प्रसिद्ध कथावाचक आयुष मोहन ‘कृष्ण नयन’ ने दिया संदेश—तीर्थ को पर्यटन न बनाएं, श्रद्धा और संयम से करें दर्शन

तिलकचंद रमोला/ रमोला न्यूज़

नौगांव : नौगांव विकासखंड के कंडाऊ गांव निवासी देश के प्रसिद्ध कथावाचक आयुष मोहन ‘कृष्ण नयन’ ने चारधाम यात्रा और समाज के वर्तमान परिदृश्य को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के चारधामों में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और पर्यटक पहुंच रहे हैं, लेकिन इस दौरान यह ध्यान रखना आवश्यक है कि तीर्थ यात्रा केवल पर्यटन बनकर न रह जाए।
उन्होंने कहा कि जो भी श्रद्धालु चारधाम दर्शन के लिए आएं, वे श्रद्धा और आस्था के साथ आएं, तभी उन्हें आध्यात्मिक लाभ मिलेगा। केवल घूमने या भ्रमण की भावना से आने के बजाय देवभूमि के दिव्य स्वरूप का दर्शन करने का भाव रखना चाहिए, जो जीवन को नई चेतना से भर देता है। उन्होंने यह भी कहा कि तीर्थों में संयम और सदाचार का विशेष महत्व है, क्योंकि यदि तीर्थस्थल पर भी पाप हो जाए तो उसका दुष्परिणाम गंभीर होता है।
कथावाचक नयन ने समाज में बढ़ते नशे और शराब की लत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसका सबसे अधिक प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है, जो देश के भविष्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए युवाओं का मजबूत और संस्कारित होना आवश्यक है। इसके लिए युवाओं को अपने सनातन मूल्यों को समझकर उन्हें जीवन में अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि आज लोग धर्म की बातें तो करते हैं, लेकिन उसे अपने जीवन में धारण नहीं करते। केवल वाणी से नहीं, बल्कि आचरण से धर्म को अपनाना ही सच्चा मार्ग है।
अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कृष्ण नयन ने बताया कि उन्हें धार्मिक संस्कार अपने दादा से मिले, जिनकी प्रेरणा से वे मात्र आठ वर्ष की आयु में वृंदावन चले गए और नौ वर्ष की उम्र में ही कथा वाचन प्रारंभ कर दिया। अब तक वे देश के विभिन्न राज्यों में लगभग 350 से अधिक कथाएं कर चुके हैं।
उन्होंने अपनी जन्मभूमि कंडाऊ गांव और रवांई क्षेत्र की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह क्षेत्र मां यमुना और गंगा की पावन भूमि है, जहां के प्राकृतिक सौंदर्य—पहाड़, झरने, नदियां और जंगल—मन को अपार शांति प्रदान करते हैं। यहां के लोगों में प्रेम और श्रद्धा का भाव कूट-कूट कर भरा हुआ है।
कृष्ण नयन ने कहा कि अपने गांव और क्षेत्र में आकर उन्हें विशेष आत्मिक शांति मिलती है और बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। उन्होंने युवाओं और समाज से अपील की कि वे अपने संस्कारों और परंपराओं को संजोकर रखें और जीवन को सदाचार व संयम के मार्ग पर आगे बढ़ाएं।

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