पंजाब की सियासत में बड़ा धमाका : डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने बनाई नई पार्टी, ‘भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी’ के जरिए ‘अकेले’ ठोंकी ताल

लुधियाना : पंजाब की राजनीति में ‘सिद्धू दंपती’ का अगला कदम क्या होगा, इस सस्पेंस से पर्दा उठ गया है। पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी’ की घोषणा कर दी है। सोशल मीडिया पर देर रात किए गए इस ऐलान ने न केवल कांग्रेस और भाजपा, बल्कि आम आदमी पार्टी के खेमे में भी हलचल मचा दी है। हैरानी की बात यह रही कि इस बड़ी घोषणा के वक्त नवजोत सिंह सिद्धू अपनी पत्नी के साथ नजर नहीं आए। डॉ. नवजोत कौर ने अपने ‘X’ हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए इसे एक “बहुप्रतीक्षित घोषणा” और “दिव्य प्रेरणा” बताया। उन्होंने लिखा कि यह पार्टी समान विचारधारा वाले साहसी लोगों का एक समूह है, जो पंजाब को उसकी खोई हुई गरिमा वापस दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कांग्रेस से निष्कासन और भाजपा से दूरी : नई राह का सफर
डॉ. नवजोत कौर के इस कदम के पीछे पिछले कुछ महीनों का सियासी घटनाक्रम बेहद अहम है।

500 करोड़ का ‘अटैची’ विवाद : पिछले साल डॉ. कौर ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी 500 करोड़ रुपये में बिकती है। इस बयान ने कांग्रेस हाईकमान को हिला दिया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया।

भाजपा से नजदीकी के कयास : कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों की तारीफ शुरू की थी, जिससे लग रहा था कि वह भाजपा का दामन थामेंगी। लेकिन नई पार्टी बनाकर उन्होंने सभी कयासों पर विराम लगा दिया है।

पार्टी का विजन : “सत्य, प्रेम और आध्यात्मिक गुरुओं का साथ”अपनी पोस्ट में डॉ. नवजोत कौर ने भविष्य की सरकार का खाका खींचते हुए तीन मुख्य बातें कहीं:

स्वर्णम पंजाब : पंजाब को फिर से एक समृद्ध और आध्यात्मिक राज्य बनाना, जहां बाहरी हस्तक्षेप न हो।

जनता की सरकार : एक ऐसी व्यवस्था जो ‘जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा’ संचालित हो।

आध्यात्मिक उपचार : गुरुओं की सहायता से लोगों के “घायल मनों” को ठीक करने का लक्ष्य।

सिद्धू दंपती और कांग्रेस का ‘कड़वा’ इतिहास
यह नई पार्टी उस लंबी खींचतान का नतीजा मानी जा रही है जो 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने के साथ शुरू हुई थी। सुनील जाखड़ और सुखजिंदर रंधावा का नाम कटने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया गया, जिससे नवजोत सिंह सिद्धू नाराज हो गए थे। 2022 के चुनावों में हार और उसके बाद पत्नी पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई ने सिद्धू परिवार को कांग्रेस से पूरी तरह अलग कर दिया।

डॉ. नवजोत कौर सिद्धू का यह दांव पंजाब की राजनीति को ‘त्रिकोणीय’ से ‘बहुकोणीय’ बना सकता है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नवजोत सिंह सिद्धू भी अपनी पत्नी की इस ‘राष्ट्रवादी’ राह पर चलेंगे या उनकी राहें अलग होंगी? फिलहाल, पंजाब की जनता इस नए ‘विकल्प’ को किस तरह लेती है, यह आने वाला वक्त बताएगा।

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