चंडीगढ़, 23 अप्रैल 2026:(हरमिंदर नागपाल/ रमोला न्यूज़)
आज सेक्टर-39 स्थित आम आदमी पार्टी कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस अवसर पर पार्षद हरदीप सिंह बुटेरला, पूर्व मेयर कुलदीप कुमार ढलोर, पार्टी प्रवक्ता योगेश धींगरा एवं स्टेट मीडिया इंचार्ज विक्रांत ए तंवर उपस्थित रहे।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पार्षद हरदीप सिंह बुटेरला ने चंडीगढ़ में कूड़ा प्रबंधन से जुड़े गंभीर मुद्दों को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने प्रेस के सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि शहर में कूड़े के निपटारे का मामला अब बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुका है और इससे चंडीगढ़ प्रशासन और भाजपा शासित नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में दाखिल एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि प्रशासन दावा करता है कि प्रतिदिन 286 मीट्रिक टन कूड़ा प्रोसेस किया जा रहा है, लेकिन करीब 96 मीट्रिक टन कूड़े का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है।
इस पर उन्होंने पहला सीधा सवाल उठाया—“आखिर 96 मीट्रिक टन कूड़ा जा कहां रहा है?”
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले डॉ. सनी अहलूवालिया द्वारा पंजाब की ओर जा रहे कूड़ा ले जाने वाले ट्रकों को रोका गया था, जिसे उस समय प्रशासन ने नकार दिया था। लेकिन अब रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि कूड़े का सही तरीके से निपटारा नहीं किया जा रहा, बल्कि उसे अलग-अलग जगहों पर फेंका जा रहा है।
इस पर उन्होंने दूसरा सवाल उठाया—“क्या भाजपा शासित निगम चंडीगढ़ का कूड़ा दूसरे राज्यों में फेंककर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है?”
बुटेरला ने इस मुद्दे पर खर्च हो रहे करोड़ों रुपये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो खाद तैयार की जा रही है, उसमें भारी धातुएं पाई गई हैं, जिससे वह जहरीली बन चुकी है। यह खाद पार्कों और फलों-सब्जियों में इस्तेमाल हो रही है, जिससे कैंसर और त्वचा रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
इस पर उन्होंने तीसरा बड़ा सवाल पूछा—“जब खाद जहरीली है, तो इसे जनता के बीच इस्तेमाल करने की इजाजत किसने दी और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”
उन्होंने आगे कहा कि रोजाना लगभग 121 मीट्रिक टन बिना प्रोसेस किया हुआ कूड़ा सीधे डंपिंग ग्राउंड में डाला जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संकट और गहरा होता जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि जो दावे किए जा रहे हैं, वे जमीनी हकीकत से बिल्कुल अलग हैं।
इस मौके पर योगेश धींगरा ने कहा कि चंडीगढ़ की जनता से वर्षों से कूड़े के पहाड़ को खत्म करने के वादे किए जा रहे हैं, लेकिन पिछले 12 वर्षों से भाजपा का मेयर होने के बावजूद स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि डंपिंग ग्राउंड पर जाकर कोई भी व्यक्ति वास्तविक स्थिति देख सकता है और यह स्पष्ट है कि जनता को बार-बार गुमराह किया जा रहा है।
उन्होंने आगे सवाल उठाया कि जब रिपोर्ट में केवल 190 टन कूड़ा ही वहां पहुंचने की बात कही गई है, तो बाकी कूड़ा कहां जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कूड़े को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के आसपास के निचले इलाकों में दबाया जा रहा है। उन्होंने इसे जनता के पैसे की खुली लूट करार देते हुए कहा कि यदि कूड़ा इधर-उधर फेंकना ही है, तो करोड़ों रुपये खर्च करने का क्या औचित्य है।
इंदौर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां मात्र 16 करोड़ रुपये में एक वर्ष के भीतर कूड़े के पहाड़ को खत्म कर दिया गया और उस स्थान पर पार्क विकसित कर दिया गया। इसके विपरीत, चंडीगढ़ में 2024 से 2026 के बीच लगभग 202 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2021 में आम आदमी पार्टी को 14 पार्षदों का जनादेश मिलने के बाद से पार्टी लगातार इस मुद्दे को उठा रही है। उन्होंने दावा किया कि यदि कूड़े के पहाड़ में 20-25% की कमी आई है, तो वह केवल आम आदमी पार्टी के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
पूर्व मेयर कुलदीप कुमार ढलोर ने भी प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि उनका घर डंपिंग ग्राउंड के पास है और वे इस समस्या को करीब से देख रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कूड़े के पहाड़ को खत्म करने के बजाय उसे छिपाने के लिए 20 फीट ऊंची दीवार बनाई गई है। उन्होंने कहा कि कूड़े को खत्म नहीं किया जा रहा, बल्कि उसे अन्य जगहों पर फैलाया जा रहा है, जिससे पानी और वातावरण दोनों प्रदूषित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 40 वर्षों से लोग इस डंपिंग ग्राउंड को हटाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम और प्रशासन इस मामले में हाईकोर्ट और जनता दोनों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए मई 2026 तक कूड़े के निपटारे का निर्देश दिया है।
अंत में मुख्य मांगें रखी गईं:
96 मीट्रिक टन कूड़ा कहाँ जा रहा है, इसका स्पष्ट जवाब दिया जाए
जहरीली खाद के उपयोग पर तुरंत रोक लगाई जाए
202 करोड़ रुपये के खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए
पूरे मामले की विजिलेंस या सीबीआई से जांच करवाई जाए
