राजनीतिक मतभेद अपनी जगह, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान सर्वोपरि : मुख्यमंत्री

 

पार्वती रमोला 

रमोला न्यूज़ ब्यूरो

चंडीगढ़ , 27 सितंबर — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज देश में आवश्यकता आरोपों की राजनीति की नहीं, बल्कि तथ्यों की राजनीति की है। लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार का विरोध करने, सवाल पूछने और जवाब मांगने का पूरा अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों पर आधारित होने चाहिए और किसी संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाए जाते हैं तो उसके पीछे ठोस प्रमाण भी होने चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) सहित देश की संवैधानिक संस्थाएं किसी एक सरकार या राजनीतिक दल की संस्थाएं नहीं हैं। इनकी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता पूरे देश तथा लोकतंत्र की पूंजी है। इसलिए राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इन संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री रविवार को गुरुग्राम में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। प्रेस वार्ता में हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, सोहना के विधायक तेजपाल तंवर, पटौदी की विधायक बिमला चौधरी, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली भी मौजूद रहे।

*चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने से पहले तथ्य सामने रखे विपक्ष*

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ समय से कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की ओर से चुनाव आयोग, चुनाव प्रक्रिया और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा हो सकता है, लेकिन बिना प्रमाण के गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है, जिस पर देश में चुनाव प्रक्रिया के संचालन और मतदाता सूची को तैयार एवं अपडेट करने की जिम्मेदारी है। चुनाव आयोग स्वयं भी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने और मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य करता है।

*एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की स्थिति स्पष्ट — मुख्यमंत्री*

श्री नायब सिंह सैनी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने एसआईआर से जुड़े अपने निर्णयों और प्रक्रिया के संबंध में स्थिति स्पष्ट की है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार 24 जून 2025 को एसआईआर से संबंधित आदेश जारी किया गया था और बाद में विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में इसके संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए। उन्होंने कहा कि एसआईआर को लेकर फार्म -6 और घोषणा-पत्र के संबंध में भी भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया, जबकि चुनाव आयोग के मौजूदा मतदाता सेवा पोर्टल पर फार्म -6 और संबंधित घोषणा-पत्र की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से उपलब्ध है।

*हर पात्र नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रहना लोकतंत्र की पहली आवश्यकता*

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने से मजबूत नहीं होता। इसके लिए मतदाता सूची शुद्ध और पारदर्शी हो, हर पात्र नागरिक को मताधिकार मिले, चुनाव स्वतंत्र एवं निष्पक्ष हों और जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास मजबूत बना रहे—यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से जमीनी स्तर पर मतदाताओं से संपर्क किया जाता है और छूटे हुए पात्र नागरिकों तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है। चुनाव आयोग ने भी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म एकत्र करने और मतदाताओं की सहायता किए जाने की जानकारी दी है।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन इन मतभेदों के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा नहीं होना चाहिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि “चुनाव आएंगे, चुनाव जाएंगे, लेकिन राष्ट्र अमर रहना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव में जीत और हार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। किसी चुनाव परिणाम को अपने पक्ष में न आने पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। देश और लोकतंत्र सर्वोपरि हैं तथा सभी राजनीतिक दलों को इसी भावना के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

*आज जरूरत आरोपों की नहीं, तथ्यों की राजनीति की*

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आवश्यकता आरोपों की राजनीति की नहीं, बल्कि तथ्यों की राजनीति की है। आवश्यकता भ्रम फैलाने की नहीं, बल्कि सत्य को जनता के सामने रखने की है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने आरोपों के साथ प्रमाण भी प्रस्तुत करने चाहिए, ताकि जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के बजाय उन्हें मजबूत करना समय की आवश्यकता है। संस्थाओं की विश्वसनीयता पर अनावश्यक सवाल उठाने से अंततः लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास पर असर पड़ता है।

*सरकार का विरोध करें, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहे*

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विपक्ष को सरकार की नीतियों का विरोध करने का पूरा अधिकार है। सरकार से सवाल पूछे जाने चाहिए और जवाब भी मांगा जाना चाहिए, क्योंकि यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। लेकिन राजनीतिक विरोध और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा—दोनों को अलग-अलग रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं, नीतियों और कार्यप्रणाली पर विपक्ष अपनी बात मजबूती से रख सकता है, लेकिन चुनाव आयोग या अन्य संवैधानिक संस्थाओं के बारे में गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच और प्रमाणों को सामने रखना चाहिए।

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