हेमंत कुमार/ रमोला न्यूज़
कालका 3 जुलाई
पिछले कई महीनो से पिंजौर-मोरनी वन मंडल क्षेत्र में हजारों पेड़ों की अवैध कटान के मामले में वन विभाग द्वारा वनों की तेजी से हो रही कटाई की जांच की खानापूर्ति पर रोष जताते हुए शिवालिक विकास मंच प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय बंसल एडवोकेट ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को ज्ञापन भेज कर ठंडे बस्ते में डाल दी गई पेड़ों की अवैध कटान की जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारीयों पर तुरंत सख्त विभागीय कार्रवाई करने, हरियाणा के वन क्षेत्र को बढ़ावा देने और पेड़ों की सुरक्षा के लिए विशेष नई वन नीति बनाने और वन विभाग में भारी संख्या में पड़े रिक्त पदों पर नई भर्ती कर नियुक्ति करने की मांग की है ताकि वन और जंगली जीव जंतु की रक्षा हो सके।
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि जिला पंचकूला, चंडीगढ़ और मोहाली जैसे ट्राई सिटी क्षेत्र के लिए ऑक्सीजन का फेफड़ा कहलाए जाने वाले पिंजौर -मोरनी वन मंडल की हरियाणा प्रदेश के कुल वन क्षेत्र में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि हरियाणा के कुल क्षेत्रफल में मात्र 3.65 प्रतिशत में वन क्षेत्र है इसलिए ऐसे गंभीर मामले में सरकार और वन विभाग प्रशासन किला प्रवाही के चलते लगातार पेड़ों की हो रही अवैध कटान वन क्षेत्र के पतन का कारण बन सकती है। विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि हरियाणा की भाजपा सरकार की नाकामियों प्रशासन एवं वन विभाग की लापरवाही के कारण हरियाणा में वन क्षेत्र तेजी से सिकुड़ते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2010 तक वन क्षेत्र 10% तक जबकि 2020 तक 20% तक वन क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन जैसे ही वर्तमान बीजेपी सरकार आई पेड़ों की धड़ल्ले से अवैध कटाई लगातार जारी है इतना ही नहीं अवैध कटान मामले में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों का मात्र एक महीने के अंदर निलंबन वापस लेकर उन्हें फिर से पुनः पिंजौर मोरनी वन मंडल में ही नियुक्त कर दिया गया।
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि यह पूरा वन मंडल क्षेत्र पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम 1900 की धारा 4, वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा 2 तथा सर्वोच्च न्यायालय के 22 जुलाई 2022 के आदेश के अनुसार किसी भी प्रकार की वृक्ष की कटाई के लिए यह प्रतिबंधित क्षेत्र है। बावजूद इसके पंचकूला में वन विभाग का मुख्यालय होने के बावजूद मोरनी के मुवास क्षेत्र और रायपुर रानी के आसरेवाली जबकि पिंजौर के एचएमटी की जमीन (अब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधीन), पिंजौर के गांव कोना और जैथल आदि में काटे गए लगभग 6000 पेड़ों की अवैध कटान के मामले में आधा दर्जन से अधिक वन कर्मचारी और अधिकारियों को निलंबित किया गया था, जिन में दो वरिष्ठतम आईएफएस अधिकारियों को कार्य मुक्त किया गया था जो की अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि अवैध वृक्ष कटान के मामले की जांच रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों एवं कर्मचारी के निलंबन के लगभग 1 महीने बाद ही उन्हें बहाल कर फिर से पिंजौर- मोरनी वन मंडल में ही नियुक्त कर दिया गया जबकि मुवास के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में एनजीटी की अदालत में वन विभाग के डीएफओ, रेंज अधिकारी फॉरेस्टर सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी पक्षकार हैं और यही अधिकारीआसरेवाली अवैध कटाई मामले में भी जांच का सामना कर रहे हैं ऐसे में उनकी पुनर्नियुक्ति से लंबित पड़ी जांच और कानूनी कार्रवाई को प्रभावित कर सकती है। क्योंकि जांच में आवश्यक रिकॉर्ड और रिपोर्ट डीएफओ मोरनी- पिंजौर कार्यालय से ही प्राप्त किए जाने हैं। इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए अधिकारियों पर तुरंत विभागीय कार्रवाई कर उन्हें पिंजौर- मोरनी वन मंडल कार्यालय से हटाकर सख्त विभागिय कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
