जसपाल सिंह/रमोला न्यूज उत्तरकाशी-विकासखंड डुंडा के गढ़ गाँव में स्थित सिद्धपीठ रेणुका देवी मंदिर में बरसाली पट्टी का सबसे पौराणिक मेला देव-डोलियों देव-निशानों के साथ पूरी आस्था, भव्यता और दिव्यता से संपन्न हुआ, प्रसिद्ध क्षेत्रीय देवता नृसिंह, नागराजा, कपिलमुनि आदि देव-डोलियों, देव-निशानों के साथ दूर-दूर से थौल्यारों नें सिद्धपीठ गढ़ पर्वत पर आकर माँ रेणुका के दर्शन कर मन इच्छित मनोकामना मांगी, मँदिर समिति के अध्यक्ष आलेंद्र सिंह बिष्ट नें मेले में पहुंचे देव-डोलियों, देव-निशानों का विधि विधान पूर्वक स्वागत किया।
वैशाख माह के आगमन प्रकृति के मौल्यार पर हर साल 3 गते बैसाख के दिन लगनें वाले इस प्रसिद्ध पौराणिक मेले में 21 गाँवों से अधिक और जनपद के दूर-दराज क्षेत्रों के लोगों की आस्था अब भी सिद्धपीठ माँ रेणुका देवी गढ़ बरसाली पर रहती है, नाकुरी सड़क मार्ग से लगभग 5 किमी. और पैदल लगभग 2 से 3 किमी. दूरी पर स्थित यह स्थान माँ रेणुका की तपस्थली है, प्रसिद्ध पौराणिक सिद्धपीठ गढ़पर्वत पर दूर-दूर से लोग मेला देखनें आते हैं।
गढ़ पर्वत पर एक दिवसीय इस पौराणिक मेले को भीड़ से नहीं बल्कि शुद्ध मन, साफ हृदय, माँ के प्रति प्रगाढ़ आस्था और गहरे विश्वास से देखा जाता है, बलवती भगवती देवी रेणुका शक्ति स्वरूपा देवी हैं, जहाँ अपनें भक्तों पर खुश होकर बाल कन्या के रूप में देवी दर्शन भी देती हैं तो नाराज होकर विशाल और विराट रूप में भी देवी अपना स्वरूप दिखाती हैं, मन्दिर समिति और पंडितों के आपसी सहयोग से लगभग हजारों लोगों नें बड़े धैर्य और शांतिपूर्ण तरीके से माँ रेणुका के दर्शन भी किए।
इजराइल-अमेरिका, ईरान युद्ध और विभिन्न क्षेत्रों में रेणुका देवी के नाम से चल रहे मेलों का मिलता जुलता असर देखनें को मिला, बेशक क्षेत्रीय मेले में बरसाली पट्टी के पूर्व वर्तमान जन-प्रतिनिधि समाज सेवक, समाज चिंतक कम दिखे, लेकिन सिद्धपीठ माँ रेणुका गढ़ पर्वत पर विश्वास रखनें वाले थौल्यारों की आस्था और भीड़ में कोई कमी नजर नहीं आयी, मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ खूब रही, दर्शनार्थी आते जाते रहे, जबकि थौल्यार मेले के अंत तक मेले का आनंद लेते दिखे, जबकि दुकानों पर युद्ध का असर देखनें को मिला।
