सोनिका भाटिया/ रमोला न्यूज
चंडीगढ़ :केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का कहना है कि बेशक तकनीक इलाज को आगे बढ़ा सकती है, लेकिन इंसानी स्पर्श और सहानुभूति की कोई जगह नहीं ले सकता है। गुरुवार को पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) के 39वें दीक्षांत समारोह में उन्होंने यह बात कही।
इस अवसर पर संस्थान के 682 विद्यार्थियों को विभिन्न चिकित्सा पाठ्यक्रमों में डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि 95 छात्रों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए पदकों से सम्मानित किया गया। समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, नीति आयोग के पूर्व सदस्य विनोद के. पॉल, पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल और डीन (अकादमिक) आर.के. राठो भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में नड्डा ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेलीमेडिसिन जैसी आधुनिक तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है, लेकिन डॉक्टरों की संवेदनशीलता और मरीजों के साथ मानवीय व्यवहार ही उपचार की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि तकनीक और मानवीय मूल्यों का संतुलन ही स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बना सकता है।
पीजीआई की उपलब्धियों की सराहना करते हुए नड्डा ने कहा कि यह संस्थान चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी सेवा में देश का अग्रणी केंद्र है तथा यहां सैकड़ों शोध परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने देश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले दस वर्षों में मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे न केवल चिकित्सा शिक्षा का दायरा बढ़ा है, बल्कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी मजबूत हुई है।
उन्होंने युवा डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि मेडिकल शिक्षा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज की ओर से दिया गया एक अवसर है। नड्डा ने डॉक्टरों से अपेक्षा जताई कि वे विनम्रता, सेवा भावना और जिम्मेदारी के साथ समाज को लौटाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हर सफल डॉक्टर के पीछे उसके माता-पिता और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है, जिसे कभी नहीं भूलना चाहिए।
समारोह में निदेशक प्रो. विवेक लाल ने संस्थान की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से लाखों मरीजों को मुफ्त परामर्श उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि पीजीआई जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं, विशेषकर किडनी प्रत्यारोपण के क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और उनके परिजनों की उपस्थिति ने समारोह को गौरव और उत्साह से भर दिया, जहां चिकित्सा सेवा, शिक्षा और मानवता के प्रति समर्पण का संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया।
