पार्वती रमोला/ रमोला न्यूज़
चंडीगढ़, 30 अप्रैल – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ‘स्वस्थ हरियाणा ही विकसित हरियाणा की आधारशिला है।’ इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। चालू वित्त वर्ष के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए पिछले वर्ष की तुलना में 32.89 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी करते हुए लगभग 14 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह वृद्धि प्रदेश के नागरिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार की प्राथमिकता को दर्शाती है। जबकि वर्ष 2014 में प्रदेश का स्वास्थ्य बजट 2,646 करोड़ रुपये था, जिसे वर्ष 2025-26 में बढ़ाकर 10,500 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस प्रकार पिछले वर्षों में स्वास्थ्य बजट में लगभग 298 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री वीरवार को चंडीगढ़ में स्वास्थ्य क्षेत्र की अनुकरणीय पहलों पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह अवसर देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के भविष्य को दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। दो दिन तक इस क्षेत्र में देशभर में की जा रही श्रेष्ठ व अनुकरणीय पहलों को साझा किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन देश के स्वास्थ्य क्षेत्र की श्रेष्ठ सेवाओं और नवाचारों को प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने मरीजों के परिजनों को प्रशिक्षित करने के लिए ‘केयर कम्पैनियन प्रोग्राम’ चलाया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से 188 केंद्रों में मरीजों के परिजनों को प्रशिक्षित किया है। उन्हें व्हाट्सएप-आधारित ‘मोबाइल केयर सर्विस’ से भी जोड़ा है। डिजिटल हेल्थ (ई-संजीवनी) कार्यक्रम में आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब प्रतिदिन 2,200 से अधिक टेली-परामर्श कर रहे हैं। वे ग्रामीण मरीजों को सीधे पी.जी.आई., चंडीगढ़ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों से परामर्श दिलाते हैं। U-WIN और eVIN जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म द्वारा टीकाकरण और वैक्सीन की सप्लाई चेन को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। इससे शत-प्रतिशत टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने हर जिले में एक नया मेडिकल कॉलेज खोलने का संकल्प लिया। वर्ष 2014 में प्रदेश में केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे। अब इनकी संख्या 17 हो चुकी है। एम.बी.बी.एस. की सीटें 700 से बढ़कर 2,710 हो गई हैं। इसी तरह, नर्सिंग, फिजियथैरेपी व पैरामेडिकल में शिक्षा का विस्तार किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने केवल स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि उनकी गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया है। राज्य के 1,479 स्वास्थ्य संस्थान राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों के अंतर्गत प्रमाणित हो चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उसके नजदीक ही उपलब्ध हों। इतना ही नहीं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हरियाणा ने उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रत्येक जिला अस्पताल में आधुनिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग स्थापित करने का काम तेजी से हो रहा है। आज राज्य में संस्थागत प्रसव दर 98.80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। इसी तरह प्रदेश में पूर्ण टीकाकरण दर 105 प्रतिशत हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल इलाज कर देना ही अच्छी स्वास्थ्य सेवा नहीं कही जा सकती। अच्छी स्वास्थ्य सेवा वह है, जिसमें व्यक्ति को बीमार ही न होने दिया जाए। इसके लिए स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों को जन-जागरूकता अभियान में शामिल होना होगा। लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होंगे तो बीमारियां कम होंगी। हरियाणा में इसके लिए गांव-गांव योग एवं व्यायामशालाएं खोलने और पूरे प्रदेश में खेल संस्कृति विकसित करने का काम किया है।
