रंवाई की संस्कृति की मिसाल, ऋषिकेश में मिलीं रंवाई की बेटी नीलम बिजल्वाण से स्वामी प्रसन्नानंद

 तिलक चंद रमोला नौगांव: रंवाई की संस्कृति में अपनी मिट्टी, रिश्तों और अपनत्व की खुशबू आज भी बरकरार है। इसी की एक सुंदर मिसाल ऋषिकेश में देखने को मिली, जहां हंस फाउंडेशन के शूरवीर सिंह रावत उर्फ स्वामी प्रसन्नानंद ने मुनिकीरेती नगरपालिका अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण से उनके कार्यालय में मुलाकात की।

स्वामी प्रसन्नानंद मूल रूप से रंवाई क्षेत्र से हैं, जबकि नीलम बिजल्वाण भी रंवाई बड़कोट की बेटी हैं। स्वामी प्रसन्नानंद ऋषिकेश में प्रवचन कार्यक्रम के सिलसिले में पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने क्षेत्र की बेटी नीलम बिजल्वाण से मिलने का समय निकाला।

मुलाकात के दौरान स्वामी प्रसन्नानंद ने नीलम बिजल्वाण को रंवाई क्षेत्र की पारंपरिक उपज लाल चावल, अखरोट और मंडुवे का आटा भेंट किया। उन्होंने कहा कि जब भी अपने क्षेत्र की बेटियों से मुलाकात होती है तो प्रयास रहता है कि अपनी मिट्टी और क्षेत्र की कोई न कोई भेंट जरूर साथ लेकर जाएं। इससे अपनी संस्कृति, परंपरा और आपसी रिश्तों से जुड़ाव बना रहता है।

इस आत्मीय मुलाकात से नीलम बिजल्वाण भी काफी प्रसन्न नजर आईं। मुलाकात के दौरान रंवाई की संस्कृति, अपनत्व और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की भावना की चर्चा हुई।

उल्लेखनीय है कि नीलम बिजल्वाण ने मुनिकीरेती नगरपालिका अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी। स्थानीय स्तर पर उनकी जीत को लेकर यह भी कहा जाता है कि उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उत्तराखंड में सर्वाधिक मतों से जीत का रिकॉर्ड बनाया है।

रंवाई क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इस मुलाकात को अपनी संस्कृति की खूबसूरत झलक बताते हुए कहा कि अपनी मिट्टी की उपज को भेंट करना और क्षेत्र की बेटियों से आत्मीयता बनाए रखना ही रंवाई की असली संस्कृति और पहचान है।

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