पूर्व न्यायमूर्ति श्याम शंकर उपाध्याय के साथ भारत, भारतीयता और नई शिक्षा नीति पर मंथन; डॉ. चित्रा शर्मा आचार्यकुल झारखंड प्रदेश की उपाध्यक्ष घोषित
रिपोर्ट :अनिरुद्ध मिश्रा
चंडीगढ़ /रांची, 5 अगस्त ।
लखनऊ से झारखंड ज्यूडिशियल एकेडमी, रांची में न्यायाधीशों के प्रशिक्षण हेतु आए पूर्व न्यायमूर्ति श्याम शंकर उपाध्याय के साथ बुधवार को रांची में एक विशेष वैचारिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। संध्या 5 बजे से 8 बजे तक चली इस विचारगोष्ठी में *भारत, भारतीयता और हम*, *राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020*, *कुटुंब प्रबोधन* तथा *तकनीकी और भारतीय ज्ञान परंपरा* जैसे समसामयिक विषयों पर गंभीर एवं प्रेरक संवाद हुआ।
परिचर्चा में रांची विश्वविद्यालय, भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) रांची, भारत विकास परिषद, झारखंड साहित्य संगम तथा आचार्यकुल के प्रमुख शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों ने सक्रिय सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों ने भारतीय संस्कृति, शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
पूर्व न्यायमूर्ति श्याम शंकर उपाध्याय ने कहा, *भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, परिवार व्यवस्था और नैतिक मूल्यों में निहित है। नई शिक्षा नीति इन मूल्यों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है।*
भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) रांची के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के *सहायक प्राध्यापक डॉ. गौरव सुंदरम* ने वैदिक पुरुषसूक्त का प्रभावशाली पाठ कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा, *भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान, अध्यात्म और मानव कल्याण का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।*
*शिक्षिका डॉ. मीना बंधन* ने कुटुंब प्रबोधन पर आधारित अपनी काव्य रचना का पाठ करते हुए कहा, *परिवार भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। संस्कारयुक्त परिवार ही सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण करते हैं।*
गोस्सनर कॉलेज, रांची की वनस्पति विज्ञान विभाग की *प्राध्यापिका डॉ. चित्रा शर्मा* ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के साहित्य पर चर्चा करते हुए कहा, *दिनकर का साहित्य आज भी राष्ट्रीय चेतना, स्वाभिमान और सांस्कृतिक गौरव का प्रेरणास्रोत है।*
भारत विकास परिषद की प्रतिनिधि *विमला पाण्डेय* ने कहा, *ऐसी परिचर्चाएँ समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं तथा विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक साझा वैचारिक मंच प्रदान करती हैं।*
*शिक्षक मनीष शर्मा* ने कहा, *राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय जीवन मूल्यों को शिक्षा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।*
*शिक्षक रंजन शांडिल्य* ने कहा, *आधुनिक तकनीकी विकास के साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।*
*शिक्षा प्रेमी राकेश सिंह* ने कहा, *निरंतर संवाद और वैचारिक विमर्श ही समाज को नई दिशा और नई दृष्टि प्रदान करते हैं।*
परिचर्चा के संयोजक गवर्नमेंट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, रांची के सहायक प्राध्यापक *डॉ. ओम प्रकाश* ने कहा, *इस परिचर्चा का उद्देश्य परिचय के साथ-साथ समसामयिक विषयों पर सार्थक और सहज संवाद स्थापित करना था। विद्वानों के विचारों ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बना दिया।*
इस अवसर पर भारत रत्न आचार्य विनोबा भावे द्वारा स्थापित आचार्यकुल के झारखंड प्रांत के उपाध्यक्ष एवं राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर, धनबाद के संस्थापक प्राचार्य *डॉ. वासुदेव प्रसाद* ने *डॉ. चित्रा शर्मा को आचार्यकुल झारखंड प्रदेश का उपाध्यक्ष घोषित किया तथा उन्हें पौधा भेंट कर सम्मानित किया।* उन्होंने कहा, *डॉ. चित्रा शर्मा की शैक्षणिक प्रतिबद्धता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सक्रियता आचार्यकुल के कार्यों को नई दिशा प्रदान करेगी।*
सभी विद्वानों ने सामूहिक रूप से पूर्व न्यायमूर्ति श्याम शंकर उपाध्याय को पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति उपाध्याय ने अपनी लिखित पुस्तकों का परिचय दिया तथा उनमें से एक पुस्तक की प्रति उपस्थित विद्वानों को भेंट की।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं समाजसेवियों की सक्रिय सहभागिता रही। यह परिचर्चा राष्ट्र, शिक्षा, संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों पर केंद्रित एक प्रेरक एवं स्मरणीय वैचारिक संगोष्ठी के रूप में संपन्न हुई।