गौरतलब है कि मार्च 2025 में गांव मुवास के निकट लगभग 2000 सफेदे के वृक्षों की कथित तौर पर अवैध कटाई की गई थी, मार्च 2026 में जिला के ग्राम आसरेवाली के निकट वन क्षेत्र से लगभग 15 00 कीमती खैर के वृक्षों की अवैध कटाई की गई थी, साथ ही एचएमटी कंपलेक्स पिंजौर में लगभग 1500 खैर वर्षों की अवैध कटाई, गांव जैथल और गांव कोना क्षेत्र में भी कत्था बनाने के लिए प्रयोग होने वाले खेर के पेड़ों की अवैध कटाई की गई है।
विजय बंसल ने कहा कि इतना ही नहीं वन विभाग के पूरे प्रदेश में हजारों पद रिक्त पड़े हैं। उनके द्वारा सूचना के अधिकार 2005 के तहत वन विभाग से मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ है कि वन मंडल में भारी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं। विशेषकर पिंजौर- मोरनी वन मंडल विशेष कर पिंजौर- मोरनी डिवीजन में फॉरेस्ट डिप्टी रेंजर के 7 पद स्वीकृत है लेकिन 2 डिप्टी रेंजर ही काम कर रहे हैं पांच पद रिक्त पड़े हैं, इसी प्रकार फॉरेस्ट गार्ड के 105 स्वीकृत पद हैं मात्र 22 फॉरेस्ट गार्ड काम कर रहे हैं 84 पद खाली पड़े हैं, इसी प्रकार 27 पद दरोगा के स्वीकृत हैं उन पर 28 दरोगा काम कर रहे हैं जबकि इनमें से 6 दरोगा को वन्य जीव विभाग में लगा रखा है, वन मंडल में मजदूरों के 22 पद स्वीकृत हैं मात्र 10 ही काम कर रहे हैं, इसके अलावा वन विभाग में 163 वन राखे (कच्चे क्षेत्रीय कर्मी ) इतना ही नहीं वन्य जीव डिपार्टमेंट में वन्य प्राणी संरक्षक के 22 पद स्वीकृत है मात्र 6 संरक्षक ही काम कर रहे हैं 16 पद रिक्त पड़े हैं, इसी प्रकार वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर के 5 पद स्वीकृत है दो पद खाली पड़े हैं वाइल्डलाइफ डेप्युटी इंस्पेक्टर के चार पद स्वीकृत है मात्र एक डिप्टी इंस्पेक्टर ही काम कर रहा है तीन पद खाली पड़े हैं। वन विभाग में कर्मचारियों के भारी संख्या में पद रिक्त पड़े होने के कारण ही पेड़ों की अवैध काटन और वन्यजीवों के शिकार करने जैसी घटनाएं सामने आती है। विजय बंसल एडवोकेट ने बताया कि इसी वन मंडल क्षेत्र में वनों और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए फॉरेस्ट कर्मचारियों के लिए 69 बीट बनाई गई थी जिन में उसी आधार पर वनकर्मी तैनात थे लेकिन उनकी बीट भी कम कर मात्र 42 कर दी गई है यानी एक कर्मचारी को पहले की तुलना में लगभग दोगुने क्षेत्र की रक्षा करनी पड़ रही है।
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि यहां नियुक्त किए गए वन अधिकारियों और कर्मचारीयों की लापरवाही के कारण धड़ले से लगातार पेड़ों की अवैध कटाई जारी है। वन विभाग और प्रशासन ने भी इस गंभीर मामले की जांच में खानापूर्ति की है और किसी भी अधिकारी और कर्मचारी पर कार्यवाही नहीं की गई है, उन्होंने प्रश्न किया कि क्या ऐसी पुर्ननियुक्तियां जांच से संबंधित रिपोर्ट तथा अन्य साक्षयों को प्रभावित नहीं कर सकती है?
विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि हरियाणा प्रदेश और एकमात्र पहाड़ी क्षेत्र मोरनी- पिंजौर वन मंडल में पेड़ों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वन विभाग में रिक्त पड़े भारी संख्या में रिक्त पड़े पदों पर तुरंत नियुक्ति की जाए और वनों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में नई वन नीति बनाकर पर्यावरण को सुरक्षित किया जाए। विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि वन विभाग में कार्यालय में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या तो अधिक है लेकिन फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
