प्रीति कंबोज /रमोला न्यूज़ ब्यूरो
चंडीगढ़, 31 अगस्त। हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन भी विपक्ष के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। लगातार नारेबाजी और शोर के बीच प्रश्नकाल शुरू होने की स्थिति नहीं बन पा रही थी। इसी दौरान प्रदेश के सहकारिता एवं जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण से अनुमति लेकर सदन को लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रश्नकाल की महत्ता का हवाला देते हुए विपक्ष से कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। उनके तर्क के बाद विपक्षी विधायक अपनी सीटों पर लौट आए और प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू हो सकी।
डॉ. शर्मा ने कहा कि विधानसभा में प्रश्नकाल बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसके माध्यम से विधायक अपने-अपने क्षेत्रों और प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दे सरकार के सामने रखते हैं। किसी भी विषय पर विस्तृत चर्चा प्रश्नकाल के बाद की जा सकती है, लेकिन प्रश्नकाल को बाधित करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि 27 अगस्त को सत्र के पहले दिन 20 सवाल सूचीबद्ध थे, लेकिन हंगामे के कारण विधायक अपने क्षेत्रों से जुड़े सवाल सदन में नहीं उठा सके। सोमवार को भी 20 प्रश्न सूचीबद्ध हैं। इनमें सिंचाई, स्वास्थ्य, खेल और बिजली जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े सवाल शामिल हैं। ऐसे में इन सवालों को सदन में उठने का अवसर मिलना जरूरी है।
‘मेरे अधिकार’ से ऊपर जनता का अधिकार
विपक्ष पर निशाना साधते हुए सहकारिता मंत्री ने कहा कि विपक्ष के कई विधायक छह-छह बार चुनकर सदन में पहुंचे हैं। उन्हें सदन के नियमों और संसदीय परंपराओं की पूरी जानकारी है। इसके बावजूद बार-बार ‘मेरे अधिकार’ की बात करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विधायक का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन लोकतंत्र में जनता का अधिकार सबसे ऊपर है। जनता ने अपने प्रतिनिधियों को सदन में इसलिए भेजा है कि वे जनसमस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाएं और सरकार से जवाब लें। यदि प्रश्नकाल ही नहीं चलेगा तो जनता से जुड़े सवालों के जवाब कैसे मिलेंगे।
हंगामा नहीं, सवालों से जनता की आवाज बनेगी
डॉ. शर्मा ने कहा कि विपक्ष अपने मुद्दे प्रश्नकाल के बाद भी पूरी मजबूती के साथ उठा सकता है। सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन प्रश्नकाल को बाधित करना लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि सदन में बहस और विरोध लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इसकी भी एक प्रक्रिया और मर्यादा है। जनता ने विधायकों को सवाल पूछने और सरकार से जवाब मांगने का अधिकार दिया है, सदन की कार्यवाही रोकने का नहीं।
डॉ. अरविंद शर्मा के तर्क पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने मेज थपथपाकर समर्थन किया, इसके बाद सदन में हंगामा शांत हुआ और विपक्षी विधायक अपनी-अपनी सीटों पर बैठ गए। वातावरण सामान्य होने के बाद प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू हुई और विधायकों को अपने क्षेत्रों से जुड़े सवाल उठाने का अवसर मिला।

