एनडीए की बुधवार को होने वाली बैठक में राष्ट्रपति और सात राज्य विधानसभाओ के चुनाव पर भी हो सकती है चर्चा

रिपोर्ट : राजेंद्र सिंह जादौन
चंडीगढ़ : नई दिल्ली में बुधवार को नेशनल डेमोक्रेटिक एलाइंस की अहम बैठक होने जा रही है।बैठक ऐसे संधिकाल में होने जा रही है जबकि देश की राजनीति में कई मुद्दे उठ खड़े हुए हैं।कहने को बैठक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बारह साल पूरे होने पर उपलब्धियों और आगे की कार्यनीति पर मंथन किया जाएगा लेकिन यह नहीं माना जा सकता कि अगले साल जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव और सात राज्यों के विधानसभा चुनाव के मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी।हाल में विपक्षी इंडिया गठबन्धन की बैठक भी दिल्ली में हुई थी जिसमें एस आई आर से जुड़ी शिकायतों को भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का फैसला किया गया था।चुनावी हार और इसके बाद पार्टी टीएमसी के बिखराव का सामना कर रही ममता बनर्जी भी बैठक में शामिल हुई और विपक्ष की एकजुटता पर जोर दिया।विपक्षी गठबंधन की सक्रियता पर भी एनडीए मंथन कर सकता है।बैठक विस्तारित होगी।एनडीए मुख्यमंत्री,उप मुख्यमंत्री,घटक दलों के प्रतिनिधि,रक्षामंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री भी बैठक में शामिल होंगे।
एनडीए बैठक से पहले भी सियासी हवा में कई संभावनाएं महसूस की जा रही है।इनमें से जो एक अहम संभावना महसूस की जा रही है वह है मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल। मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में पहले बड़े कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, इसी माह के मध्य में मोदी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। इस बार का फेरबदल केवल प्रशासनिक कसावट के लिए नहीं, बल्कि आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों और सहयोगी दलों के साथ राजनीतिक संतुलन साधने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इस संभावित विस्तार में कई चौंकाने वाले फैसले देखने को मिल सकते हैं, जिसमें 12 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी से लेकर नए युवा चेहरों को मौका देना शामिल है। फेरबदल में मौजूदा मंत्रिपरिषद से करीब 12 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इसके पीछे दो मुख्य वजहें बताई जा रही हैं— पहला, मंत्रियों का लचर रिपोर्ट कार्ड और दूसरा, संगठन को मजबूत करने के लिए कुछ वरिष्ठ नेताओं को वापस पार्टी के काम में लगाना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार अपने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा करते रहे हैं, और माना जा रहा है कि जिन मंत्रालयों में काम की गति धीमी रही है, वहां नए और ऊर्जावान चेहरों को कमान सौंपी जाएगी। इस कैबिनेट विस्तार का एक और सबसे बड़ा पहलू एनडीए के सहयोगी दलों को संतुष्ट करना है। बिहार में आगामी राजनीतिक समीकरणों और जेडीयू की मांग को देखते हुए नीतीश कुमार की पार्टी को इस बार मोदी कैबिनेट में ज्यादा हिस्सेदारी मिल सकती है। चर्चा है कि जेडीयू को एक से दो नए मंत्री पद या महत्वपूर्ण विभाग सौंपे जा सकते हैं, जिससे बिहार में एनडीए गठबंधन को और अधिक मजबूती दी जा सके।
इस कैबिनेट फेरबदल को लेकर सबसे क्रांतिकारी और चौंकाने वाली खबर यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के शीर्ष नेतृत्व या जमीनी युवा नेताओं को सीधे केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल करने पर विचार कर रहे हैं। भाजपा हमेशा से युवाओं को आगे बढ़ाने की बात करती रही है, लेकिन केंद्रीय कैबिनेट में सीधे युवा मोर्चा के कोटे से प्रवेश देकर पीएम मोदी एक बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहते हैं। इसका उद्देश्य देश के युवा वोटर्स को आकर्षित करना और पार्टी में दूसरी पंक्ति के नेतृत्व को तैयार करना है।
देश में 2027 का चुनावी वर्ष काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई बड़े संवैधानिक और राज्य स्तरीय चुनाव शामिल है। इस वर्ष राज्यसभा के नियमित द्विवार्षिक चुनाव होंगे, जिनमें कुछ सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने पर नए सदस्यों का चुनाव कराया जाएगा। इसके साथ ही भारत के राष्ट्रपति का चुनाव भी जुलाई 2027 में होना निर्धारित है, क्योंकि वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल 24 जुलाई 2027 को समाप्त होगा। इसके अलावा, 2027 में सात राज्यों—उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात—की विधानसभाओं के चुनाव भी होंगे। इस प्रकार, 2027 भारतीय राजनीति के लिए एक उच्च महत्व वाला वर्ष होगा, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

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