तिलक चंद रमोला / रमोला न्यूज़
नौगांव: जौनसार-बावर क्षेत्र की महिलाएं पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। जौनसारी जनजातीय उद्यमी महिला स्वायत्त सहकारिता लिमिटेड ठाणा (चकराता) के माध्यम से स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद अब देहरादून, चकराता सहित देश के अन्य शहरों तक पहुंच रहे हैं।
समिति की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से पहाड़ी नमक, पहाड़ी हरा नमक तथा पहाड़ी अलसी का नमक तीनो ओखली में कूट कर तैयार करते है ।
इसके अलावा कौणी, झंगोरा, मक्का, गेहूं और चावल को पारंपरिक घराट में पिसवाकर जौनसारी बावर काण पौष्टिक
खाद्य पदार्थ कपरोड़ी अस्के बनाए जा रहे हैं। जिन्हें बाजार में अच्छी पहचान मिल रही है। समिति द्वारा चकराता की प्रसिद्ध राजमा, शहद तथा अन्य पहाड़ी उत्पादों का संग्रहण और विपणन भी किया जा रहा है। इन उत्पादों की बिक्री देहरादून और चकराता के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ विभिन्न होटलों में भी की जा रही है।
समिति की अध्यक्ष वंदना चौहान और सचिव शशि सिंह ने बताया कि उनके उत्पाद ‘ट्राइबल क्वीन’ ब्रांड नाम से बाजार में उपलब्ध हैं। उनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि समिति द्वारा तैयार किए जा रहे पारंपरिक नमक और अन्य उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। देहरादून के अलावा दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों से भी ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं तथा ऑनलाइन माध्यम से उत्पादों की बिक्री की जा रही है।
उन्होंने बताया कि समिति पिछले दो वर्षों से कार्यरत है और इससे जुड़ी महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के साथ महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल क्षेत्र में एक सफल मॉडल बनकर उभर रही है।
पहाड़ के स्वाद को देशभर तक पहुंचा रहीं जनजातीय महिलाएं, ‘ट्राइबल क्वीन’ ब्रांड की बढ़ी मांग
