राहुल गांधी के देहरादून आगमन पर छात्रों की गूंज कार्यक्रम नें कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा कर विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल फूँक दिया*

 

जसपाल सिंह रमोला न्यूज़ 17 जुलाई

देहरादून– उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भले अभी कुछ समय बचा हो, लेकिन राजनीतिक दलों नें अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है, आए दिन राजधानी में विपक्ष और विरोधियों का हंगामा, रैलियाँ, बैठकें दौर इसी क्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा कांग्रेस के लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संगठन में नई ऊर्जा भरने की शुरुआत है, लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिला कि प्रदेश कांग्रेस का पूरा संगठन एक ही मंच पर सक्रिय और उत्साहित दिखा, राहुल गांधी के देहरादून आगमन और छात्रों की गूंज कार्यक्रम नें कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा कर विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल फूँक दिया है।

 

प्रदेश कांग्रेस भले इस कार्यक्रम को छात्रों के मुद्दों पर संवाद बता रही हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके जरिए पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह आगामी चुनाव में बेरोजगारी, पेपर लीक, शिक्षा और युवाओं के भविष्य को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में जुट गयी है, जबकि युवाओं का काफी हुजूम कार्यक्रम में देखानें को मिला, प्रदेश में लंबे समय से बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर असंतोष रहा कांग्रेस इन्हीं मुद्दों को सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार बनाने की रणनीति पर काम करते देखी जा रही है, राहुल गांधी के दौरे का सबसे बड़ा असर संगठनात्मक स्तर पर देखने को मिला पिछले कुछ समय से प्रदेश में गुटबाजी और निष्क्रियता के आरोप झेल रही प्रदेश कांग्रेस में इस कार्यक्रम के बहाने नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रियता देखते बढ़ गई।

 

जिला इकाइयों से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक तैयारियों में जुटता दिखाई दिया, कार्यकर्ताओं का मानना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व की सक्रिय मौजूदगी से संगठन का मनोबल बढ़ा जिससे चुनावी तैयारियों को गति मिलेगी, हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षक यह भी मानते हैं कि किसी एक दौरे से संगठन की पुरानी चुनौतियां स्वतः समाप्त नहीं हो जातीं कांग्रेस के सामने अभी भी बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना, गुटीय मतभेदों को कम करना और एकजुट चुनावी रणनीति बनाना जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

 

राहुल गांधी के दौरे को भाजपा नें राजनीतिक कार्यक्रम करार देते हुए उस पर सवाल उठाए, भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस युवाओं के मुद्दों को राजनीतिक हथियार बनानें की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस का रिकार्ड भी जनता के सामने है, भर्ती घोटालों का रहा है, यानी राहुल गांधी के दौरे नें कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह जितना बढ़ाया है, उतना ही भाजपा को भी अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज करने का अवसर दिया है, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड का चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, राष्ट्रीय नेतृत्व की सक्रियता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

प्रदेश काँग्रेस पार्टी जहाँ युवाओं, महिलाओं, किसानों, रोजगार तथा पलायन जैसे स्थानीय मुद्दों पर लगातार अभियान चलाती है, तो कांग्रेस को संगठनात्मक लाभ मिल सकता है, वहीं उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के चुनावी मंसूबों पर पानी फेर सकती है, फिलहाल इतना तय है कि राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे नें उत्तराखंड कांग्रेस में नई हलचल पैदा कर दी है और यही हलचल आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति का तापमान गरमा सकती है।

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