उत्तराखंड पुलिस द्वारा सिख युवाओं की पगड़ी उतारकर उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करना दुर्भाग्यपूर्ण: एडवोकेट धामी

 

अमृतसर, 19 जून-(हरमिंदर नागपाल रामोला न्यूज)

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में सिख युवाओं के साथ हुई घटना और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई एकतरफा कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

एडवोकेट धामी ने कहा कि सिखों की पगड़ी (दस्तार) और कृपाण उनके धार्मिक ककार हैं, जिन्हें धारण करने का सिखों को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि हर धर्म की भावनाओं का सम्मान करना सभी सरकारी अधिकारियों की भी संवैधानिक जिम्मेदारी है। एडवोकेट धामी ने कहा कि इस हालिया घटना में पहले कुछ स्थानीय लोगों द्वारा सिख युवाओं पर हमला किया गया, जिसके विरोध में विवाद बढ़ गया। पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय सिख श्रद्धालुओं के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए युवाओं की पगड़ी उतारकर उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।

शिरोमणि कमेटी अध्यक्ष ने कहा कि श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जाने वाली सिख संगत की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना उत्तराखंड सरकार की जिम्मेदारी है। किसी भी परिस्थिति में सिख श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव या धक्काशाही (ज्यादती) बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

शिरोमणि कमेटी अध्यक्ष ने सिख संगत से शांति, संयम और एकजुटता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी तरह के उकसावे में न आएं। उन्होंने स्थानीय सिख नेताओं से भी सरकार और पुलिस प्रशासन से संपर्क कर सिख युवाओं को न्याय दिलाने के लिए कहा। उन्होंने उत्तराखंड सरकार और प्रशासन से सिख भावनाओं का सम्मान करने और भड़काऊ बयानबाजी करने वाले शरारती तत्वों पर रोक लगाने की भी अपील की।

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