उसी रिपोर्ट के आधार पर ही शिवालिक विकास मंच ने वर्ष 2017 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर लोगों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक देने की मांग की थी।
विजय बंसल ने कहा कि गलत तरीके से बिल्डर प्रॉपर्टी डीलर एवं एजेंट शिवालिक विकास मंच को और खुद उनको ( विजय बंसल) को बदनाम करने की नीयत से लोगों को गुमराह कर रहे हैं। जबकि सन 1989 में ही सरकार द्वारा पंजाब लैंड परीवेक्शन एक्ट (पी. एल. पी. ए.) 1900 की दफा 4 के तहत नोटिफिकेशन जारी कर दिया था और 10 साल के बाद सरकार द्वारा वर्ष 2000 में यही अधिसूचना फिर से रिन्यु कर दी गई थी। जबकि शिवालिक विकास मंच गैर सरकारी संगठन है जो निस्वार्थ भाव से शिवालिक क्षेत्र के तीन जिलों पंचकुला, अंबाला और यमुनानगर के लोगों की हितों की लड़ाई लड़ रहा है शिवालिक विकास मंच का गठन नारायणगढ़ से दो बार के विधायक रहे महान स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय साधुराम सैनी द्वारा 4 फरवरी 1996 में किया गया था। वर्ष 2010 से विजय बंसल शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष हैं। शिवालिक विकास मंच ने सड़क से लेकर सरकार तक लोगों के हितों की लड़ाई लड़ी और 67 जनहित याचिकाएं दायर कर हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लोगों के हितों की लड़ाई लड़ी। शिवालिक मंच ने ही पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर जो जंगली जानवर किसने की फसलों और पालतू जानवरों को नुकसान पहुंचाते थे वर्ष 2020 में हाई कोर्ट के माध्यम से किसानों को उनकी फसलों के होने वाले नुकसान का 18000 रूपये प्रति एकड़ मुआवजे का प्रावधान करवाया। विजय बंसल ने कहा कि इतना ही नहीं वर्ष 2008 में शिवालिक विकास बोर्ड को भंग कर दिया गया था लेकिन जनहित याचिका दायर कर न केवल शिवालिक विकास बोर्ड को पुनः गठन करवाया बल्कि बोर्ड में मुख्य कार्यकारी अधिकारी और गैर सरकारी सदस्यों की नियुक्ति करवाई और शिवालिक विकास बोर्ड के कुल वार्षिक बजट का 50% हिस्सा जिला पंचकूला में ही लगाने का प्रावधान करवाया। वर्ष 2007 में शिवालिक विकास बोर्ड के पड़े खस्ता हालत भवन में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री चंद्र मोहन के माध्यम से न केवल बहुत तकनीकी संस्थान बनवाया बल्कि मोरनी क्षेत्र के 50% छात्रों को आरक्षण का प्रावधान भी करवाया। जहां से कई छात्र शिक्षा ग्रहण कर नौकरियों में लगे हुए हैं। उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन के प्रयासों से ही क्षेत्र में आईटीआई और खेल स्टेडियम मंजूर करवाया और स्टेडियम के लिए 40 लाख रुपए की राशि भी मंजूर करवाई परंतु जमीन न मिलने की वजह से उपरोक्त दोनों परियोजनाएं सिरे नहीं चढ़ पाई। विजय बंसल ने बताया कि इतना ही नहीं सन 1980 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल ने मोरनी के लोगों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक देने के निर्देश भी दिए थे।
विजय बंसल ने कहा कि लगभग 6 हजार एकड़ जमीन को लेकर अब लड़ाई वन विभाग एवं जमीदारों के बीच की है जबकि वन विभाग को यह नहीं पता कि उनकी जमीन कहां पर और कितनी है हालांकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद गठित की गई पटवारीयों की कमेटी ने रिपोर्ट पेश की थी कि वन विभाग के पास जमीदारों की लगभग 3000 बीघा जमीन कब्जे में है जो की सरेआम स्थानीय जमीदारों के अधिकारों का हनन है। विजय बंसल ने कहा कि उन्होंने सूचना के अधिकार 2005 के तहत जानकारी मांगी थी जिसमें खुलासा हुआ था कि विभाग ने पटवारीयों पर एक करोड़ 60 लाख रुपए खर्च कर दिए थे लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। जबकि मोरनी की लगभग 6000 एकड़ जमीन का पुनः बंदोबस्त होना था जो प्रशासनिक एवं सरकारी उदासीनता के कारण नहीं हो सका।
विजय बंसल ने कहा कि वर्ष 2017 में हाई कोर्ट में दायर याचिका के बाद वन विभाग ने हाई कोर्ट को वर्ष 2018 में जानकारी दी थी कि नोतोड़ मामले के निपटारे के लिए विभाग ने वन बंदोबस्त अधिकारी की नियुक्ति कर उन्हें दफ्तर भी दे दिया है, और खर्च के लिए एक करोड रुपए डीएफओ कार्यालय में जमा करवा दिया है। विजय बंसल ने कहा बावजूद इसके विभाग ने कोई काम नहीं किया और मोरनी के जमींदारों के मालिक आना हक का मामला अभी तक लटक रहा है। इसके बाद शिवालिक विकास मंच ने हाई कोर्ट में पुनः रिव्यू पिटीशन डाली थी जिसका हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया था। हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि मोरनी में जमीन की मौजूदा स्थिति बताओ क्या है। इसके बाद डीसी पंचकूला ने 15 जनवरी 2024 को रिपोर्ट पेश की थी। विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि डीसी की रिपोर्ट में वन विभाग, जिला ग्राम एवं शहरी योजना विभाग और लोक निर्माण विभाग द्वारा की गई कार्यवाही का भी जिक्र था जिसमें डिटीपी पंचकूला ने बताया था कि उन्होंने अवैध निर्माण के खिलाफ 139 नोटिस दिए हैं, वन विभाग ने बताया था कि उन्होंने 59 कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, और पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा पंजाब शेड्यूल रोड के तहत लोगों को अवैध निर्माण के 109 नोटिस दिए हैं। उन्होंने अवैध निर्माण के विरुद्ध इस दौरान सरकार ने मोरनी क्षेत्र का पटवारीयों से सर्वे करवाया जी सर्वे रिपोर्ट में वन विभाग के पास जमीदारों की 3000 बीघा जमीन जंगल में फालतू निकली हैं। विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि तब हाई कोर्ट ने वर्ष 2024 में कहा था कि बंदोबस्त हो जाने तक बिना किसी अनुमति के कोई निर्माण कार्य नहीं होगा। विजय बंसल ने कहा कि पूरी तरह से बंदोबस्त होने के बाद ही फैसला होगा कि कितनी जमीन वन विभाग के पास है और कितनी जिमीदारों के पास है।
विजय बंसल एडवोकेट ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि तत्कालीन कमिश्नर टीडी जगपाल द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर मोरनी के लोगों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक दिया जाए और जंगल में उनके रास्ते अपनी पशु चारा सहित अन्य 6 अधिकार भी उन्हें दिए जाएं।
