विक्रांत शर्मा/ रमोला न्यूज़ ब्यूरो
पंचकूला, 22 अगस्त। श्री दुर्गा मंदिर सेक्टर-7 में चल रही सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के छठे दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पूरा वातावरण भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया। कथा स्थल पर गूंजते हर-हर महादेव के जयकारों और भजनों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
कथा वाचक महामंडलेश्वर यमुना पुरी जी महाराज ने शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनाते हुए कहा कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या, अटूट श्रद्धा और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसके बाद देवताओं, ऋषि-मुनियों और गणों की उपस्थिति में भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ।
भक्ति, तपस्या और समर्पण का संदेश
महामंडलेश्वर यमुना पुरी जी महाराज ने कहा कि शिव-पार्वती का विवाह केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं, बल्कि भक्ति, तपस्या, धैर्य, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। माता पार्वती ने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कठिन परिस्थितियों में भी अपनी साधना नहीं छोड़ी। इससे मनुष्य को जीवन में कठिनाइयों के बावजूद अपने संकल्प और विश्वास पर कायम रहने की प्रेरणा मिलती है।
कथा के दौरान शिव विवाह की झांकी और भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता पार्वती के जयकारे लगाए तथा भक्ति गीतों पर झूमते हुए कथा का आनंद लिया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते विशेष व्यवस्था भी की गई।
23 अगस्त को हवन और पूर्णाहुति
सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का समापन 23 अगस्त को हवन, पूर्णाहुति और भंडारे के साथ किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा के समापन अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की है।

