हेमंत कुमार (रमोला न्यूज़ ब्यूरो )
कालका, 3अक्तूबर
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कालका में आज विद्यालय के पूर्व छात्र एवं शहीद भगत सिंह यूनिवर्सिटी, फिरोजपुर, पंजाब के कुलपति डॉ. सुरेश शर्मा ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लगभग 1100 विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक मशीन टूल्स के व्यावहारिक एवं सार्थक उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्क्रीन पर प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया कि AI का सही दिशा में उपयोग शिक्षा, चिकित्सा, रक्षा, शोध, सहायता तथा दैनिक जीवन के अनेक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।
डॉ. सुरेश शर्मा ने अपने 32 देशों की यात्राओं तथा विश्व के विभिन्न विश्वविद्यालयों में दिए गए व्याख्यानों और अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ साझा करते हुए बताया कि दुनिया के विभिन्न देशों में AI का किस प्रकार उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि AI एक अत्यंत शक्तिशाली साधन है, लेकिन इसका उपयोग जिम्मेदारी, विवेक और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को केवल AI का इस्तेमाल करना ही नहीं, बल्कि यह समझना भी आवश्यक है कि इसका प्रयोग कब, क्यों और किस प्रकार किया जाए।
उन्होंने चिकित्सा, रक्षा, शिक्षा और दिव्यांग एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे क्षेत्रों में AI की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीक का उद्देश्य मानव जीवन को आसान, सुरक्षित और अधिक सार्थक बनाना होना चाहिए। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को AI के अत्यधिक या गलत प्रयोग से बचने तथा अपनी मौलिक सोच, मेहनत और मानवीय मूल्यों को बनाए रखने की सलाह दी।
‘मेहनत का कोई विकल्प नहीं’
अपने प्रेरणादायी संबोधन में डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को अनेक रोचक एवं मोटिवेशनल प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। उन्होंने विद्यार्थियों को सुबह जल्दी उठने, नियमित व्यायाम एवं सैर करने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी अपने दिन की शुरुआत अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ करते हैं, वे पढ़ाई और जीवन के अन्य क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज विश्व स्तर पर योगदान देने वाले अनेक लोग कठिन परिस्थितियों से निकलकर आगे बढ़े हैं। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अभाव और संघर्ष जीवन की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी हैं, क्योंकि कठिन परिस्थितियां व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और उसे जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं।
अपने विद्यालय के दिनों को किया याद।
डॉ. सुरेश शर्मा ने अपने संबोधन में अपने विद्यार्थी जीवन की अनेक स्मृतियों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कालका के इसी विद्यालय में अध्ययन के दौरान उन्हें श्री ए.डी. अरोड़ा, श्री पुरी, श्रीमती किरण गुप्ता तथा श्री निहाल चंद जैसे श्रेष्ठ शिक्षकों से सीखने का अवसर मिला। उन्होंने तत्कालीन प्रधानाचार्य श्री बी.एम. बाली को भी विशेष रूप से याद करते हुए बताया कि किस प्रकार वे विद्यालय में अनुशासन को विशेष महत्व देते थे।
अपने पुराने विद्यालय में पहुंचकर उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ अपनी पुरानी यादें साझा कीं और विद्यालय के वर्तमान विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. शर्मा की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कार्यक्रम में बताया गया कि उनके 150 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं, वे 32 देशों की यात्रा कर चुके हैं तथा सैकड़ों विश्वविद्यालयों में व्याख्यान दे चुके हैं। वे विश्व की छह विश्वविद्यालयों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य हैं तथा उनके मार्गदर्शन में अनेक विद्यार्थी पीएचडी कर चुके हैं।
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धर्मपत्नी श्रीमती रेनू शर्मा ने भी दिया आशीर्वाद
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इस अवसर पर डॉ. सुरेश शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती रेनू शर्मा, जो चंडीगढ़ की पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी रही हैं, भी उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए शिक्षा, अनुशासन और जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डिप्टी डीईओ पंचकूला श्री नरोत्तम शर्मा ने डॉ. सुरेश शर्मा के व्याख्यान की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों को AI के विभिन्न टूल्स का उपयोग करना तो आता है, लेकिन आज के कार्यक्रम में उन्हें यह महत्वपूर्ण जानकारी मिली कि AI का सही और जिम्मेदार तरीके से प्रयोग किस प्रकार किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर चमन लाल कौशिक ने भारतीय विमानन जगत से जुड़े एक प्रेरणादायी प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार एक भारतीय पायलट ने अपनी सूझबूझ और साहस से एक बड़ी आतंकवादी घटना को टालते हुए अनेक लोगों की जान बचाई और देश का नाम विश्व स्तर पर गौरवान्वित किया।
अरुणा आसफ अली स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्या श्रीमती सीमा सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं तथा उन्होंने अतिथियों का स्वागत किया।
विद्यालय परिवार और कालका के गणमान्य नागरिकों ने किया स्वागत
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राज कुमार आर्य ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह विद्यालय परिवार के लिए गौरव का विषय है कि विद्यालय का एक पूर्व विद्यार्थी आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के बाद अपने पुराने विद्यालय में लौटकर विद्यार्थियों के साथ अपना ज्ञान और अनुभव साझा कर रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. सुरेश शर्मा ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को ताजा करते हुए वर्तमान विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय, व्यावहारिक एवं प्रेरणादायी ज्ञान प्रदान किया है।
उन्होंने कहा कि पूर्व विद्यार्थी और वर्तमान विद्यार्थियों के बीच ऐसा संवाद विद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कार्यक्रम में विद्यालय का समस्त स्टाफ, बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, समाजसेवी, पूर्व विद्यार्थी तथा कालका के सैकड़ों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे जिनमे रामपाल जांगड़ा जो योग शिक्षक हैं उन्होंने मुख्य रूप से बच्चों को योग की जानकारी दी। सभी ने डॉ. सुरेश शर्मा के व्याख्यान को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायी एवं समयानुकूल बताया।
कार्यक्रम में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लगभग 1100 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने AI से संबंधित विभिन्न जानकारियों को गंभीरता से सुना और आधुनिक तकनीक को शिक्षा तथा भविष्य के करियर में सकारात्मक रूप से इस्तेमाल करने की प्रेरणा प्राप्त की।
कार्यक्रम ने विद्यालय के विद्यार्थियों को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि आधुनिक तकनीक भविष्य का शक्तिशाली साधन है, लेकिन तकनीक के साथ मेहनत, अनुशासन, मौलिक सोच, मानवीय संवेदनाएं और नैतिक मूल्यों का होना भी उतना ही आवश्यक है।

