मानसून सिर पर, प्रशासन की तैयारियां कागजों में कैद; जनता को फिर डूबने के लिए छोड़ दिया गया : प्रदीप चौधरी

 

सुरेंद्र सिंह/ रमोला न्यूज़

पंचकूला: कालका विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता प्रदीप चौधरी ने मानसून से पहले प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रशासन केवल बैठकों और कागजी दावों तक सीमित दिखाई दे रहा है। जमीनी स्तर पर जलभराव, भूमि कटाव और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी निकासी की व्यवस्थाओं को लेकर कोई गंभीर तैयारी नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में जिन स्थानों पर लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था, वहां भी अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

प्रदीप चौधरी ने कहा कि टांगरी नदी के किनारों पर भूमि कटाव रोकने के इंतजाम पूरी तरह नाकाफी साबित हो रहे हैं। पिछली बरसात के दौरान अनेक किसानों की उपजाऊ जमीन नदी के तेज बहाव में बह गई थी, लेकिन उसके बावजूद प्रशासन ने स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं किया। इसके अलावा गांवों से लगती नदियों, चोओं और बरसाती नालों की समय पर सफाई नहीं करवाई गई, जिसके कारण बरसात के दिनों में पानी गांवों की गलियों और घरों तक पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि नालों और सीवरेज व्यवस्था की सफाई भी संतोषजनक नहीं है, जिससे जलभराव का खतरा और बढ़ गया है।

पूर्व विधायक ने कहा कि मोरनी क्षेत्र में पिछली बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त हुए कई संपर्क मार्ग आज तक पूरी तरह पक्के और सुरक्षित नहीं किए गए हैं। यदि इस बार भारी वर्षा होती है तो इन मार्गों के दोबारा बंद होने की आशंका बनी हुई है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी होगी। उन्होंने मांग की कि प्रशासन पिछली बरसात में जलभराव और नुकसान वाले सभी स्थानों का विशेष निरीक्षण कर जनता को बताए कि वहां क्या-क्या प्रबंध किए गए हैं। साथ ही मानसून शुरू होने से पहले कंट्रोल रूम और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को तुरंत सहायता मिल सके। प्रदीप चौधरी ने कहा कि अभी भी समय है, प्रशासन को केवल दावों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर प्रभावी और व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करनी चाहिए।

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