बटाला/अमृतसर, 23 सितंबर-(हरमिंदर नागपाल रमोला न्यूज़)
श्री अकाल तख्त साहिब से आरंभ हुआ मीरी पीरी ख़ालसा मार्च अपने तीसरे पड़ाव के तहत आज गुरुद्वारा पातशाही पांचवीं, ओठियां, बटाला से खालसाई आन-बान और शान के साथ अपने अगले पड़ाव गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी पातशाही नौवीं, बाबा बकाला साहिब के लिए रवाना हुआ।
ख़ालसा मार्च की शुरुआत के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी टेक सिंह, शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के ग्रंथी सिंह साहिब ज्ञानी परविंदरपाल सिंह सहित प्रमुख शख्सियतें और बड़ी संख्या में संगतें उपस्थित थीं। इस अवसर पर सजे धार्मिक दीवान के दौरान सिंह साहिब ज्ञानी परविंदरपाल सिंह ने संगत के साथ गुरु-इतिहास साझा किया और गुरमत के आशय के अनुसार जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि मीरी-पीरी ख़ालसा मार्च श्री अकाल तख्त साहिब के नेतृत्व में पंथक जागरूकता, गुरमत चेतना और गुरु साहिब की विचारधारा को घर-घर पहुँचाने की एक बड़ी लहर है। इस मार्च की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने नौजवानों को नशों से बचाने और वाणी-बाणे से जोड़ने का संदेश गांव-गांव तक पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि कई गांवों में नशों से जुड़ी चिंताजनक बातें इस अहसास को और गहरा करती हैं कि यदि हमें अपने बच्चों को बचाना है, तो केवल सरकारी दावों के भरोसे नहीं बैठा जा सकता। नौजवानों को गुरु की विचारधारा, अमृत की दात और गुरमत जीवन से जोड़ना हमारी साझी जिम्मेदारी है।
एडवोकेट धामी ने बंदी सिंहों का जिक्र करते हुए कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई का लंबे समय से लटका हुआ मसला भी पंथ के सामने एक गंभीर चुनौती के रूप में मौजूद है। उन्होंने कहा कि दशकों से जेलों में नजरबंद इन सिंहों की रिहाई के लिए पंथ को एकजुट होने की जरूरत है। एडवोकेट धामी ने कहा कि खालसा मार्च की पूर्णता के बाद हर हल्के में अमृत संचार समागम करवाए जाएंगे, ताकि हर गांव में गुरमत की बात हो और नौजवानों को गुरु साहिब की विचारधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए इस लहर को आगे भी निरंतर जारी रखना और गुरु साहिब की बख्शी वाणी-बाणे की दात को जीवन का हिस्सा बनाना ही हमारा असल पंथक फर्ज है।
इसी दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज्ज ने कहा कि मीरी-पीरी ख़ालसा मार्च में लाखों की संख्या में सिख संगत ने भाग लेकर गुरु साहिबानों के प्रति अपनी श्रद्धा और श्री गुरु ग्रंथ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब तथा गुरु पंथ के प्रति समर्पण का प्रगटावा किया है। उन्होंने कहा कि यह मीरी-पीरी ख़ालसा मार्च एक अनूठा ऐतिहासिक प्रयास है, जो पंजाब के हजारों गांवों के कोनों से गुजरते हुए संगतों को गुरु साहिबानों की विचारधारा से जोड़ता हुआ पुनः श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचकर संपन्न होगा। उन्होंने कहा कि इस मार्च ने उन धारणाओं को भी गलत साबित कर दिया है कि सिख पंथ ढीला या कमजोर पड़ गया है। हकीकत यह है कि जब पंथक बुलावा श्री अकाल तख्त साहिब के नेतृत्व और गुरु साहिबानों की विचारधारा से जुड़ा हो, तो संगतें आज भी भारी संख्या में एकत्र होती हैं।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से नौजवानों की भागीदारी इस मार्च की बहुत बड़ी उपलब्धि रही है। हजारों नौजवानों द्वारा केश रखने और गुरु की विचारधारा से जुड़ने का प्रण करना इस बात का प्रमाण है कि सिख नौजवानी के भीतर गुरबाणी, गुरु-सिद्धांत और पंथक चेतना के प्रति गहरी रुचि आज भी मौजूद है।
इस अवसर पर सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज्ज, एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह ने पांच प्यारों और निशानची सिंहों को गुरु बख्शिश सिरोपाओ देकर सम्मानित किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को पालकी साहिब में सुशोभित करने की सेवा सिंह साहिब ज्ञानी परविंदरपाल सिंह ने निभाई। ख़ालसा मार्च के दौरान भारी संख्या में संगतें मौजूद रहीं।
इस अवसर पर शिरोमणि कमेटी के सदस्य स. गुरिंदरपाल सिंह गोरा, स. गुरनाम सिंह जस्सल, सीनियर अकाली नेता एवं हल्का इंचार्ज स. लखबीर सिंह लोधी नंगल, श्री नरेश महाजन, मीत सचिव स. मनजीत सिंह तलवंडी, स. सतनाम सिंह रियाड़, इंचार्ज स. मंदीप सिंह, अतिरिक्त मैनेजर स. गुरतिंदरपाल सिंह कादियां, अकाली नेता स. संतोष सिंह, स. बलजिंदर सिंह बज्जूमान, स. अमरीक सिंह बालेवाल, गुरुद्वारा पातशाही पांचवीं ओठियां के मैनेजर स. दविंदर सिंह, बाबा मेजर सिंह सोढ़ी द्वारा निहंग सिंह, बाबा गुरप्रीत सिंह कार सेवा वाले, बाबा मनजीत सिंह मड़ियांवाला, बाबा हरजिंदर सिंह, बाबा बलदेव सिंह लोपोके, बाबा कश्मीर सिंह, बाबा बलदेव सिंह मुतफापुर, हेड प्रचारक भाई सरबजीत सिंह ढोटियां, ज्ञानी बलदेव सिंह मुहाली, स. भूपिंदर सिंह बुट्टर, स. मोहनदीप सिंह और बड़ी संख्या में संगतें उपस्थित थीं।

