*मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव ने कालका स्थित नवविवाहित जोड़ों के लिए स्थापित ‘प्रोटेक्शन होम’ (सुरक्षा गृह) का किया औचक निरीक्षण*

 

रोमी सिंह /रमोला न्यूज़

पंचकूला, 16 अप्रैल : मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, एडीआर केंद्र, जिला न्यायालय परिसर, पंचकूला श्री अजय कुमार घनघस ने बताया कि हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पंचकूला के मार्गदर्शन में कालका स्थित नवविवाहित जोड़ों के लिए स्थापित ‘प्रोटेक्शन होम’ (सुरक्षा गृह) का औचक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान प्रोटेक्शन होम के प्रभारी अपने सहायक कर्मचारियों सहित ड्यूटी पर उपस्थित पाए गए। श्री घनघस ने आगंतुक रजिस्टर का गहन निरीक्षण किया, जिसे उन्होंने पूर्व निरीक्षण के दौरान नियमित रूप से बनाए करने के निर्देश दिए थे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रोटेक्शन होम में निवास करने वाले जोड़ों की एंट्री की भी जांच की तथा समुचित प्रबंधन एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कर्मचारियों की ड्यूटी रोस्टर की समीक्षा की।

निरीक्षण के समय प्रोटेक्शन होम में कोई भी जोड़ा निवासरत नहीं पाया गया। तथापि, लाभार्थियों के मध्य विधिक जागरूकता के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री घनघस ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों/कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं से संबंधित पर्याप्त प्रचार सामग्री उपलब्ध कराएं। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि उक्त सामग्री प्रोटेक्शन होम में सदैव उपलब्ध रहे, ताकि भविष्य में वहां आश्रय लेने वाले जोड़े विधिक साक्षरता संसाधनों से लाभान्वित हो सकें और अपने अधिकारों एवं उपलब्ध विधिक उपायों के प्रति जागरूक बनें।

इसके साथ ही श्री घनघस ने ग्राम रत्तेवाली का भी दौरा किया, जहां वर्तमान में एक ‘विधिक सहायता क्लिनिक’ संचालित है। उन्होंने वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, जैसे कुर्सियां, मेज एवं अन्य आवश्यक संसाधनों का निरीक्षण किया। उल्लेखनीय है कि इन सुविधाओं की व्यवस्था हेतु उन्होंने पूर्व में निर्देश जारी किए थे, ताकि विधिक सहायता गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित हो सकें। क्लिनिक के प्रभावी संचालन के लिए इन व्यवस्थाओं की पर्याप्तता का भी विस्तृत मूल्यांकन किया गया।

स्थानीय निवासियों के साथ संवाद के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विधिक सहायता क्लिनिक का वर्तमान स्थान आमजन के लिए पर्याप्त रूप से सुलभ नहीं है। इस पर विचार करते हुए श्री घनघस ने सुझाव दिया कि क्लिनिक को ग्राम के किसी सरकारी विद्यालय में स्थानांतरित किया जाना अधिक उपयुक्त रहेगा, क्योंकि ऐसा स्थान आम जनता के लिए अधिक सुगम एवं परिचित होता है।

उन्होंने निर्देश दिए कि जिला शिक्षा अधिकारी, पंचकूला तथा संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य को औपचारिक पत्र के माध्यम से उपयुक्त स्थान एवं आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया जाए। इस पहल से जनसहभागिता में वृद्धि होने तथा ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होना संभव होगा ।

यह निरीक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पंचकूला की उस सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत समाज के सभी वर्गों को पारदर्शी, प्रभावी एवं सुलभ विधिक सहायता सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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