चंडीगढ़, 26 अगस्त :
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री हरजीत सिंह ग्रेवाल ने आज कहा कि आयोग लंबित शिकायतों के समाधान को प्राथमिकता दे रहा है और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने तथा न्याय, समानता व समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक समुदायों के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत कर रहा है। यू.टी. स्टेट गेस्ट हाउस, सेक्टर 6, चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग के समक्ष लगभग 7,000 शिकायतें लंबित है और कानून के अनुसार उनका जल्द से जल्द निपटारा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
श्री ग्रेवाल ने कहा कि उनके चंडीगढ़ दौरे का उद्देश्य पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों को समझना और सुझाव एकत्र करना था। उन्होंने कहा कि आयोग ने देशभर के विभिन्न वर्गों और हितधारकों तक पहुँच बनाना शुरू कर दिया है और उनके सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक तथा प्रशासनिक सरोकारों को समझने के लिए समुदाय के प्रतिनिधियों से संवाद जारी रखेगा। उन्होंने आगे कहा कि आयोग के अधिकार क्षेत्र के तहत सभी वास्तविक शिकायतों और सुझावों की समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और सभी समुदायों के लिए समान सम्मान सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण संवैधानिक सिद्धांत है। कुछ अन्य देशों की स्थिति का उल्लेख करते हुए श्री ग्रेवाल ने कहा कि भारत एक ऐसा माहौल प्रदान करता है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग गरिमा और सुरक्षा के साथ स्वतंत्रतापूर्वक अपने धर्म का पालन कर सकते हैं।
सिख बंदियों और उनकी पैरोल से जुड़े मुद्दों पर श्री ग्रेवाल ने कहा कि ऐसे मामले कानून-व्यवस्था के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और इनसे लागू कानूनी ढांचे के तहत निपटा जाता है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित करने वाले मुद्दों की समीक्षा करने और उचित समाधान तक पहुँचने के लिए आयोग अपने दायरे में हर संभव प्रयास करेगा।
श्री ग्रेवाल ने श्री हेमकुंट साहिब सहित धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले सिख श्रद्धालुओं की सुरक्षा, गरिमा और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया। उत्तराखंड में तीर्थयात्रियों से जुड़े मामलों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को बातचीत, निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय के ज़रिए हल किया जाना चाहिए। उन्होंने देशभर के धार्मिक स्थलों की सुरक्षित और सम्मानजनक तीर्थयात्रा के लिए प्रभावी प्रबंध करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि आयोग अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा और सशक्तिकरण व समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए संवाद, परामर्श और संस्थागत तंत्र के माध्यम से काम करता रहेगा। उन्होंने अपने विचार और सुझाव साझा करने के लिए विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों और हितधारकों का धन्यवाद किया।

