सुमेश कुमार /रमोला न्यूज़
चंडीगढ़, :
आज यू.टी. चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव श्री एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में चंडीगढ़ पुलिस की कानून व्यवस्था, पुलिसिंग, ट्रैफिक प्रबंधन, पुलिस आधुनिकीकरण तथा विभिन्न चल रही परियोजनाओं एवं सुधारात्मक पहलों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में गृह सचिव श्री मंदीप सिंह बराड़, डीजीपी चंडीगढ़ डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, आईजीपी चंडीगढ़ श्री पुष्पेंद्र कुमार, एसएसपी सुरक्षा एवं ट्रैफिक श्री सुमेर प्रताप सिंह, एसएसपी सिटी सुश्री कंवरदीप कौर, अतिरिक्त सचिव गृह श्री अमित कुमार सहित चंडीगढ़ पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा वर्तमान कानून व्यवस्था की स्थिति, अपराधों की स्थिति, दोषसिद्धि दर, तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, ट्रैफिक प्रबंधन पहलों, साइबर अपराध निगरानी प्रणाली, पुलिस कमांड एवं कंट्रोल सेंटर की कार्यप्रणाली तथा विभिन्न आधारभूत संरचना एवं आधुनिकीकरण परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। बैठक में CenCOPS के क्रियान्वयन, वाहनों की खरीद, बजट उपयोग तथा चंडीगढ़ पुलिस में लंबित रिक्तियों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान यू.टी. चंडीगढ़ में तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की स्थिति की व्यापक समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अवगत कराया कि नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में चंडीगढ़ अग्रणी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि CenCOPS के अंतर्गत साइबर अपराधों की निगरानी हेतु आवश्यक चेक्स एंड बैलेंस से संबंधित प्रणालियां एवं प्रोटोकॉल तैयार कर लिए गए हैं तथा इन्हें शीघ्र लागू किया जाएगा। पुलिस रेडियो संचार प्रणाली को एनालॉग से डिजिटल मोड में परिवर्तित करने की प्रगति पर भी चर्चा हुई। नए पुलिस थानों के निर्माण सहित विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
चंडीगढ़ पुलिस की समग्र तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने चंडीगढ़ की विशेष संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पुलिस बल, परिचालन क्षमता तथा विशेष प्रशिक्षण को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी होने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण संस्थानों एवं प्रमुख बाजार क्षेत्रों वाला शहर है। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिसिंग में अधिक जवाबदेही एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) तैयार की जाएं तथा बॉडी कैमरा फुटेज की नियमित एवं आकस्मिक निगरानी की जाए।
मुख्य सचिव ने विशेष रूप से जघन्य अपराधों, एनडीपीएस मामलों तथा साइबर अपराध मामलों में दोषसिद्धि दर को और बेहतर बनाने के लिए केंद्रित प्रयास करने के निर्देश दिए। साइबर अपराधों के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्होंने निर्देश दिए कि व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएं तथा उभरते साइबर खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संस्थागत क्षमता एवं विशेष कौशल को मजबूत किया जाए।
ट्रैफिक प्रबंधन उपायों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने नागरिकों, विशेषकर विद्यार्थियों, के बीच सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि ट्रैफिक सिग्नल प्रबंधन प्रणाली को ट्रैफिक की वास्तविक मात्रा के अनुसार अधिक गतिशील बनाया जाए ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारू हो तथा जाम की स्थिति कम हो।
उन्होंने शहर के सभी लाइट प्वाइंट्स को स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कानून व्यवस्था एवं ट्रैफिक प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों के अधिक उपयोग के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रैफिक चालान जुर्माने की वसूली की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए ताकि रिकवरी प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सके। ट्रैफिक प्रबंधन से संबंधित विभिन्न विभागों के बीच समन्वय वाले मुद्दों को शीघ्र अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से हल करने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्य सचिव ने चंडीगढ़ पुलिस अधिकारियों को मोहाली, पंचकूला तथा न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) से लगते सीमावर्ती क्षेत्रों में नाकों को और अधिक सुदृढ़ करने तथा सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि कानून व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के साथ-साथ अंतरराज्यीय गतिविधियों पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बीट बॉक्स प्रणाली की नियमित समीक्षा कर उसे और मजबूत बनाने के निर्देश भी दिए ताकि पुलिस की क्षेत्रीय उपस्थिति, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता तथा जनसुरक्षा को और सुदृढ़ किया जा सके।
बैठक के दौरान चंडीगढ़ पुलिस में अतिरिक्त जनशक्ति सृजन एवं रिक्त पदों को भरने के मुद्दे की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने चंडीगढ़ पुलिस में अनुकंपा नियुक्तियों से संबंधित मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक के दौरान कारागार एवं सुधार प्रशासन विभाग की विभिन्न चल रही परियोजनाओं एवं योजनाओं की भी समीक्षा की गई, जिनमें जीवंधारा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), अविष्कार अकादमी, मॉडल जेल में अतिरिक्त निर्माण कार्य तथा गौशाला एवं डेयरी फार्म स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है।
