टैक्स की दरें बढ़ाकर नहीं बल्कि टैक्स का आधार बढ़ाकर मजबूत करेंगे हरियाणा की राजस्व व्यवस्था: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 

 

पार्वती रमोला 

रमोला न्यूज़ ब्यूरो

चंडीगढ़ , 30 सितंबर-हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा की अपनी राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य करों की दर बढ़ाकर नहीं, बल्कि कर आधार का विस्तार, बेहतर अनुपालन, राजस्व हानि पर रोक और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग के माध्यम से हासिल किया जाएगा। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि ईमानदार करदाता पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना राज्य की वित्तीय क्षमता को बढ़ाया जाए।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी बुधवार को विकसित हरियाणा 2047 के लिए ‘हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था’ के विश्लेषण व मजबूती के लिए आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (एसजेएचआईएफएम) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अरुण गुप्ता, आबकारी एवं कराधान विभाग की आयुक्त एवं सचिव श्रीमती आशिमा बराड़, एसजेएचआईएफएम के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू तथा सलाहकार श्री एनके बिश्नोई सहित नीति-निर्माता, कर प्रशासक, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मजबूत राजस्व व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य केवल अधिक राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि उससे बेहतर सड़कें, स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध करवाकर आमजन के जीवन में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि करदाता को नियमों और प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी मिले तथा कर अनुपालन उसके लिए सरल और पारदर्शी हो, यह सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों, अप्रैल से अगस्त तक, हरियाणा का राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) संग्रह 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संग्रह 19,174 करोड़ रुपये था। अगस्त 2026 में भी हरियाणा के एसजीएसटी संग्रह में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत वृद्धि 13 प्रतिशत रही।

उन्होंने कहा कि देश के कुल जीएसटी करदाताओं में हरियाणा की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से कम है, लेकिन देश के कुल जीएसटी संग्रह में राज्य का योगदान लगभग 7.7 प्रतिशत है। अब आवश्यकता इस वृद्धि को स्थायी राजस्व क्षमता में बदलने की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था से उद्योग और सेवा क्षेत्र आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से आगे बढ़ा है। गुरुग्राम में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत सेवाओं का विस्तार हो रहा है। गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट, आईएमटी खरखौदा में वाहन निर्माण निवेश तथा रेवाड़ी, हिसार और अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स परियोजनाएं राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि पानीपत का टेक्सटाइल उद्योग, अंबाला का वैज्ञानिक उपकरण उद्योग, हिसार का स्टील उद्योग, यमुनानगर का प्लाईवुड उद्योग तथा रोहतक का नट-बोल्ट और ऑटो-कंपोनेंट उद्योग जैसे पारंपरिक एमएसएमई क्लस्टर भी राज्य की आर्थिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर नया उद्योग, निवेश और उद्यम रोजगार के साथ-साथ नए राजस्व आधार की संभावनाएं भी पैदा करता है।

2030 तक 10 और 2047 तक 15 प्रतिशत का लक्ष्य:

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य की आर्थिक क्षमता की तुलना में हरियाणा का अपना कर-राजस्व अभी जीएसडीपी के 7 प्रतिशत से कम है। इसे वर्ष 2030 तक 10 प्रतिशत और वर्ष 2047 तक 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य करों की दरें बढ़ाकर हासिल नहीं किया जाएगा। इसके लिए मौजूदा राजस्व व्यवस्था की दक्षता, कवरेज और उत्पादकता बढ़ाने, कर आधार का विस्तार करने, नियमों के पालन को बढ़ावा देने और राजस्व की हानि रोकने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दर नहीं, आधार बढ़ाना है, बोझ नहीं, अनुपालन बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि जब से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश का कार्यभार संभाला है तब से बाहरी निवेशकों का विश्वास भारत में बढ़ा है। विकसित हरियाणा से ही विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त होगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पुराने लंबित कर विवादों के समाधान के लिए ‘हरियाणा एकबारगी व्यवस्थापन स्कीम, 2026’ लागू की गई है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों का निपटारा करना और अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करना है। वर्ष 2025 की योजना का लाभ लगभग 1 लाख 15 हजार व्यापारियों ने उठाया था। व्यापारियों की सुविधा के लिए इस वर्ष की योजना की अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है। उन्होंने कहा कि ‘पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0’ और ‘ऑटो म्यूटेशन सिस्टम’ के माध्यम से पंजीकरण और इंतकाल की प्रक्रियाओं को डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा रहा है।

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